Himachal: श्रमिकों को शीतकालीन सुविधाएं नहीं देने पर बीआरओ महानिदेशक को हाईकोर्ट ने किया तलब
पैसों को रिलीज न करने पर सूर्या कंपनी ने हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान सूर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी के गैर-सहयोगात्मक रवैये को देखते हुए उसके सभी भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। पढ़ें पूरी खबर...
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मंडी में एनएच-003 के निर्माण कार्यों को करने वाली सूर्या कंपनी ने गावर कंपनी की ओर से पैसों को रिलीज न करने पर हाईकोर्ट में आवेदन दायर किया है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि जनहित याचिका में कंपनी की ओर से पेश न होने की वजह से अदालत ने गावर कंपनी को निर्देश दिए हैं कि वह कंपनी को पेमेंट रिलीज न करे। उन्होंने अदालत से गुहार लगाई कि अगर कंपनी पैसों को जारी नहीं करती है तो इससे बहुत बड़ी समस्याएं हो जाएगी। कार्य को सुचारू रूप से चलने के लिए पैसों को जारी करना बहुत जरूरी है। कंपनी की ओर से सारा काम कर दिया गया है। काम करने वाले लोगों की पेमेंट रुक गई है। खंडपीठ की ओर से जो निर्णय लिया गया है उसे वापस लिया जाए।
इस राष्ट्रीय हाईवे को चौड़ा करने का कार्य गावर कंपनी को दिया गया है। गावर कंपनी ने इस कार्यों को पूरा करने के लिए सूर्य कंपनी को ठेका दिया है। केंद्र सहित राज्य सरकार और गावर कंपनी की ओर से कहा गया कि उन्हें सूर्या कंपनी को पैसे जारी करने को लेकर कोई समस्या नहीं है। वहीं याचिकाकर्ता ने आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की। यह मामला वकेशन जज राकेश कैंथला की अदालत में सुनवाई के लिए सूचिबद्ध किया गया था।
हिमाचल हाईकोर्ट ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दीपक प्रोजेक्ट के तहत काम करने वाले दिहाड़ीदार श्रमिकों को शीतकालीन सुविधाएं उपलब्ध न कराने पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायाधीश राकेश कैंथला ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि 23 फरवरी तक आवश्यक सुविधाएं प्रदान नहीं की गईं, तो बीआरओ के शीर्ष अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि 22 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर दिया गया था कि सर्दियों का मौसम शुरू होने से पहले सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, लेकिन अभी तक इस आदेश की अनुपालना नहीं की गई है। न ही सामान की आपूर्ति हुई है। अदालत ने आदेश दिया है कि अगर अगली समय सीमा तक यह काम पूरा नहीं होता है, तो प्रतिवादी महानिदेशक सीमा सड़क और दीपक प्रोजेक्ट के मुख्य अभियंता को स्पष्टीकरण देने के लिए स्वयं कोर्ट में हाजिर रहना होगा। मामला मुख्य रूप से कठिन परिस्थितियों और कड़कड़ाती ठंड में काम करने वाले बीआरओ कर्मियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं और सर्दियों के सामान से जुड़ा है।
अदालत ने कहा था कि देश के सबसे कठिन और दुर्गम इलाकों में काम करने वाले इन मजदूरों को सर्दियों के कपड़े और उपकरण मुहैया कराना लग्जरी (विलासिता) नहीं, बल्कि उनकी बुनियादी जरूरत है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्रत्येक मजदूर को कड़ाके की ठंड से बचने के विंटर जैकेट, ऊनी टोपी और दस्ताने, गम बूट, विंटर ट्राउजर (पेंट), रेन कोट, मिट्टी का तेल उपलब्ध कराएं। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी।