Himachal VidhanSabha: पालमपुर, नौणी विवि में कुलपति की नियुक्ति का विधेयक पारित
संशोधित विधेयक में प्रबंधन बोर्ड का भी गठन करने का प्रावधान किया गया। कृषि मंत्री चंद्र कुमार की ओर से रखे इस संशोधित विधेयक का विपक्ष ने जमकर विरोध किया।
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कृषि विवि पालमपुर और बागवानी विवि नौणी में कुलपति की नियुक्ति सरकार की सलाह और सहायता से ही करने का विधेयक बुधवार को विधानसभा सदन में पारित हुआ। संशोधित विधेयक में प्रबंधन बोर्ड का भी गठन करने का प्रावधान किया गया। कृषि मंत्री चंद्र कुमार की ओर से रखे इस संशोधित विधेयक का विपक्ष ने जमकर विरोध किया। संशोधित विधेयक को राज्यपाल की शक्तियों का हनन बताया गया। विपक्ष के विरोध के बीच सत्ता पक्ष ने ध्वनि मत से इस विधेयक को पारित किया। अब यह विधेयक भी राज्यपाल की मंजूरी के लिए राजभवन भेजा जाएगा।
कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि इस विधेयक में राज्यपाल की शक्तियां कम करने की कोई बात नहीं है। विश्वविद्यालयों में जो शोध और पढ़ाई होती है, उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए संशोधन किया गया है। आज विश्वविद्यालयों में एक ही विचारधारा के लोगों को लगाया जा रहा है। यह देश हित में नहीं है। शिक्षक नियुक्त करने के लिए योग्यता को दरकिनार कर दिया गया है। सरकार की ओर से राजभवन को दो विधेयक भेजे गए थे। दो बार इन पर आपत्तियां लगाई गई। दोनों बार सरकार ने अपना पक्ष रखा। जब पता किया गया तो मालूम पड़ा कि विधेयक राष्ट्रपति को भेजे गए हैं।
मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि निर्वाचित सरकार को बाईपास किया जा रहा है। कुलपति की नियुक्ति में सरकार की सलाह आवश्यक होती है। कृषि और बागवानी विवि में नियुक्तियां सही तरीके से नहीं हो रही। राज्य सरकार ने नियुक्तियों के लिए स्क्रीनिंग कमेटी बनाने का फैसला लिया है। विधेयक पर चर्चा करते हुए भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि संशोधन से स्पष्ट है कि राज्यपाल की शक्तियों को छीना जा रहा है। विवि को सरकारी विभाग बनाने की मंशा दिख रही है। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि विश्वविद्यालय स्वायत संस्था है। सरकार का नजरिया गलत है। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि एनआईआरएफ की रैंकिंग में प्रदेश के विवि शामिल ही नहीं हैं। वित्त कमेटी की बैठक के लिए वित्त सचिव को अध्यक्ष बनाया गया है। विश्वविद्यालय स्वायत ही रहेंगे।
कैबिनेट की सलाह पर ही काम करते हैं राज्यपाल : नेगी
बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि फेडरल सिस्टम में राष्ट्रपति और राज्यपाल कैबिनेट के मुताबिक ही काम करते हैं। कई राज्यों में कुलाधिपति की शक्तियां राज्य सरकारों के पास है। प्रदेश सरकार की ओर से लाया गया विधेयक जनहित में है। बागवानी विवि का स्तर जिस प्रकार से गिरा है, उस कारण ही विधेयक लाना पड़ रहा है। मैं राज्यपाल के खिलाफ नहीं हूं लेकिन कैबिनेट की सलाह और सिफारिश को उन्हें मानना पड़ेगा।