Himachal Day 2026: चुनाैतियों के पहाड़ पर बढ़ता हिमाचल प्रदेश, तलाश रहा आत्मनिर्भरता की राह
15 अप्रैल 1948 को अस्तित्व में आया यह छोटा सा राज्य देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पहाड़ों की गोद में बसा हिमाचल प्रदेश आज अपने 78 वर्षों की विकास यात्रा पर गर्व कर सकता है। 15 अप्रैल 1948 को अस्तित्व में आया यह छोटा सा राज्य देश के अन्य पहाड़ी राज्यों के लिए एक मॉडल बनकर उभरा है। प्राकृतिक संसाधनों, सीमित और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हिमाचल ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे उसकी दूरदर्शी नीतियों और जनभागीदारी का परिणाम हैं। 21वीं सदी की शुरुआत के बाद हिमाचल की अर्थव्यवस्था ने जिस रफ्तार से उड़ान भरी, वह उल्लेखनीय है। 1971 में पूर्ण राज्य बनने के समय जहां प्रति व्यक्ति आय महज 651 रुपये थी, वहीं 2025-26 तक यह बढ़कर करीब 2.83 लाख रुपये पहुंच गई। खासतौर पर 2010-11 से 2020-21 के बीच 272 फीसदी की वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि राज्य ने योजनाबद्ध आर्थिक विकास की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। पर्यटन, बागवानी, जलविद्युत और अब उभरते औद्योगिक क्षेत्र हिमाचल की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहे हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल की उपलब्धियां किसी मिसाल से कम नहीं हैं।
जीवन प्रत्याशा दर बढ़कर 73.5 वर्ष पहुंची
बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण जीवन प्रत्याशा दर बढ़कर 73.5 वर्ष तक पहुंच गई है, जबकि शिशु मृत्यु दर घटकर 14 रह गई है। यह दर्शाता है कि राज्य ने विकास को केवल नार्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मानवीय विकास को प्राथमिकता दी। पहाड़ों में विकास की असली पहचान कनेक्टिविटी से होती है। गांव-गांव तक सड़के पहुंचाने, हेलीपोर्ट निर्माण और होमस्टे योजनाओं के विस्तार ने पर्यटन को नई गति दी है। योजनाओं के डिजिटलीकरण और इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार ने ग्रामीण जीवन को भी आसान बनाया है। अब सरकारी सेवाएं लोगों के दरवाजे तक पहुंच रही हैं।
पर्यावरण संरक्षण हिमाचल की पहचान
पर्यावरण संरक्षण हिमाचल की पहचान रहा है। अब राज्य जल आधारित ऊर्जा पर निर्भरता कम कर सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहा है। 78 वर्षों की यात्रा में हिमाचल प्रदेश ने यह साबित कर दिया है कि सीमित संसाधनों के बावजूद इच्छाशक्ति और सही नीतियों के दम पर विकास संभव है। अब सरकार को जरूरत है कि यह राज्य आर्थिक आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संतुलन के बीच सामंजस्य बनाते हुए आगे बढ़ा जाए। हिमाचल आज सिर्फ एक राज्य नहीं, बल्कि संघर्ष, संतुलन और सफलता की जीवंत मिसाल बन चुका है।
ई-व्हीकल खरीद पर छूट, रुकेगा प्रदूषण
ई-व्हीकल खरीद पर छूट जैसे कदम न केवल प्रदूषण कम करेंगे, बल्कि भविष्य की टिकाऊ अर्थव्यवस्था की नींव भी मजबूत करेंगे। बल्क ढंग पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रोजेक्ट हिमाचल को औद्योगिक नवशे पर नई पहचान दिलाने की क्षमता रखते हैं। इससे रोजगार के अवसर बढ़े बढ़ेंगे और राज्य की आय के नए स्रोत विकसित होंगे।
आत्मनिर्भरता की राह तलाशता हिमाचल
15 अप्रैल 1948 यह वही दिन है जब पहाड़ों की गोद में बसी छोटी-छोटी रियासतों को मिलाकर हिमाचल प्रदेश का गठन हुआ। 79 वर्षों का यह सफर संघर्ष, संतुलन और सतत विकास की कहानी कहता है। आज जहां हिमाचल देश के पहाड़ी राज्यों के लिए एक मॉडल के रूप में उभरा है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती चुनौतियां राज्य को आत्मनिर्भरता की पटरी पर लाने की दिशा में गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। आजादी के बाद 30 से अधिक रियासतों को मिलाकर बने इस राज्य ने सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत ढांचे में उल्लेखनीय प्रगति की। 1971 में पूर्ण राज्य का दर्जा मिलने के बाद विकास की रफ्तार और तेज हुई। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को गांव-गांव तक पहुंचाना एक बड़ी उपलब्धि रही। हिमाचल को लंबे समय से हिल स्टेट मॉडल के तौर पर देखा जाता रहा है। मानव विकास सूचकांक, साक्षरता दर और स्वास्थ्य सेवाओं में राज्य ने कई बड़े राज्यों को पीछे छोड़ा है आर्थिक असंतुलन की परतें भी गहरी होती जा रही हैं।
राज्य पर एक लाख करोड़ से अधिक के कर्ज का बोझ
