हिमाचली सेब के दामों ने तोड़ा रिकॉर्ड, नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक डिमांड
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इन दिनों भारत के कई राज्य और पड़ोस के कुछ देश हिमाचल के सेब से महक रहे हैं। इनसे हिमाचली सेब की खूब मांग आ रही है। राज्य का रेड डिलिशियस सेब देश की तमाम प्रमुख मंडियों में अपनी दस्तक दे चुका है। पड़ोसी देशों नेपाल, भूटान और बांग्लादेश तक पहुंचने लगा है।
भारत की चंडीगढ़, नई दिल्ली, लखनऊ, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई, अहमदाबाद, सूरत, हैदराबाद आदि शहरों की तमाम मंडियों में देश और पड़ोसी देशों के व्यापारी हिमाचल के सेब को हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। नेपाल, बांग्लादेश से आए व्यापारी इन दिनों शिमला की भट्ठाकुफर, नारकंडा आदि मंडियों में सेब के मुंह मांगे दाम दे रहे हैं।
हिमाचल का सेब गुणवत्ता में बहुत आगे है। हिमाचल का बागवान प्रदेश के तमाम सेब उत्पादक क्षेत्रों में अमेरिका के अलावा इटली और फ्रांस से आई सेब की बेहतरीन किस्मों को सफलता से अपने बागीचों में उगा रहा है।
नेपाल के काठमांडू से आए व्यापारी अशोक कुमार बताते हैं कि हिमाचल का सेब गुणवत्ता में बहुत अच्छा है। इसकी काठमांडू में खूब मांग है। स्थानीय आढ़ती संजीव सुंटा ने बताया कि बांग्लादेश से भी व्यापारी सेब खरीदने पहुंच रहे हैं।
सेब के दामों ने तोड़ा पिछले सालों का रिकार्ड
हिमाचल में इस साल सेब की फसल कम होने के चलते सेब के दामों में इजाफा हुआ है। प्रदेश की ढली फल मंडी में इस वर्ष स्कारलेट स्पर की पेटी ने 3500 तक के दाम हासिल किये हैं। बीते सालों के मुकाबले फसल कम होने के चलते इस साल सेब के दामों में भारी उछाल आया है।
बाहरी राज्यों से हिमाचल में सेब खरीदने पहुंचे व्यापारी बागवानों की डलीशियस वैरायटी का सेब हाथों हाथ ऊंचे दामों में खरीद रहें हैं। इस साल पिछले वर्ष के मुताबिक एक करोड़ सेब की पेटियां कम हैं। कहीं ओलों और कही फलाउरिंग के समय बड़ते घटते तापमान के चलते प्रदेश के सेब बागवानों को इस वर्ष काफी नुकसान हुआ है। मौसम से सबसे ज्यादा नुकसान लो बेल्ट हुआ है।
स्पर ने मारों 500 रुपये तक का उछाल
पिछले साल के आंकड़ों के मुताबिक स्पर किस्म की 25 से 28 किलो की पेटी 3000 रुपये तक के ऊंचे दाम में बिकी। वहीं इस साल प्रदेश की सबसे बड़ी ढली फल मंडी में स्कारलेट स्पर की पेटी ने सीधे 500 रुपयों की उछाल मारकर 3500 रुपये तक के दाम हासिल किये।
वहीं रायल डलीशियस ने भी 2700 तक के ऊंचे दाम हासिल किये। इस वर्ष नाशपाती ने भी पिछले साल के दामों में से करीब 700 तक का उछाल मारा और 1800 तक के ऊंचे दाम हासिल किये। मौजूदा समय में भी प्रदेश की फल मंडियों में रायल वैरायटी के सेब की पेटी 1000 से लेकर 2000 तक के दामों में बिक रही हैं।
इस बार सेब की एक करोड़ पेटियां कम, अब तक तेरह लाख पहुंचीं
कोटखाई, रोहडू़, कुमारसैन, कोटगढ़, चौपाल, ठियोग की लो बेल्ट से सेब का सीजन अंतिम चरण पर पहुंच गया है। बागवानी विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक अभी तक करीब तेरह लाख से ज्यादा सेब की पेटियां प्रदेश से बाहरी राज्यों की फल मंडियों में पहुंच चुकी हैं।
इस बार सेब की एक करोड़ पेटियां कम
हिमाचल में इस बार सेब की एक करोड़ पेटियां कम हो सकती हैं। इस वर्ष सेब की 2.76 करोड़ पेटियों के उत्पादन का अनुमान है। पिछले वर्ष 3.77 लाख पेटियों की पैदावार हुई थी। राज्य बागवानी विभाग के मुताबिक पूर्वानुमान है कि इस बार फलों का कुल उत्पादन 7.17 लाख मीट्रिक टन होगा।
पिछले साल 7.55 लाख मीट्रिक टन फलों की पैदावार हुई थी। सेब की पैदावार 5.52 लाख मीट्रिक टन होने के आसार हैं। सेब की कुल 2.76 करोड़ पेटियां हो सकती हैं।
फल मंडियों में बागवानों से हो रही सरेआम लूट
प्रदेश की फल मंडियों में बागवानों से सरेआम लूट हो रही है। व्यापारी सेब में हल्का सा दाग दिखने पर पेटी के दाम घटा रहे हैं। फल मंडियों में बागवानों को सिर्फ हाई ग्रेड पैकिंग के अच्छे दाम मिल रहे हैं। व्यापारी और आढ़ती बागवानों से सेब की हाई ग्रेड पैकिंग की डिमांड कर रहे हैं।
