हिमाचल की फिजाओं में घुल रहा नशे का जहर, हुक्का से नशा कर रहीं युवतियां
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देवभूमि हिमाचल की फिजाओं में नशे का जहर घुलने लगा है। नौजवानों के साथ-साथ स्कूली छात्र-छात्राएं भी नशे की आदी होते जा रहे हैं। हिमाचल में देश के नामी शहरों में होने वाली रेव और क्लब पार्टियों का प्रचलन भी बढ़ गया है। स्मार्ट सिटी धर्मशाला के मैकलोडगंज में युवक-युवतियों में स्टैंडर्ड हुक्का पीने का प्रचलन बढ़ गया है।
स्थानीय युवक-युवतियों के साथ विदेशी महिलाएं भी स्टैंडर्ड हुक्का पीने की आदी हो गई हैं। तनाव कम करने के चक्कर में युवा पीढ़ी नशे की चपेट में आ रही है। फोरेंसिक लैब के सूत्रों के मुताबिक हुक्का पीने के लिए खर्चा पूरा न होने पर युवतियां देह व्यापार के धंधे में भी आ रही हैं। प्रदेश भर में क्लब पार्टियों में भी ऐसे नशीले पदार्थ परोसे जा रहे हैं।
नशे की आदी हो चुकी युवतियों के साथ कथित दुराचार के मामले भी सामने आ रहे हैं। नाहन और शिमला से दो लड़कियों को क्लब पार्टियों में नशा देकर दुराचार करने का मामला सामने आ चुका है। इसके अलावा प्रदेश भर से क्लब पार्टियों में यौन शोषण के एक दर्जन मामले जांच को पहुंचे हैं।
दो माह में हो चुकी है दो छात्रों की मौत
फोरेंसिक लैब शिमला के वैज्ञानिक अधिकारी डा. राजेश जंवाल के अनुसार छात्र पेंट, थिनर, गैसोलिन, नेल पॉलिश रिमूवर, क्यूकफिक्स, व्हाइट फ्ल्यूड, बूट पॉलिश, फेविकोल, आयोडेक्स को सूंघकर नशा कर रहे हैं। जब शरीर में निकोटीन की मात्रा बढ़ रही है
तो बीड़ी, सिगरेट, स्टैंडर्ड हुक्का, खैनी, गुटका, भांग, चरस, गांजा, बीयर और शराब का सेवन रहे हैं। बाद में घातक मादक पदार्थों जैसे अफीम, हेरोइन, कोकीन, एलएसडी, नींद की गोलियां आदि का सेवन करते हैं। क्रियात्मक और मनोवैज्ञानिक निर्भरता उत्पन्न होने से इनके गुलाम बन जाते हैं। दो माह में नशे के आदी दो छात्रों की मौत हो चुकी है।
दिल और गुर्दे पर पड़ता है घातक प्रभाव: पाल
फोरेंसिक लैब धर्मशाला के सहायक निदेशक एवं प्रवक्ता डा. सुरेंद्र कुमार पाल ने बताया कि नशा शरीर के आंतरिक अंगों जैसे जिगर, गुर्दे, दिल, फेफड़े, दिमाग पर घातक प्रभाव पड़ता है। इससे मानसिक, सांस के रोग, पुरुषों में नपुंसकता का बढ़ना, याददाश्त में
कमजोरी, खून की कमी, बांझपन, मुंह और गले का कैंसर, पाचन तंत्र पर कुप्रभाव, जिगर की खराबी से मौत, उच्च रक्तचाप, दिल का दौरा आदि बीमारियां युवावस्था में ही मौत के मुंह में धकेल रही हैं। नशा के सेवन से रसायन जैसे एसीटोन, टालूइन, जाइलिन इत्यादि दिमाग पर अत्यधिक विनाशक प्रभाव डालते हैं। पेंट सूंघने से शिमला के दो छात्रों की मौत भी हो चुकी है।