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हिमाचली बागवान ने जमीन के नीचे उगा डाले सेब, फायदे चौंकाने वाले

Mon, 17 Apr 2017 02:43 PM IST
बीरबल नेगी/अमर उजाला, सांगला (किन्नौर)
बीरबल नेगी/अमर उजाला, सांगला (किन्नौर) Updated Mon, 17 Apr 2017 02:43 PM IST
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Himachali Farmer Grow Under Ground Apple.

सेब की पौध लगाकर पेड़ों से फल तो सभी लेते हैं, लेकिन हिमाचल के एक बागवान ने पहली बार जमीन के नीचे ही हर्बल सेब तैयार कर दिया है। जमीन में सेब का बीज डाला और नौ माह बाद आलू की तरह फल तैयार हो गया। जमीन से निकालकर धोने के बाद इसे खाया जा सकता है।

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भूमिगत सेब (ग्राउंड एप्पल) सामान्य फल की तरह नहीं, कंदमूल जैसा दिखता है। लेकिन इसका स्वाद लाजवाब है। यह क्रंची व पौष्टिकता से भरपूर है। अभी तक इस तरह की सेब प्रजाति अमेरिका आदि देशों में ही उगाई जाती है।
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जनजातीय जिला किन्नौर में कल्पा खंड के पूर्वणी के बागवान सत्यजीत नेगी ने छह बीघा जमीन पर पांच क्विंटल भूमिगत सेब उगाए हैं। कानून की डिग्री लेने के बावजूद सत्यजीत नेगी बागवानी पेशे से जुड़े हैं।
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मौसम की मार और महंगे कीटनाशकों के चलते उन्होंने अपने खेतों में सेब की एक ऐसी प्रजाति उगा दी जो जमीन के भीतर फल देती है। नेपाल के एक बागवान की मदद से उन्होंने अमेरिका से इस वैराइटी का बीज मंगवाया।

मार्च 2016 में उन्होंने सेब बीज डाला और नवंबर-दिसंबर में सेब फसल तैयार हो गई। उनका दावा है कि अगर सेब को जमीन से दो-चार महीने देरी से भी निकालते हैं तो ये खराब नहीं होता। हिमाचल खासकर किन्नौर-लाहौल, उत्तराखंड और नेपाल का मौसम इसके लिए अनुकूल है।

न मौसम की मार और न ही कीटनाशक की जरूरत, ये भी है फायदे

Himachali Farmer Grow Under Ground Apple.

मौसम की बेरुखी और ओलावृष्टि की मार इस वैराइटी के सेब पर नहीं पड़ती। कीटनाशकों की जरूरत भी नहीं होती। वह जमीन में गाय का गोबर और राख डालते हैं। नेगी 2004 से इस प्रजाति पर शोध और ट्रायल करते आ रहे हैं। इस वैराइटी के सेब को हर बार खेत में उगाना पड़ता है। आलू की तरह ही जमीन के ऊपर पत्तियां उगती हैं। अब सत्यजीत से प्रेरणा लेकर हिमाचल और उत्तराखंड के कई बागवान उनसे बीज ले चुके हैं।

एक किलो बीज से एक क्विंटल सेब
प्रगतिशील बागवान सत्यजीत नेगी का कहना है कि एक किलो सेब बीज से आप 50 से 100 किलो तक पैदावार ले सकते हैं। इसमें सामान्य सेब की तरह ज्यादा मेहनत और पैसा खर्च नहीं करना पड़ता। सेब 200 ग्राम से लेकर एक किलो तक होता है। इस सेब का जैम, जूस और चटनी भी बनाई जा रही है। उन्होंने इस फल के बीज पर और शोध के लिए नौणी विश्वविद्यालय सोलन, पालमपुर कृषि विवि और योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसंधान केंद्र को भी दिया है।

मोटापा और बीपी को कम करता है भूमिगत सेब
बागवान का दावा है कि भूमिगत सेब का चार माह तक सेवन करने से मोटापा कम हो जाता है। ये ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करता है। शराब का सेवन करने वाले लोगों के लीवर को बचाने में यह सेब मदद करता है। इससे हाजमा ठीक रहता है। कैंसर को भी मात देने में सहायक है। इस सेब पर अमेरिका में कई शोध हुए हैं। सेब की पत्तियों का इस्तेमाल चायपत्ती के रूप में कर सकते हैं।

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