हिमाचल को ही उठाना होगा बिलासपुर रेललाइन के भू-अधिग्रहण का खर्च
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सामरिक दृष्टि से अहम प्रस्तावित मनाली-लेह रेललाइन के बेस भानुपल्ली-बिलासपुर ट्रैक के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च हिमाचल सरकार को ही उठाना होगा। केंद्र नेे इस रेललाइन के लिए भूमि अधिग्रहण का खर्च उठाने से साफ इंकार कर दिया है।
इसके साथ प्रदेश सरकार को 63 किलोमीटर इस लाइनके लिए जल्द भूमि अधिग्रहण करने को कहा है। शिमला में वीरवार को प्रदेश सरकार के साथ बैठक में रेलवे मंत्रालय के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण का पूरा खर्च करार के अनुसार हिमाचल सरकार ही उठाएगी।
बैठक में हिमाचल ने आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इतने बड़े बजट का प्रावधान न कर पाने की बात की। इससे पहले प्रदेश सरकार ने पीएमओ को भी इस रेल लाइन के भूमि अधिग्रहण का खर्च उठाने के लिए पत्र लिखा था।
हिमाचल सरकार जारी कर चुकी है 108 करोड़ रुपये
हालांकि भू-अधिग्रहण के लिए हिमाचल सरकार पहले ही 108 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है। प्रदेश सचिवालय में भानुपल्ली-बिलासपुर रेललाइन को लेकर वीरवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं योजना अनिल खाची की अध्यक्षता में बैठक हुई।
इसमें भारत सरकार के रेल मंत्रालय के चंडीगढ़ से आए मुख्य अभियंता राजीव सोनी और अन्य अधिकारी शामिल हुए। बैठक में प्रस्तावित रेल मार्ग से संबंधित विभिन्न मसलों पर चर्चा हुई। दरअसल, हिमाचल से होते हुए लेह से लगती चीन सीमा तक रेल ले जाने की बेस लाइन के निर्माण में अड़ंगा फंसा है।
भारत सरकार प्रस्तावित रेल मार्ग को भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन से जोड़ने की बात कर चुकी है, जो कि बेस लाइन होगी। पंजाब के भानुपल्ली से यह लाइन हिमाचल के भीतर बिलासपुर के बेरी तक आनी है।
अभी 23 किमी भू-अधिग्रहण की हुई कागजी प्रक्रिया
इसकी लंबाई 63 किलोमीटर है और इसके निर्माण के लिए जो भू-अधिग्रहण होना है, उसका सारा खर्च हिमाचल को ही उठाना है। कई साल पहले हुए समझौते में केंद्र ने भूमि-अधिग्रहण के लिए 50-55 करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा न देने की बात कही है।
इस प्रोजेक्ट की लागत का केंद्र 75 प्रतिशत पैसा देगा, जबकि हिमाचल को 25 फीसदी लागत उठानी है। ट्रैक निर्माण की वर्तमान में अनुमानित लागत 2967 करोड़ है। इसमें हिमाचल का कम से कम 1000 करोड़ खर्च आ रहा है, जो बढ़ भी सकता है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त एवं योजना अनिल खाची ने बताया कि हिमाचल सरकार पहले ही 108 करोड़ रुपये रिलीज कर चुकी है। बाकी पैसा एक साथ देना संभव नहीं है। 23 किलोमीटर के भू-अधिग्रहण की कागजी प्रक्रिया हो चुकी है। रेलवे अधिकारी इस रेल मार्ग के भू अधिग्रहण कार्य में तेजी लाने को कह रहे हैं।