एनजीटी के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देगी सरकार, विधि विभाग से भी ली राय
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प्रदेश सरकार ढाई मंजिल भवनों के निर्माण को लेकर एनजीटी के फैसले को संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत चुनौती देगी। सरकार ने प्रदेश हाईकोर्ट में फैसले के खिलाफ जाने का मसौदा तैयार कर लिया है। इस संबंध में विधि विभाग के उच्च अधिकारियों से विभिन्न पहलुओं को लेकर राय ली गई है।
पहले सरकार एनजीटी के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रही थी। सूत्रों ने बताया कि सरकार ने बारीकी से अध्ययन किया है कि कैसे एनजीटी के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में चुनौती दी जाए।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें विधि मंत्री सुरेश भारद्वाज, शहरी विकास मंत्री सरवीण चौधरी, मुख्य सचिव विनीत चौधरी, शहरी विकास विभाग, विधि विभाग, वन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
बैठक में सरकार को विधि अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि संविधान ने हर विभाग के कार्य अधिकार क्षेत्र तय किए हैं। इसके दायरे से बाहर जाकर कोई भी काम नहीं किया जा सकता। भारतीय संविधान के अनुच्छेद के 226 के तहत यह अधिकार सभी विभागों को दिए हैं।
इसे आधार बनाकर चुनौती देने की राय विधि अधिकारियों ने दी है। माना जा रहा है कि अब सरकार हाईकोर्ट में एनजीटी के फैसले को चुनौती देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह पूछेगी कि ढाई मंजिलें भवनों के निर्माण के आदेश किस आधार पर दिए गए हैं? जबकि अनुच्छेद 226 के तहत सभी विभागों के कामों का बंटवारा किया गया है। हिमाचल प्रदेश टीसीपी एक्ट 1977 के तहत भवनों के निर्माण को मंजूरी दी जा रही है।