राज्य पर एक लाख करोड़ से अधिक का कर्ज बोझ बन चुका है। राजस्व के सीमित स्रोत और बढ़ते व्यय ने वित्तीय स्थिति को जटिल बना दिया है। सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सब्सिडी पर भारी खर्च के कारण विकास योजनाओं के लिए संसाधन जुटाना चुनौती बन गया है। हिमाचल की नदियां देश को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। सतलुज, ब्यास और रावी जैसी नदियों पर बने जलविद्युत परियोजनाएं ग्रीन गोल्ड के रूप में देखी जाती हैं, लेकिन इनसे मिलने वाला वास्तविक लाभ राज्य को अपेक्षित स्तर पर नहीं मिल पा रहा।
वन क्षेत्र के संरक्षण के एवज में केंद्र से सहयोग की दरकार
जल संसाधनों के बेहतर दोहन और उचित रॉयल्टी संरचना से हिमाचल अपनी आर्थिक स्थिति को काफी हद तक सुधार सकता है। इसके साथ वन क्षेत्र के संरक्षण के बदले केंद्र से अधिक आर्थिक सहयोग की मांग भी लंबे समय से उठती रही है। उधर, 79 वर्षों का सफर तय करने के बाद हिमाचल एक नए मोड़ पर खड़ा है। उपलब्धियों की लंबी सूची के साथ-साथ आर्थिक चुनौतियों का पहाड़ भी सामने है। ऐसे में जरूरत है दूरदर्शी नीतियों, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और केंद्र-राज्य सहयोग की, ताकि हिमाचल आने वाले वर्षों में न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि देश के लिए एक मजबूत विकास मॉडल भी पेश कर सके।
व्यवस्था परिवर्तन के साथ पारदर्शी शासन को प्रतिबद्ध : सुक्खू
पिछले वर्षों में हिमाचल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय प्रगति की है। हमारी सरकार व्यवस्था परिवर्तन के लक्ष्य के साथ पारदर्शी शासन को प्रतिबद्ध है। हम प्रदेश को आत्मनिर्भर, हरित और समृद्ध बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। हमारा संकल्प है कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और कर्मचारियों के कल्याण को प्राथमिकता दी जाए। प्राकृतिक खेती, स्वरोजगार, पर्यटन, ऊर्जा और उद्योग के क्षेत्र में नई संभावनाओं की विकसित कर हिमाचल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जाएगा। युवा नशामुक्त, स्वस्थ और सशक्त हिमाचल के निर्माण में अपनी भागीदारी निभाएं। सभी को एकजुट होकर हरित, समृद्ध और आत्मनिर्भर हिमाचल के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।-सुखविंद्र सिंह सुक्खू, मुख्यमंत्री हिमाचल
हर हाथ को मिलेगा काम, तभी आएगी आत्म निर्भरता: जयराम
पहाड़ जैसी भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने ऐतिहासिक उन्नति की है, लेकिन अभी हमें बहुत आगे जाना है। नशे को समस्या अब व्यापक रूप लेती जा रही है। हमारा प्रयास है कि हिमाचल का कोई भी परिवार नशे के कारण बर्बाद न हो। एक सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर हिमाचल ही हमारा लक्ष्य है। हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाना केवल नारों से संभव नहीं है। इसके लिए स्पष्ट विजन, मजबूत प्रबंधन और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। आत्मनिर्भरता तभी आएगी जब हर हाथ को काम मिलेगा और प्रदेश की आय बढ़ेगी। -जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
युवाओं के साथ मिलकर आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की जरूरत: धूमल
भावी पीढ़ी के साथ मिलकर आत्मनिर्भर हिमाचल बनाने की जरूरत है। हम सभी का दायित्व है कि मिलकर प्रदेश के विकास, समृद्धि और खुशहाली के लिए कार्य करें और आने बाली पीड़ियों के लिए एक मजबूत और आत्मनिर्भर हिमाचल का निर्माण करें। इस पावन भूमि ने हमें सादगी, परिश्रम और सेवा का मार्ग दिखाया है। हिमाचल प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और सुख, शांति और समृद्धि बनी रहे। -प्रेम कुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री
प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर लिखा 'समस्त हिमाचलवासियों को हिमाचल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। इस पुनीत अवसर पर मैं प्रदेश के सभी परिवारजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।'
समस्त हिमाचलवासियों को हिमाचल दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। यह पावन देवभूमि अपनी समृद्ध परंपराओं, अनुपम सांस्कृतिक धरोहर और यहां के लोगों की कर्मठता, कर्तव्यनिष्ठा और विनम्रता के कारण विशेष पहचान रखती है। इस पुनीत अवसर पर मैं प्रदेश के सभी परिवारजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 15, 2026
देवभूमि हिमाचल प्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) April 15, 2026
अपने अद्भुत सौंदर्य और गौरवशाली परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हिमाचल, ऐसे ही प्रगति और समृद्धि की राह पर अग्रसर रहे। pic.twitter.com/TRoxso48WZ