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Himachal News: सरकारी कर्मचारियों से ऋण वसूली में सख्ती, ढिलाई पर अफसर नपेंगे; वित्त विभाग ने मांगा ब्योरा
Thu, 22 Jan 2026 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 22 Jan 2026 05:00 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में वित्त विभाग ने सभी विभागों से बीते दस वर्षों के दौरान दिए गए ऋणों और अग्रिमों का पूरा लेखा-जोखा तलब कर लिया है। ऐसे में रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितनी राशि अब तक वसूल की जा चुकी है, कितनी बकाया है और किन मामलों में वसूली लंबित है। पढ़ें पूरी खबर...
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वित्त विभाग हिमाचल प्रदेश।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
सरकारी कर्मचारियों को दिए गए अग्रिमों और ऋणों की वसूली में वर्षों से चली आ रही ढिलाई अब महंगी पड़ेगी। वित्त विभाग ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सभी विभागों से बीते दस वर्षों (2015-16 से 2024-25) के दौरान दिए गए ऋणों और अग्रिमों का पूरा लेखा-जोखा तलब कर लिया है। विभाग का कहना है कि यदि वसूली में लापरवाही सामने आई तो न केवल डिफाल्टर कर्मचारियों बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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वित्त विभाग ने सभी महकमों को निर्देश दिए हैं कि हाउस बिल्डिंग एडवांस, वाहन ऋण और शिक्षा ऋण सहित अन्य अग्रिमों की वसूली स्थिति पर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट भेजी जाए। रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट करना होगा कि कितनी राशि अब तक वसूल की जा चुकी है, कितनी बकाया है और किन मामलों में वसूली लंबित है। वित्त विभाग ने उन कर्मचारियों की सूची भी तलब की है, जो ऋण की नियमित किस्तें नहीं चुका रहे और डिफाल्टर की श्रेणी में आ चुके हैं। यह भी बताने को कहा गया है कि ऐसे मामलों में विभागों ने अब तक क्या अनुशासनात्मक या प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिन विभागों ने कार्रवाई नहीं की, उनसे कारण पूछा जाएगा। प्रधान सचिव वित्त की ओर से जारी पत्र में कहा है कि ऋण वसूली केवल कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है। जिन अधिकारियों और आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (डीडीओ) की निगरानी में वसूली होनी थी, यदि उनकी लापरवाही से सरकारी धन अटका है तो उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। जरूरत पड़ने पर वित्तीय नियमों के तहत सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
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वसूली से सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी की उम्मीद
राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन मजबूत करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में यह कदम उठा रही है। लंबे समय से बकाया पड़े ऋणों की वसूली से सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। इसी वजह से पूरे दस साल की अवधि का डाटा एकत्र कर समग्र समीक्षा की जा रही है। वित्त विभाग के इस कदम से सरकारी महकमों में हलचल तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन मजबूत करने और राजस्व बढ़ाने की दिशा में यह कदम उठा रही है। लंबे समय से बकाया पड़े ऋणों की वसूली से सरकार को करोड़ों रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। इसी वजह से पूरे दस साल की अवधि का डाटा एकत्र कर समग्र समीक्षा की जा रही है। वित्त विभाग के इस कदम से सरकारी महकमों में हलचल तेज हो गई है। विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और रिपोर्ट तैयार की जा रही है।