सुप्रीम कोर्ट के जज बोले, आज भी न्याय से वंचित हैं दो तिहाई लोग
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने कहा है कि भारतीय संविधान में प्रत्येक नागरिक को किसी भी धर्म को अपनाने की पूर्ण स्वतंत्रता है। भारतीय संविधान की विशेषता है कि इसमें हर धर्म व हर संप्रदाय को अपने प्रचार व प्रसार की छूट दी गई है। राज्य का किसी भी धर्म से संबंध नहीं जोड़ा गया है।
धर्म के आधार पर उनके मौलिक अधिकारों का हनन न हो, इसकी जिम्मेदारी राज्य सरकार की है और भारतीय संविधान उनके अधिकारों के संरक्षण की गारंटी देता है। हिमाचल हाईकोर्ट में आयोजित भारतीय संविधान के विभिन्न पहलू सीरीज के व्याख्यान में न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की।
उन्होंने कहा कि समाज के हर तबके तक न्याय पहुंचना चाहिए। राज्य विधि सेवा प्राधिकरण न्याय को पहुंचाने के लिए अपनी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है, लेकिन अभी भी दो तिहाई समाज का तबका न्याय से महरूम है। उन तक न्याय व्यवस्था नहीं पहुंच नहीं पा रही है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के तबके को न्याय पहुंचाने की जिम्मेवारी हम सबकी है। मीडिया की भागीदारी पर कहा कि समाज में इनका अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने कहा कि मीडिया का यह दायित्व है कि वह लोगों को कानून के बारे में जानकारी दें। उन्होंने कहा कि मीडिया को अपनी रिपोर्टिंग में इस बात का ध्यान रखना होगा कि केवल हकीकत जनता के सामने आये।
कुरियन जोसेफ से लोगों को खासा प्यार: करोल
इस अवसर पर हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल ने जस्टिस कुरियन की ओर से हिमाचल हाईकोर्ट में दी गई सेवाओं के उन दिनों को याद करते हुए कहा कि वह समय वास्तव में राम राज्य की तरह महसूस किया गया।
उन्होंने कहा कि जस्टिस कुरियन ने अपने कार्यकाल में हिमाचल के लोगों को न्याय दिलाने के लिए किसी भी तरह की कसर नहीं छोड़ी। यही कारण है कि हिमाचल के लोगों के बीच आज भी उनके लिए खासा प्यार कायम है।
यह गणमान्य रहे मौजूद
कार्यक्रम में उत्तराखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा, हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीशों में धर्म चंद चौधरी, तरलोक सिंह चौहान, विवेक सिंह ठाकुर, अजय मोहन गोयल, संदीप शर्मा और चंद्रभूषण बारोवलिया भी उपस्थित रहे। हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीशों में आरके महाजन, देवदर्शन सूद, एसएस ठाकुर और कुलदीप सिंह कंवर, हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष वीके शर्मा,
राज्य उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष पीएस राणा, शिमला नगर निगम की मेयर कुसुम सदरेट, मुख्य सचिव वीसी फारका, राज्य प्रशासनिक प्राधिकरण के न्यायिक सदस्य डीके शर्मा, रजिस्ट्रार राजीव भारद्वाज, रजिस्ट्रार अरविंद मल्होत्रा, जेके शर्मा, पुरेंद्र वैद्य,
प्रेमपाल, परविंदर सिंह अरोड़ा, प्यार चंद, सदस्य सचिव हिमाचल प्रदेश विधि न्यायिक सेवा प्राधिकरण यशवंत सिंह चोगल, गौरव महाजन और अविनाश चंद्र सहित कानून की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी, विभिन्न स्कूलों की छात्राएं, हाईकोर्ट के अधिकारी कर्मचारी और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।