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स्मृति शेष: देश में पहली बार हिमाचल के लिए एंटी हेलगन लाए थे नरेंद्र बरागटा

Sat, 05 Jun 2021 07:47 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 05 Jun 2021 07:47 PM IST
सार

दिवंगत बरागटा ने बागवानी, सड़क व जन कल्याण से जुड़े ऐसे कई काम किए, जिनके लिए क्षेत्र की जनता उन्हें हमेशा याद करती रहेगी। वह क्षेत्र के लोगों के मुद्दे अपनों से लड़कर भी उठाते रहे। 

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himchal govt Chief Whip Late Narender Bragta achievements and his Contribution to the himachal pradesh
पूर्व मंत्री नरेंद्र बरागटा(फाइल) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिवंगत नरेंद्र बरागटा देश में पहली बार हिमाचल के लिए एंटी हेलगन लाए थे। इस विदेशी तकनीक से उन्होंने प्रदेश के सेब बागवानों की ओलावृष्टि की समस्या का निदान करने का प्रयास किया था। बागवानी महत्व की ठियोग-हाटकोटी सड़क के निर्माण के लिए भी बरागटा ने लंबी लड़ाई लड़ी थी। चीन की कंपनी को काम मिलने के बाद नरेंद्र बरागटा छैला चौक टू चाइना कहकर यह जताने की कोशिश करते थे कि इस सड़क के निर्माण के लिए यूनिवर्सल टेंडर लगवाने की उनकी मुहिम कामयाब रही। 

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प्रदेश में करीब चार हजार करोड़ रुपये का सेब बागवानी का कारोबार ओलावृष्टि से हर साल चौपट होता देखकर नरेंद्र बरागटा इस समस्या से निदान दिलाने के लिए बहुत चिंतित थे। जहां धूमल सरकार में वह एंटी हेलनेट पर सब्सिडी बढ़ाने के हिमायती रहे, वहीं उन्होंने विदेशों से प्रदेश में एक ऐसी तकनीक लाकर सबको चौंका दिया, जिससे ओले रोके जाने के दावे किए जाने लगे। इसे एंटी हेलगन कहा जाता है। जुब्बल-कोटखाई में एंटी हेलगन की स्थापना भी की गई। इससे ध्वनि तरंगें आसमान में छोड़ी जाती हैं। ओलावृष्टि का पूर्वाभास होने से पहले ही ये बंदूूकें चलाई जातीं तो इनसे विस्फोट जैसे आवाज होती। इससे ओले बनने से पहले ही नष्ट हो हो जाते थे।
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इस तकनीक के बारे में बरागटा बहुत चर्चित रहे। बागवानी महत्व की ठियोग-हाटकोटी सड़क का पहले बुरा हाल था। प्रदेश की सत्तर फीसदी से अधिक सेब की फसल का परिवहन इसी सड़क से होता है। पर इसमें सेब सीजन के दौरान घंटों जाम लगा रहता था। नरेंद्र बरागटा एचपीआरआईडीसी के तहत इस सड़क को स्टेट प्रोजेक्ट में शामिल करवाने, इसके यूनिवर्सल टेंडर करवाने जैसे मुद्दों पर खासे संघर्षरत रहे। बाद में एक चीनी कंपनी लोंग जियान ने इस सड़क का काम लिया तो इसकी भी वह कड़ी निगरानी करते रहे। बार-बार गुणवत्ता का मामला उठाते रहे। बाद में यह कंपनी काम छोड़कर गई तो सीएनसी कंपनी को इसका काम दिया गया। नरेंद्र बरागटा इसका भी लगातार फालोअप करते रहे। 

सेब के लिए नई विदेशी किस्में लाईं, टिश्यू कल्चर लैब स्थापित की
नरेंद्र बरागटा ने हिमाचल प्रदेश के निचले क्षेत्रों के लिए नई विदेशी किस्में भी धूमल सरकार में मंत्री रहते मंगवाई थीं। इन क्षेत्रों में बागवानी विस्तार करने का भी उन्होंने एक विशेष अभियान चलाया। इसके अलावा राज्य में टिश्यू कल्चर सेब उत्पादन की प्रयोगशालाएं भी उन्होंने स्थापित करवाईं।


लगातार उठाते रहे आयात शुल्क का मामला  
सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने और हिमाचल के बागवानों को उनकी उपज का अच्छा मूल्य दिलाने के लिए भी नरेंद्र बरागटा हमेशा संघर्षरत रहे। विदेशी सेब  पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़वाने का मामला वह केंद्रीय मंत्रियों से भी लगातार उठाते रहे। 

दवाओं पर सब्सिडी की नई योजना का किया था विरोध  
बरागटा ने हाल ही में प्रदेश में दवाओं पर सब्सिडी की नई योजना का भी विरोध किया। उन्होंने डीबीटी के बजाय पहले की तरह ब्लाकों से ही दवाओं की आपूर्ति करने का मामला उठाया था। नरेंद्र बरागटा ने प्रदेश में सेब बागवानों की फसल बीमा योजना का लाभ उन्हें नहीं मिलने का मामला प्रमुखता से उठाया। बागवानी के मुद्दों पर वह अपनी ही सरकार को विधानसभा के भीतर घेरने से भी नहीं चूकते थे।

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