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#हिंदीहैंहम: अशोक गौतम के चुटीले व्यंग्यों ने बनाई देश में पहचान

Tue, 07 Sep 2021 12:23 PM IST
Krishan Singh शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, सोलन
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, सोलन Published by: Krishan Singh Updated Tue, 07 Sep 2021 12:23 PM IST
सार

 सोलन जिले के अर्की उपमंडल के म्याणा गांव में 24 जून, 1961 को जन्मे अशोक गौतम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से साठोत्तर प्रमुख हिंदी नाटकों में अस्तित्ववादी-चेतना शोध विषय पर पीएचडी करते ही प्रदेश के उच्चतर शिक्षा विभाग में हिंदी विषय के प्राध्यापन कार्य की शुरुआत की। 

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Hindi Hain Hum: Ashok Gautam's cheeky satire Made identity in the country
मशहूर व्यंग्यकार अशोक गौतम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदी भाषा के संवर्धन साहित्य में उत्कृष्ट कार्य करने पर राष्ट्रीय प्रवक्ता सम्मान से नवाजे गए हिमाचल प्रदेश के जिला सोलन के मशहूर व्यंग्यकार अशोक गौतम के व्यंग्यों ने देश में अलग पहचान बनाई है। उनकी अमर उजाला सहित देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सौ से अधिक हिंदी कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं। कोविड काल के दौरान उनके नए प्रकाशित व्यंग्य संग्रह अमृत अल्कोहल दोऊ खड़े ने देश भर के साहित्य आलोचकों व व्यंग्यकारों में अलग पहचान बनाई है। सोलन जिले के अर्की उपमंडल के म्याणा गांव में 24 जून, 1961 को जन्मे अशोक गौतम ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला से साठोत्तर प्रमुख हिंदी नाटकों में अस्तित्ववादी-चेतना शोध विषय पर पीएचडी करते ही प्रदेश के उच्चतर शिक्षा विभाग में हिंदी विषय के प्राध्यापन कार्य की शुरुआत की। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में रहते उन्होंने शिक्षा विभाग के लिए कक्षा तीन, चार व पांच के लिए अठारह पुस्तकों का संयोजन व संपादन किया है।

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अब तक हिंदी साहित्य में यह है योगदान
अशोक गौतम की अब तक लट्ठमेव जयते, गधे ने जब मुंह खोला, झूठ के होलसेलर, खड़ी खाट फिर भी ठाठ, ये जो पायजामे में हूं मैं, साढ़े तीन आखर अप्रोच के, मेवामय ये देश हमारा, फेसबुक पर होरी, पुलिस नाके पर भगवान, वफादारी का हलफनामा, नमस्कार को पुरस्कार, आओ दलाली खाएं, भक्ति बिनु मुक्ति नाहीं गोपाला, सदाचार का सैनिटाइजर, डुप्लीकेट चाबियों का माहिर, श्रीश्री एक सौ साठ श्री, ओम व्हाट्स्यपाय नम:, ओ तेरी...., पांव दबा, पांव जमा, हवा भरने का इल्म, गरम जेब, ठंडी रजाई, सिंक पर बॉस, चिकन शिकन ते हिंदी सिंदी, विमोचन का रीटेक, हम नंगन के, लॉकडाउन, नंदू दिन में सपना देखा, जन्मदिन पर जूते, करोनो अतिथि भव:, फ्रेश नाक वाले, अमृत अल्कोहल दोऊ खड़े, ठेले पर लाइफ, पूंछ चमकाने वाला तेल, ज्ञानपीठ कोचिंग सेंटर व्यंग्य संग्रह सहित देश के अग्रणी पत्र पत्रिकाओं में 100 के लगभग  कहानियां प्रकाशित हो चुकी हैं।

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