पीटीए मामले में ट्रिब्यूनल ने प्रदेश सरकार से मांगा स्पष्टीकरण
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हिमाचल के सरकारी स्कूलों में अनुबंध पर नियुक्त पीटीए शिक्षकों को नियमित करने के मामले पर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। ट्रिब्यूनल ने पूछा है कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को लेकर स्टेटस को हटा दिया है तो शिक्षकों को नियमित क्यों नहीं किया जा रहा है।
अनुबंध पीटीए शिक्षक संघ की याचिका पर प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में हुई सुनवाई के दौरान सरकार से इसको लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया। अब 20 जुलाई को मामले पर सुनवाई होगी। प्रदेश में 5107 पीटीए शिक्षक अनुबंध आधार पर नियुक्त हैं। 1400 पीटीए शिक्षक अभी अनुबंध पर भी नहीं आ पाए हैं।
हालांकि, इन शिक्षकों को सरकार अनुबंध शिक्षकों के बराबर वेतन और अन्य सुविधाएं दे रही है। प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में दी गई याचिका में अनुबंध पीटीए शिक्षक संघ ने तर्क दिया है कि अस्थाई शिक्षकों को लेकर मुख्य याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से अपना केस वापस ले लिया है।
याचिकाकर्ता पंकज कुमार ने साल 2013 में इस मामले को सबसे पहले हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में चहेतों को नौकरी दी गई, जबकि पात्र शिक्षक बाहर कर दिए गए। हाईकोर्ट ने 2014 में अस्थाई शिक्षकों के हक में फैसला सुनाया था। सरकार ने इसके बाद इनके लिए पॉलिसी तैयार कर दी थी।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद ही हजारों पीटीए शिक्षकों को अनुबंध पर लाया गया। इसी दौरान हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीमकोर्ट में चुनौती दी गई। साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेशों पर रोक लगाते हुए स्टेटस को रखने के आदेश जारी किए।
इसके बाद से यह मामला सुप्रीमकोर्ट में विचाराधीन है। अब पंकज कुमार ने सुप्रीम कोर्ट से याचिका वापस ली है। इसी को आधार बनाकर पीटीए अनुबंध शिक्षक संघ ने ट्रिब्यूनल में चुनौती देकर शिक्षकों को नियमित करने की गुहार लगाई है।