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Shimla News: हिमाचल विश्वविद्यालय को केंद्र से 79.70 लाख रुपये मंजूर
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अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को मिलेगा स्वरोजगार आधारित प्रशिक्षण, विवि ने 1.13 करोड़
का भेजा था प्रस्ताव
तीन रोजगार आधारित कोर्सों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की पीएम विकास योजना के तहत 79.70 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। विश्वविद्यालय की प्रस्तावित कुल राशि में करीब 33 लाख की कटौती की गई है।
विश्वविद्यालय ने 1.13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था जिसमें प्रशिक्षण के साथ आकलन और प्लेसमेंट के बाद सहायता जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। मंत्रालय ने फिलहाल इन दोनों मदों को हटाते हुए सीमित स्वीकृति दी है। इस मंजूरी के साथ विश्वविद्यालय परिसर में 300 अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण तीन विशिष्ट जॉब रोल सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट, सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नीशियन और सर्टिफिकेट इन अकाउंटिंग टेक्नीशियन में दिया जाएगा जिन्हें राष्ट्रीय योग्यता रजिस्टर के अनुरूप चुना गया है। यह क्षेत्र वर्तमान में रोजगार की दृष्टि से तेजी से उभरते सेक्टर माने जा रहे हैं। अब अगला चरण परियोजना के क्रियान्वयन और शेष राशि की संभावित स्वीकृति से जुड़ा है।
हालांकि आकलन और पोस्ट-प्लेसमेंट समर्थन जैसे घटकों की अनुपस्थिति से योजना के प्रभाव पर असर पड़ सकता है क्योंकि यह दोनों पहलू प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शेष राशि की स्वीकृति और इन सुविधाओं की बहाली पर निगाहें टिकी रहेंगी। प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए कुलपति प्रो. महावीर सिंह के नेतृत्व में केंद्र स्तर पर कई दौर की प्रस्तुतियां और चर्चा हुईं। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी रसायन विभाग के डॉ. रमेश ठाकुर को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी है, जबकि डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. राजिया सुल्तान और डॉ. मनीष कुमार समन्वयक के रूप में जुड़े हैं।
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का भेजा था प्रस्ताव
तीन रोजगार आधारित कोर्सों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की पीएम विकास योजना के तहत 79.70 लाख रुपये की मंजूरी मिली है। विश्वविद्यालय की प्रस्तावित कुल राशि में करीब 33 लाख की कटौती की गई है।
विश्वविद्यालय ने 1.13 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा था जिसमें प्रशिक्षण के साथ आकलन और प्लेसमेंट के बाद सहायता जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं। मंत्रालय ने फिलहाल इन दोनों मदों को हटाते हुए सीमित स्वीकृति दी है। इस मंजूरी के साथ विश्वविद्यालय परिसर में 300 अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण तीन विशिष्ट जॉब रोल सोलर फोटोवोल्टिक साइट सर्वे असिस्टेंट, सोलर पीवी मॉड्यूल मैन्यूफैक्चरिंग टेक्नीशियन और सर्टिफिकेट इन अकाउंटिंग टेक्नीशियन में दिया जाएगा जिन्हें राष्ट्रीय योग्यता रजिस्टर के अनुरूप चुना गया है। यह क्षेत्र वर्तमान में रोजगार की दृष्टि से तेजी से उभरते सेक्टर माने जा रहे हैं। अब अगला चरण परियोजना के क्रियान्वयन और शेष राशि की संभावित स्वीकृति से जुड़ा है।
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हालांकि आकलन और पोस्ट-प्लेसमेंट समर्थन जैसे घटकों की अनुपस्थिति से योजना के प्रभाव पर असर पड़ सकता है क्योंकि यह दोनों पहलू प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में शेष राशि की स्वीकृति और इन सुविधाओं की बहाली पर निगाहें टिकी रहेंगी। प्रस्ताव को मंजूरी दिलाने के लिए कुलपति प्रो. महावीर सिंह के नेतृत्व में केंद्र स्तर पर कई दौर की प्रस्तुतियां और चर्चा हुईं। परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी रसायन विभाग के डॉ. रमेश ठाकुर को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी है, जबकि डॉ. सुरेश कुमार, डॉ. राजिया सुल्तान और डॉ. मनीष कुमार समन्वयक के रूप में जुड़े हैं।
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