आयोजन हिमाचल शिक्षक महासंघ का, तैयारियों में जुटा महकमा
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शिमला में आयोजन हिमाचल शिक्षक महासंघ का है और तैयारियों में शिक्षा विभाग जुटा है। प्रदेश शिक्षक महासंघ द्वारा प्राथमिक शिक्षा की दशा और दिशा विषय पर आयोजित किए जा रहे सेमिनार को सफल बनाने की तैयारियां प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय कर रहा है।
29 और 30 मार्च को लालपानी स्कूल में होने वाले इस दो दिवसीय सेमिनार में शिक्षकों को भाग लेने के लिए निदेशालय द्वारा अपील की गई है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज के निजी सचिव के पत्र पर निदेशालय ने अपील जारी करते हुए जिला उपनिदेशकों के माध्यम से सेमिनार में भाग लेने वाले इच्छुक
शिक्षकों की लिस्ट आयोजन स्थल पर देने को कहा है। प्रदेश में शिक्षकों के दर्जनों संगठन है। इन संगठनों द्वारा समय-समय पर शिक्षा और शिक्षकों के हित में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं
लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि शिक्षा निदेशालय के माध्यम से किसी संगठन के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए शिक्षकों से अपील की जा रही है। जिला उपनिदेशकों को निदेशालय से जारी हुए इस पत्र पर दूसरे संगठन भड़क गए हैं।
एजेंट के तौर पर सरकार का काम करना गलत : वीरेंद्र
राजकीय अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान का कहना है कि किसी एक संगठन को इस तरह तरजीह देना तर्क संगत नहीं है। प्रदेश में यह गलत परंपरा शुरू की जा रही है। इस परिपाटी से सरकार अपनी राह में कांटे बिछा रही है।
प्रदेश में शिक्षकों के 36 अन्य संगठन भी हैं। इन सभी संगठनों के लिए इस प्रकार की व्यवस्था करना सरकार के लिए आसान नहीं होगा। एक विशेष संगठन के लिए बरती जा रही नरमी सीधे तौर पर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग है। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम जरूरी है।
हम स्वयं इस तरह के आयोजन कर चुके हैं लेकिन सरकारी मशीनरी के दम पर ऐसा करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि एक संगठन के एजेंट के तौर पर सरकार का काम करना गलत है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समक्ष भी इस मामले को उठाया जाएगा।
शिक्षा में सुधार को तोड़नी पड़ेगी पुरानी परंपराएं : रजनीश
हिमाचल शिक्षक महासंघ के अध्यक्ष रजनीश चौधरी का कहना है कि शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे नए प्रयोग का विरोध करने वाले संगठनों ने शिक्षा के हित में खुद कुछ काम नहीं किया है।
लालपानी में आयोजित होने वाले दो दिवसीय सेमिनार के माध्यम से सरकार को सुझाव दिए जाएंगे। हमने सभी शिक्षकों को आमंत्रित किया है। अन्य संगठन पदाधिकारियों को विरोध करने की जगह सेमिनार में भाग लेकर सुझाव देने चाहिए।
शिक्षा महासंघ ने शिक्षा विभाग से जुड़े कई वर्तमान और पूर्व अफसरों सहित केंद्रीय विश्वविद्यालय से भी विशेषज्ञ बुलाए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार करने के लिए पुरानी परंपराओं को तो तोड़ना ही पड़ेगा। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के उद्देश्य से ही निदेशालय ने जिलों को यह पत्र जारी किया है। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को भी संघ ने सेमिनार में बुलाया है।