घटने लगा बिजली उत्पादन, हिमाचल में उधार की बिजली से कटेंगी सर्दियां
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ऊर्जा राज्य हिमाचल में सर्दियां उधार की बिजली से कटेंगी। प्रदेश में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही बिजली की डिमांड रोजाना 270 लाख यूनिट पहुंच गई है, जबकि विद्युत उत्पादन 245 लाख यूनिट हो रहा है। ऐसे में दिल्ली की दो कंपनियों बीआरपीएल और बीवाईसीएल सहित हरियाणा से हिमाचल सरकार ने वीरवार से बैंकिंग पर बिजली लेना शुरू कर दिया है।
आने वाले दिनों में सर्दी बढ़ने पर सूबे को अधिक बिजली की जरूरत पड़ेगी। इस स्थिति में पड़ोसी राज्यों से बिजली खरीदने की भी नौबत आ सकती है। वर्तमान में हिमाचल को गर्मियों से बरसात तक अन्य राज्यों को दी गई बिजली के रूप में मुफ्त में बिजली वापस मिल रही है। हिमाचल अपनी बिजली की खपत पूरा करने को बिजली बैंकिंग पर ले रहा है। केंद्रीय परियोजनाओं से मिलने वाले शेयर से प्रदेश की पचास फीसदी से ज्यादा मांग पूरी हो रही है।
राज्य सरकार ने भी विभिन्न परियोजनाओं से मिलने वाले शेयर को राज्य बिजली बोर्ड को देना शुरू कर दिया है। वर्तमान में सर्दी बढ़ने से हिमाचल में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। प्रदेश में रोजाना 270 लाख यूनिट बिजली की मांग है। इसमें बिजली बोर्ड को अपनी परियोजनाओं से मात्र 43 लाख यूनिट ही मिल पा रही है। 200 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली दूसरों के सहारे पूरी हो रही है।
कहां से आ रही बिजली कितनी यूनिट
हरियाणा 16 लाख यूनिट
बीआरपीएल 14 लाख यूनिट
बीवाईसीएल 43 लाख यूनिट
श्री सीमेंट लिमिटेड 2.61 लाख यूनिट
केंद्रीय शेयर से 152 लाख यूनिट
राज्य परियोजनाओं से 43 लाख यूनिट
बस्पा परियोजना 16 लाख यूनिट
काशंग परियोजना 2 लाख यूनिट
अन्य छोटी परियोजनाएं 29 लाख यूनिट
कुल 317.61 लाख यूनिट
प्रोजेक्टों में 55 फीसदी उत्पादन घटा
प्रदेश में सर्दियों का मौसम शुरू होते ही बिजली परियोजनाओं में उत्पादन 55 फीसदी तक घट गया है। प्रदेश की अपनी परियोजनाओं में वर्तमान में बिजली उत्पादन 43 लाख यूनिट हो रहा है। 225 लाख यूनिट में से 182 लाख यूनिट उत्पादन घट गया है।
केंद्रीय शेयर की परियोजनाओं में भी उत्पादन 210 लाख यूनिट से 152 यूनिट तक पहुंच गया है। हिमाचल में गर्र्मियों के मौसम में विद्युत परियोजनाओं में 440 लाख यूनिट प्रतिदिन बिजली उत्पादन होता है। इन दिनों उत्पादन घटकर 245 लाख यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गया है। आने वाले दिनों में उत्पादन में और अधिक कमी आने की संभावना है।