{"_id":"5d4c57a08ebc3e6d1525b719","slug":"himachal-principal-secretary-and-director-of-education-summoned-in-high-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रधान सचिव और शिक्षा निदेशक हाईकोर्ट में तलब, ये है वजह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधान सचिव और शिक्षा निदेशक हाईकोर्ट में तलब, ये है वजह
Fri, 09 Aug 2019 11:13 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 09 Aug 2019 11:13 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव कमलेश कुमार पंत और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा को न्यायालय के आदेशों की अनुपालना न करने पर 22 अगस्त को कोर्ट में तलब किया है। इस दौरान उनके खिलाफ लगाए जाने वाले आरोपों पर भी सुनवाई होगी। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि प्रधान सचिव द्वारा न्यायालय के समक्ष दायर किए गए आवेदन पर उन्हें 30 अक्तूबर 2018 को पारित निर्णय की अनुपालना के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था।
विज्ञापन
जो 31 जुलाई को खत्म हो गया लेकिन अभी तक कोर्ट के आदेशों की अनुपालना नहीं की गई। न्यायालय द्वारा पारित निर्णय के मुताबिक डीएवी पीजी कॉलेज दौलतपुर चौक (ऊना) को राज्य सरकार ने 14 सितंबर 2006 को अपने अधीन ले लिया था। चार जनवरी 2007 को राज्य सरकार ने कुछ टीचिंग व नॉन टीचिंग स्टाफ की सेवाओं को भी ले लिया था लेकिन प्रार्थी कमलेश कुमार व अन्यों की सेवाओं को इस कारण लेने से मना कर दिया था कि उन्हें डीएवी कॉलेज दौलतपुर चौक द्वारा निजी तौर पर इकट्ठे किए गए फंड द्वारा वेतन का हस्तांतरण किया जाता था।
विज्ञापन
उनके वेतन के लिए शिक्षा विभाग की ओर से ग्रांट इन एड नहीं दी जाती थी। प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने राज्य सरकार के इस निर्णय को गलत ठहराते हुए आदेश जारी किए थे कि प्रार्थी शिक्षकों को अन्य शिक्षकों की तरह 14 सितंबर 2006 से समायोजित किया जाए। हाईकोर्ट ने वरिष्ठता समायोजन की तारीख से देने के अलावा अन्य लाभ नोशनल बेसिस पर दिए जाने के आदेश भी जारी किए थे। प्रार्थियों का यह आरोप है कि हाईकोर्ट के आदेशों के बावजूद राज्य सरकार ने इन आदेशों की अनुपालना नहीं की है।
विज्ञापन