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जयराम सरकार और लेगी इतने करोड़ का कर्ज, 51 हजार करोड़ पहुंचा आंकड़ा

Sun, 18 Nov 2018 10:04 AM IST
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Updated Sun, 18 Nov 2018 10:04 AM IST
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Himachal Pradesh Govt To Borrow Rs 500 Crore from RBI by Treasury Bonds

51 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी प्रदेश की जयराम सरकार अब फिर से 500 करोड़ का कर्ज लेगी। चालू वित्तीय वर्ष में 2800 करोड़ रुपए का कर्जा लिया जा चुका है। इससे पहले मौजूदा सरकार ने मई, 2018 में 800 करोड़ और जून, 2018 में 700 करोड़ का कर्ज उठाया है ताकि सरकार के खर्चे पूरे किए जा सकें। राज्य सरकार भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से ट्रेजरी बांड से ऋण लेने को कमर कस ली है। 

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मालूम प्रदेश सरकार लंबे समय से वित्तीय संकट से जूझ रही है और सरकार के खर्चे कम नहीं हो पा रहे। बताते हैं कि सरकार नवंबर में फिर से कड़की से जूझ रही है और वित्तीय संसाधन जुटाने के लिए ऋण लिया जा रहा है। मौजूदा जयराम सरकार सत्ता पर आने के बाद से करीब दो हजार करोड़ के ऋण ले चुकी है और अब फिर से सरकार 500 करोड़ के ऋण लेने के लिए तैयारी कर चुकी है। इस ऋण के लिए आरबीआई से हरी झंडी मांगी जा रही ताकि सरकार इस वित्तीय वर्ष के खर्चों को पूरा कर सके।

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चालू वित्तीय वर्ष में ऋण लेने की लिमिट 5700 करोड़

Himachal Pradesh Govt To Borrow Rs 500 Crore from RBI by Treasury Bonds

मौजूदा समय में सरकार की ऋण लेने की सीमा 5700 करोड़ की है। इसके एवज में सरकार ने अक्तूबर तक कुल 2800 करोड़ का ऋण उठा लिया है। मई में सरकार ने 800 करोड़ और जून में 700 करोड़ का ऋण लिया है। अब सरकर फिर से 500 करोड़ का ऋण उठाएगी।
 
पूर्व सरकार के समय ऋण सीमा 5700 करोड़ रही
पूर्व कांग्रेस सरकार के समय यानी पिछले वित्तीय वर्ष में ऋण सीमा 5700 करोड़ की थी। इसके एवज में तत्कालीन सरकार ने अप्रैल, 2017 तक 5400 करोड़ के ऋण सरकार के खर्चे चलाने को लिए थे। 

ऋण सीमा यूं होती है तय
राज्य ग्रास  स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट(जीएसडीपी) के तीन फीसदी तक कोई भी सरकार आरबीआई तीन फीसदी तक ऋण उठाने के लिए सरकार को स्वीकृति देती है। इससे ज्यादा ऋण उठाया जाता है तो इसे राज्य की माली हालत और कमजोर मानी जाती है। 

अभी तक सरकार 51 हजार करोड़ के कर्ज में डूबी
हिमाचल प्रदेश अभी कुल 51 हजार करोड़ के कर्जे में बुरी तरह से डूब चुकी है। पूर्व और मौजूदा सरकार वित्तीय खर्च कम करने की बात कहती रही है परंतु कर्ज बढ़ता जा रहा है।

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