मंडियों में अचानक से सेब की आमद बढ़ने से सेब के दामों में भारी गिरावट आ गई है। सेब की मिडल बेल्टों से सेब की आमद शुरू हो गई है। पहले ही विपरीत मौसम के कारण पिछले सालों के मुताबिक इस साल प्रदेश में सेब की फसल कम है। इसके साथ साथ करीब 70 प्रतिशत क्षेत्र में ओलों ने सेब को दागी कर दिया है।
इसके ऊपर जब बागवान फल मंडी में सेब बेचता है तो बागवान अपने आप ठगा सा महसूस कर रहा है। बाहरी राज्य से आए सेब के व्यापारी सेब में हल्का सा दाग दिखने पर पेटी को 300 से 500 रुपये तक की कम कीमत में खरीद रहे हैं।
वहीं मंडियों में आढ़ती बागवानों को हाई ग्रेड पैकिंग के ही पूरे दाम दिला पा रहे हैं। सेब व्यापारी पेटी में हल्का सा लूज ग्रेड होने पर भी 400 से 500 रुपये तक की कम कीमत में सेब की खरीद कर रहे हैं।
अपनी महक छोड़ने को तैयार बिलासपुर का सेब
कभी शिमला और किन्नौर के सेब को ही देश में जाना जाता था, लेकिन अब बिलासपुर का सेब भी देशभर में अपनी महक छोड़ने को तैयार हो गया है। बिलासपुर के सेब का देश के गई राज्यों में सफल परीक्षण हो चुका है। यहीं कारण है कि गर्म जलवायु में फल देने वाली प्रजाति एचआरएमएन-99 ने देश भर में अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है।
सेंटर फॉर सेलुलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) हैदराबाद में एचआरएमएन-99 प्रजाति के आठ हजार पौधे मंगवाए गए हैं। आगामी चार-पांच दिनों में इसके एक हजार पौधे जाएंगे, जबकि शेष पौधों को दिसंबर माह में भेजा जाएगा। सीसीएमबी आधुनिक जीव विज्ञान के क्षेत्रों में शोध करने वाला एक प्रमुख अनुसंधान केंद्र है।
इसके अलावा हाल ही में एनआईएस अहमदाबाद से वैज्ञानिक हजूर सिंह, बागवान हरिमन शर्मा द्वारा उगाए गए एचआरएमएन-99, अन्ना, डॉरसेट प्रजाति के सात-सात पत्ते डीएनए टेस्ट के लिए लेकर गए हैं। जिससे इन प्रजातियों की गुणवत्ता के बारे में जानकारी प्राप्त की जाएगी। अन्ना व डॉरसेट को हरिमन ने 2013 में फ्रांस से मंगवाया था, जिसके यहां काफी अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं।
बताते चलें कि पिछले वर्ष सीसीएमबी में एचआरएमएन-99 प्रजाति के तीन हजार पौधे गए थे। इस बार पौधों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। हाल ही में हरिमन ने चीफ इंनोवेशर ऑफिसर डॉ. हरदेव चौधरी के साथ इन फलों की जांच की। गौरतलब है कि बागवान हरिमन शर्मा की विकसित प्रजाति एचआरएमएन-99 को एक वर्ष तीन माह पहले राष्ट्रपति भवन नई दिल्ली, पीलीभीत, हल्द्वानी तथा मध्य प्रदेश में वितरित किया गया था। जिनमें से अधिकांश पौधों पर फल आने शुरू हो गए हैं।
इस वर्ष सीसीएमबी हैदराबाद में एचआरएमएन-99 प्रजाति के आठ हजार पौधे जाएंगे। एक हजार पौधे आगामी चार-पांच दिनों में भेजे जाएंगे, जबकि बाकी पौधे दिसंबर माह में जाएंगे। वैज्ञानिक हजूर सिंह ने भी एचआरएमएन-99, अन्ना, डॉरसेट प्रजाति के सात-सात पत्ते डीएनए टेस्ट के लिए हैं। -हरिमन शर्मा, प्रगतिशील बागवान बिलासपुर।
रोहडू क्षेत्र में कम पैदावार के बावजूद मिल रहे अच्छे दाम
सेब उत्पादन में पूरा साल बागवानों को अपनी जेब हल्की करना पड़ती है। एक किलो सेब तैयार करने में बागवान का औसतन पैदावार मिलने पर तीस से पैंतीस रुपये उत्पादन और विपणन में खर्च करना होता है। पैदावार कम रही तो उत्पादन खर्च में बढ़ोतरी पैदावार के अनुरूप रहती है।
इस साल कम पैदावार के कारण बागवानों को शुरू में अच्छे दाम मिले। देश की कई कंपनियों के सेब कारोबार में आने से बागवानों को सीधा लाभ मिला है। प्रगतिशील बागवान कठासू गांव निवासी बलवंत जस्टा का कहना है कि एक किलो सेब तैयार करने में बागवान का तीस के पैंतीस रुपये खर्च होता है।
सेब के अधिकतम दाम बागवान को 1800 मिल रहे तो औसत दाम बारह से 1300 प्रति पेटी ही बैठते हैं। नंदपुर के क्षेत्र के बडे़ एवं प्रगतिशील बागवान राजेंद्र छाजटा कहते हैं कि सेब उत्पादक क्षेत्र के हर गांव की भौगोलिक स्थिति अलग होने के कारण हर उत्पादन खर्च मौसम व सेब की पैदावार के उपर निर्भर है।
झाल्टा गांव निवासी बागवान महावीर जगटा का कहना है कि सड़क से सेब के बगीचे तीन चार किलोमीटर दूर हैं तो बागवानों को मजदूरी पर प्रति पेटी अस्सी से सौ रुपये यानी चार से पांच रुपये प्रति किलो सड़क तक पहुंचाने में ही खर्च होता है। उसके बाद स्प्रे, खाद तौलिए, कटिंग, पेटी, ट्रे, पैकिंग सामग्री, मजदूरी सभी खर्च अधिक है।