फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal tribunal judgement in pension case

पेंशन कम करने के मामले में ट्रिब्यूनल ने दिए स्थगन आदेश

Fri, 28 Sep 2018 12:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Fri, 28 Sep 2018 12:34 PM IST
विज्ञापन
Himachal tribunal judgement in pension case

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के पेंशन कम करने के मामले में प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने स्थगन आदेश पारित किए हैं। प्रशासनिक प्राधिकरण अध्यक्ष न्यायाधीश वीके शर्मा ने मिल्क फेडरेशन से सेवानिवृत्त कुछ कर्मचारियों की याचिकाओं की सुनवाई के दौरान ये अंतरिम आदेश दिए।

विज्ञापन


पेंशन कम करने के पीछे कारण दिया गया है कि एंप्लाइज प्रोविडेंट फंड पेंशन स्कीम में किए गए संशोधन के मुताबिक प्रार्थी ने न लिखित में विकल्प दिया और न 1.16 के अंशदान को कर्मचारी पेंशन योजना के पैरा 11(4) के तहत निर्धारित समय में कर्मचारी भविष्य निधि के समक्ष जमा किया।
विज्ञापन


यह अंशदान 1 सितंबर, 2015 से पहले संगठन के पास जमा किया जाना था। संगठन के अनुसार अब तक पेंशनभोगियों के पूर्ण वेतन पर वितरित पेंशन अनधिकृत है। अधिनियम के तहत कर्मचारी पेंशन योजना 1995 के पैरा 11(4) में निहित वैधानिक प्रावधानों के विपरीत है। प्रदेश प्रशासनिक प्राधिकरण ने प्रथम दृष्ट्या पेंशन में की गई कमी को कानून के प्रावधानों के विपरीत पाते हुए स्थगन आदेश दिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


इससे पहले पेंशन से जुड़े मामले में अक्तूबर 2016 में हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय को रद्द कर उच्चतम न्यायालय ने एकल पीठ के फैसले पर मुहर लगा दी थी। 1995 से भविष्य निधि संगठन ने अंश धारकों के लिए पेंशन स्कीम शुरू की। प्रावधान था कि नियोक्ता के अंशदान में से कर्मचारी के मूल वेतन व महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी या 5000 रुपये में से अधिकतम का 8.33 फीसदी हिस्सा ही इस फंड में जमा करवा सकता था।

इसे बाद में 6500 रुपये व 15000 किया गया। इस पेंशन योजना में वर्ष 1996 में भविष्य निधि संगठन ने संशोधन किया। इसके तहत कर्मचारी और नियोक्ता अगर चाहें तो नियोक्ता के हिस्से में से पेंशन स्कीम में कर्मचारी के मूल वेतन व महंगाई भत्ते की कुल राशि का 8.33 फीसदी हिस्सा बिना किसी अधिकतम सीमा के जमा करवा सकते थे।


इसी अनुरूप इन्हें बढ़ी हुई पेंशन मिलनी थी। इस संशोधन का पता कर्मचारियों को उस समय नहीं चला। जब पता चला तो मामले को अपने नियोक्ता निगम के माध्यम से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से उठाया, मगर इस मांग को अस्वीकार कर दिया गया। निगम कर्मचारियों ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने फैसला निगम कर्मचारियों के हक में दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed