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अब निजी संस्थान नहीं कर सकेंगे मनमानी फीस वसूली, कसेगा शिकंजा

Wed, 21 Feb 2018 10:26 AM IST
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला
अनिमेष कौशल, अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 21 Feb 2018 10:26 AM IST
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Himachal Private schools under educational institutions regulatory commission

अभिभावकों से फीस, किताबों और ड्रेस के नाम पर हर साल मनमानी वसूली करने वाले निजी स्कूलों पर शिकंजा कसने जा रहा है। अब ये संस्थान मनमानी फीस वसूल नहीं कर पाएंगे। हिमाचल सरकार ने प्रदेश में स्थित प्राइवेट स्कूलों को निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग के दायरे में लाने की तैयारी की है।

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अभिभावकों को बड़ी राहत देते हुए शिक्षा विभाग ने हिमाचल प्रदेश निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग संशोधित बिल 2018 का ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज को सौंप दिया है।
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संशोधित बिल के विधानसभा से पास होने पर निजी स्कूलों पर आयोग की कड़ी नजर रहेगी। कोचिंग और ट्यूशन सेंटर सहित क्रेच, प्ले और नर्सरी स्कूल आयोग के दायरे में शामिल किए गए हैं। बिल पास होने के बाद इन स्कूलों के लिए आयोग नियम-कानून भी अलग से बनाएगा।

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एक्ट 2012 में किया संशोधन

Himachal Private schools under educational institutions regulatory commission

निजी स्कूलों को आयोग के दायरे में लाने के लिए शिक्षा विभाग ने निजी शिक्षण संस्थान नियामक आयोग एक्ट 2012 में संशोधन किया है। अब निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ प्री प्राइमरी, एलीमेंटरी (प्राइमरी और मिडिल), सेकेंडरी (हाई और सेकेंडरी) स्कूल और कोचिंग व ट्यूशन सेंटरों को भी आयोग के दायरे में लाया जाएगा।

प्री प्राइमरी के तहत क्रेच, प्ले स्कूल, नर्सरी और किंडर गार्डन स्तर के स्कूल आएंगे। प्राइमरी एजूकेशन के तहत पहली से पांचवीं कक्षा, अपर प्राइमरी और मिडिल एजूकेशन में छठी से आठवीं कक्षा, मैट्रिकुलेशन एजूकेशन में नवीं-दसवीं और सीनियर सेकेंडरी एजूकेशन में जमा एक और जमा दो कक्षा हैं। 

निजी स्कूल अपनी मनमर्जी से अभिभावकों से फीस, वर्दी और किताबों के नाम पर वसूली नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा स्कूलों की मान्यता, आधारभूत ढांचे, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता पर भी आयोग की निगरानी रहेगी। उधर, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज का कहना है कि जल्द ही निजी स्कूलों को आयोग के दायरे में लाया जाएगा।

भाजपा के दृष्टि पत्र की घोषणा होगी पूरी

Himachal Private schools under educational institutions regulatory commission

भाजपा द्वारा विधानसभा चुनावों के दौरान जारी किए दृष्टि पत्र में की गई घोषणा भी अब पूरी होते दिख रही है। भाजपा ने दृष्टि पत्र में घोषणा की थी कि निजी शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता लाने के लिए रेगुलेटरी कमीशन का अधिकार और अधिकार क्षेत्र बढ़ाया जाएगा, ताकि निजी स्कूलों की शुल्क संरचना की समीक्षा की जाए और अनुचित शुल्क वृद्धि पर रोक लगाई जा सके।

हाईकोर्ट भी कर चुका है सख्त टिप्पणियां
निजी स्कूलों की मॉनीटरिंग करने के लिए प्रदेश में क्या व्यवस्था की गई है? इसको लेकर हिमाचल हाईकोर्ट भी समय-समय पर शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब कर चुका है, लेकिन कोर्ट की सख्ती के बावजूद शिक्षा विभाग ने अभी तक निजी स्कूलों पर निगरानी रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई है। शिक्षा निदेशालय या स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा किसी भी निजी स्कूल से सवाल तक नहीं किए जाते हैं।

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