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पढ़िए, विधानसभा में पहले ही दिन क्यों बरपा हंगामा?

Sat, 06 Dec 2014 09:16 AM IST
Updated Sat, 06 Dec 2014 09:16 AM IST
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himachal vidhansabha session at dharamshala.

अटकलों के अनुरूप विधानसभा के शीतकालीन सत्र की हंगामेदार शुरुआत हुई। तपोवन स्थित विधान भवन में सत्र के पहले ही दिन विपक्ष ने दो बार वाकआउट किया। अवैध वन कटान के मामलों पर विपक्षी दल भाजपा का वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी को हटाने के लिए नियम 67 के तहत कार्य स्थगन प्रस्ताव था। साथ ही नियम 130 के तहत चर्चा का प्रस्ताव भी पहले ही दिया गया था।

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दिवंगत भाजपा विधायक दिलेराम के शोकोद्गार के बाद जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ, तो नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल की अनुपस्थिति में भाजपा के चीफ व्हिप सुरेश भारद्वाज ने कार्य स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा मांगी।
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स्पीकर बीबीएल बुटेल ने ये कहते हुए इसे खारिज कर दिया कि रविंद्र रवि ने इसी विषय पर चर्चा मांगी है तो ये मसला डिस्कस हो। रविंद्र रवि ने भी स्थगन प्रस्ताव पर जोर दिया, लेकिन अध्यक्ष नहीं माने। फिर प्रश्न पूछने के लिए भाजपा विधायक रणधीर शर्मा का नाम पुकारा गया। रणधीर शर्मा ने खड़े होकर जैसे ही वन कटान के विषय को उठाया, स्पीकर ने उन्हें डांटकर बैठ जाने को कहा। इससे विपक्ष भड़क गया।
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आरोप लगाया कि यदि स्पीकर सरकार की शह पर सदन चलाना चाहते हैं तो हम कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। इसके बाद भाजपा विधायक नारे लगाते हुए वाकआउट कर गए। अध्यक्ष बुटेल ने इस वाकआउट को पहले औचित्यहीन बताया और बाद में सुरेश भारद्वाज के आग्रह पर अपने व्यवहार के लिए खेद भी जताया।

नहीं बख्शे जाएंगे जंगल काटने वाले : वीरभद्र

himachal vidhansabha session at dharamshala.

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने ऐलान किया है कि प्रदेश में वन कटान की घटना चाहे जहां की हो, इसके दोषी नहीं बख्शे जाएंगे। वह विधानसभा शीतकालीन सत्र के पहले दिन भाजपा विधायक रविंद्र रवि की ओर से लाई गई चर्चा का जवाब दे रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसी घटनाओं में यदि उनका खुद का बेटा भी संलिप्त होगा, तो वह उसे भी नहीं छोड़ेंगे। उन्हें 80 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वन माफिया का खात्मा करने के लिए ही प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री भेजा था। मेरा राजनीतिक जीवन तब से लेकर अब तक जंगलों को बचाने के लिए समर्पित है। इसलिए यदि मैंने ये घटनाएं नहीं रोकीं तो ये मेरी सबसे बड़ी नाकामी होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि तारादेवी में हुए वन कटान के मामले में सरकार ने कार्रवाई की है। कई अफसरों को सस्पेंड किया गया है। एफआईआर पर जांच चल रही है। दोषी जो भी हो, कोई नहीं बचेगा। शिमला के तारादेवी और जाखू, चंबा, बैजनाथ जैसे अन्य स्थानों पर हुए कटान की जानकारी जो विपक्ष ने सदन में रखी है, उस पर भी विभाग से रिपोर्ट तलब कर ली है। सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होगी।

सदन में चौतरफा घिरे भरमौरी

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शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन अवैध पेड़ कटान पर विपक्ष का निशाना बने वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी चौतरफा घिर गए। विपक्षी दल भाजपा के विधायकों की ओर से लाई गई चर्चा में कांग्रेस विधायक आशा कुमारी और हिलोपा अध्यक्ष महेश्वर सिंह के भी सुर में सुर मिलाने से वन मंत्री पर दबाव बढ़ गया।

हालांकि उन्होंने चर्चा का जवाब दिया और खुद पर लगे आरोपों को खारिज कर दिया। इससे पहले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी उन्हें क्लीन चिट दे चुके थे। भाजपा विधायक रविंद्र रवि ने नियम 130 के तहत प्रदेश में निजी भूमि और वनों में हो रहे अवैध कटान पर सदन में चर्चा के के लिए प्रस्ताव लाया। इस दौरान सरकार से सीबीआई जांच और वन मंत्री को बर्खास्त करने की मांग की गई।

रवि ने चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक आशा कुमारी का नाम लेते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर भी सरकार ने वन माफिया पर कार्रवाई नहीं की।

दिलेराम के शोक प्रस्ताव में राजनीति

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शीतकालीन सत्र के पहले दिन की शुरुआत शोकोद्गार से हुई लेकिन यह भी राजनीति से नहीं बच पाई। गुलाब सिंह ठाकुर, जयराम और विनोद कुमार सहित अन्य विधायकों ने दिलेराम के स्वर्गवास पर संवेदनाएं प्रकट कीं। उन्होंने कहा कि दिलेराम स्पष्टवादिता और सादगी के लिए जाने जाते थे।

उन्होंने 1971 तक जेबीटी अध्यापक और एनसीसी अधिकारी के पद पर सरकारी कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वह प्रथम बार 1977 में नाचन विस क्षेत्र से जनता पार्टी की टिकट पर विधानसभा के लिए चुने गए। वह अनुसूचित जाति एवं जनजाति निगम के अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए। कांग्रेस विधायक एवं मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने भी सदन में दिलेराम के निधन पर दुख जताया।

वह मंडी से भाजपा के छह बार जिला अध्यक्ष रहे। बावजूद इसके पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उनका टिकट काट दिया। स्वर्गीय दिलेराम को इस बात का भी दुख था। वहीं, भाजपा विधायक विनोद कुमार इस पर पलटवार करते हुए कहा कि ऐसी कोई बात नहीं थी। खुद दिलेराम ने ही उन्हें विधानसभा का टिकट दिलाया था और वह जीते भी।

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