जयराम के खिलाफ चुनाव लड़े चेतराम पर बंद होगी अब विजिलेंस जांच
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र सराज से कांग्रेस नेता चेतराम ठाकुर के खिलाफ अब विजिलेंस जांच बंद होगी। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले चेतराम के खिलाफ प्रारंभिक जांच में भ्रष्टाचार का केस नहीं बन पाया है।
लोकसभा चुनाव से पहले विजिलेंस ने दो बार मिल्कफेड के अध्यक्ष रहे चेतराम के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में जांच खोली थी, लेकिन आरोप साबित न होने पर जांच बंद की जा रही है। चेतराम वर्ष 2003 में कांग्रेस के टिकट पर सराज से तत्कालीन भाजपा प्रत्याशी रहे जयराम ठाकुर के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं।
विजिलेंस में मार्क इन्कवायरी में चेतराम पर गैरकानूनी तरीके से पद हथियाने, गाड़ी का दुरुपयोग करने और लोन लेने में अनियमितताएं बरतने जैसे आरोप हैं। इसकी प्रारंभिक जांच विजिलेंस की विशेष जांच इकाई (एसआईयू) के पास दी गई।
एसआईयू ने हाल ही में इन आरोपों से संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल की। चेतराम वीरभद्र सरकार में पहली बार 2003 से 2008 तक मिल्कफेड के चेयरमैन बने। दूसरी बार 2013 से 2017 तक अध्यक्ष रहे।
भाजपा की चार्जशीट में उन पर आरोप था कि वह दूसरी बार मिल्कफेड निदेशक मंडल के सदस्य गैरकानूनी तरीके से बने। दिसंबर 2016 में विपक्षी भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व में राज्यपाल को वीरभद्र सरकार के खिलाफ चार्जशीट सौंपी थी।
तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा भी उनके साथ थे। सत्ता में आने के बाद जयराम सरकार ने इसी चार्जशीट को जांच के लिए विजिलेंस को भेजा। विजिलेंस के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि आरोप साबित नहीं होने पर जल्द जांच बंद कर दी जाएगी। इससे पहले जांच रिपोर्ट सरकार को भेजकर इसकी अनुमति मांगी जाएगी।
ये थे चार्जशीट में आरोप
चार्जशीट में आरोप थे कि दुग्ध प्रसंघ और एक बैंक का डिफॉल्टर होने के बावजूद उन्हें प्रसंघ का चेयरमैन बनाया। इसके अलावा उन पर मिल्कफेड का अध्यक्ष रहते सरकारी गाड़ी का दुरुपयोग करने का भी आरोप रहा। इसमें भी गाड़ी का इस्तेमाल करने के लिए पोस्ट फैक्टो अनुमति लेने का तथ्य सामने आया है।
लोकसभा चुनाव में भी ज्यादा सक्रिय नहीं थे चेतराम
चेतराम लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस के पक्ष में प्रचार में अधिक सक्रिय नजर नहीं आए। चेतराम ठाकुर को पिछले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था। इससे भी वह नाखुश थे। सियासी जानकारों की मानें तो सीएम जयराम ठाकुर को अपने हलके में उनके अधिक सक्रिय नहीं होने का राजनीतिक लाभ मिलता रहा है।