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Shimla News: हिमुडा को प्लॉट की बुकिंग राशि पर देना होगा ब्याज

Mon, 02 Nov 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Nov 2026 11:59 PM IST
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HIMUDA will have to pay interest on the plot booking amount.
राज्य उपभोक्ता आयोग ने सुनाया फैसला
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पांच फीसदी सालाना ब्याज के साथ करनी होगी अदायगी
रुचि सांख्यान
शिमला। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हिमाचल प्रदेश हाउसिंग एंड अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हिमुडा) को झटका देते हुए आवेदक को बुकिंग राशि पर 5 फीसदी ब्याज देने के आदेश दिए हैं।

राज्य आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति इंदर सिंह मेहता और सदस्य प्रताप सिंह ठाकुर की पीठ ने हिमुडा के सीईओ-कम-सचिव की ओर से दायर अपील का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि प्राधिकरण को 18 दिसंबर 2011 से 15 फरवरी 2022 तक पांच प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा। इसके अलावा जिला उपभोक्ता आयोग की ओर से निर्धारित मुआवजा और मुकदमे का खर्च भी बरकरार रखा गया है। मूल रूप से सोलन जिले के कंडाघाट एवं वर्तमान में टुटीकंडी (शिमला) निवासी देवी सिंह चौहान ने वर्ष 2010 में हिमुडा की ओर से शुरू की गई पार्शियल सेल्फ फाइनेंसिंग डिमांड सर्वे स्कीम के तहत प्लॉट के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उन्होंने 18 दिसंबर 2010 को 5,000 रुपये बतौर बुकिंग राशि नकद जमा करवाए थे। शिकायतकर्ता के अनुसार 11 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद हिमुडा ने न तो उन्हें प्लॉट आवंटित किया और न ही परियोजना की अंतिम स्थिति के बारे में कोई सूचना दी। इसके बाद उन्होंने नियमों के अनुसार ब्याज सहित राशि लौटाने की मांग की लेकिन हिमुडा ने केवल 5,000 रुपये की मूल राशि वापस की और ब्याज देने से इन्कार कर दिया। इसे सेवा में कोताही बताते हुए उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग शिमला में शिकायत दर्ज करवाई थी। जिला आयोग ने उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया था। इसके बाद हिमुडा ने इस फैसले के खिलाफ राज्य आयोग में अपील दायर की थी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य आयोग ने कहा कि मूल विज्ञापन की शर्त संख्या तीन के अनुसार, योजना पूरी न होने या रद्द होने की स्थिति में एक साल बाद से पांच प्रतिशत सालाना ब्याज देने का प्रावधान था। आयोग ने स्पष्ट किया कि योजना की शर्तों में सूचना देने के लिए केवल विज्ञापनों का उल्लेख नहीं था तो अखबारों में विज्ञापन जारी करना व्यक्तिगत सूचना देने का विकल्प नहीं हो सकता। आयोग ने इसे सेवा में कोताही माना। राज्य आयोग ने जिला आयोग की ओर से निर्धारित नौ प्रतिशत ब्याज दर को संशोधित कर पांच प्रतिशत कर इसके भुगतान के आदेश दिए हैं।
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