शिक्षा के लिए 950 करोड़ का बजट मांगेगा हिमाचल, दिल्ली में होगी बैठक
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एकीकृत स्कूली शिक्षा योजना के तहत पहली से बारहवीं कक्षा तक के लिए हिमाचल सरकार केंद्र से 950 करोड़ का बजट मांगेगी। बुधवार को दिल्ली में समग्र वार्षिक योजना की बैठक होगी।
बैठक में शिक्षा सचिव अरुण कुमार शर्मा हिमाचल के हितों की पैरवी करेंगे। शिक्षा क्षेत्र में नई योजनाएं शुरू करने, खेल गतिविधियों को बढ़ाने, पुस्तकालयों को मजबूत करने, डिजिटलाइजेशन को ध्यान में रखते हुए हिमाचल सरकार ने प्रस्ताव तैयार किया है।
इसके लिए 950 करोड़ का बजट प्रस्ताव तैयार किया है। बैठक में वोकेशनल शिक्षा के तहत स्कूलों में नए कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। नवीं से जमा दो कक्षा वाले 500 सरकारी स्कूलों में वोकेशनल शिक्षा के तहत नए कोर्स शुरू करने की योजना है।
इन स्कूलों में विद्यार्थियों को टेलरिंग, ब्यूटिशियन, प्लंबरिंग और मल्टी स्किल का प्रशिक्षण दिया जाएगा। विद्यार्थियों को रोजगार आधारित शिक्षा देने के लिए वर्तमान में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में रिटेल, हेल्थ और कृषि सहित कई अन्य वोकेशनल कोर्स पढ़ाए जा रहे हैं। हजारों विद्यार्थियों ने इन कोर्सिज के तहत दाखिला लिया हुआ है।
सरकारी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षाएं शुरू करने का प्रस्ताव
इसी कड़ी में प्रदेश के करीब 500 अन्य स्कूलों को भी वोकेशनल शिक्षा के दायरे में लाया जा रहा है। सरकारी स्कूलों में नर्सरी और केजी कक्षाएं शुरू करने का प्रस्ताव भी बैठक में रखा जाएगा।
नर्सरी-केजी कक्षाओं को जेबीटी से पढ़ाने या नर्सरी टीचर ट्रेनिंग करने वाले शिक्षकों की भर्ती करने को लेकर हिमाचल सरकार केंद्र से चर्चा करेगी। साल 2017-18 के दौरान हिमाचल ने 834 करोड़ के बजट की केंद्र सरकार से मांग की थी।
केंद्र ने 408 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था। बुधवार को होने वाली बैठक में शिक्षा सचिव अरुण कुमार शर्मा के अलावा प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मनमोहन शर्मा, राज्य परियोजना निदेशक आशीष कोहली भी मौजूद रहेंगे।