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Himachal News: निगम-बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों और सलाहकारों का कैबिनेट रैंक खत्म, वेतन में 20 फीसदी कटौती

Tue, 17 Mar 2026 12:21 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 17 Mar 2026 12:21 PM IST
सार

Himachal Economic Crisis: आर्थिक तंगी से जूझ रही हिमाचल प्रदेश सरकार ने सभी कैबिनेट रैंक खत्म कर दिए हैं। आदेश में कर्मचारियों और अधिकारियों को सभी संबंधित निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...

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Himachal Pradesh Government Abolishes All Cabinet Ranks Notification Issued
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

 आर्थिक संकट से जूझ रही हिमाचल सरकार ने अब मुख्यमंत्री के सलाहकारों और निगम-बोर्डों के अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों का कैबिनेट रैंक वापस ले लिया है। इसके साथ ही इन सात सियासी ओहदेदारों के वेतन-भत्तों में भी 20 फीसदी की कटौती कर दी है। ये कटौती तीस सितंबर तक के लिए ही की गई है। प्रदेश सरकार की ओर से इन्हें दी गईं कैबिनेट रैंक की सुविधाएं भी तत्काल प्रभाव से वापस हो जाएंगी। अमर उजाला ने मंत्रियों-विधायकों, सलाहकारों और निगम-बोर्डों के अध्यक्षों एवं उपाध्यक्षों के वेतन बढ़ोतरी के मामले को प्रमुखता से उठाया था। केंद्र की ओर से राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने पर वित्त सचिव की ओर से प्रदेश के आर्थिक हालात पर दी गई प्रस्तुति के बाद अमर उजाला ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि आम आदमी को कड़े फैसलों के लिए आगाह कर रही सरकार पिछले एक साल में मंत्री-विधायकों का वेतन 24 फीसदी और निगम- बोर्डों के ओहदेदारों की पगार पांच गुना बढ़ा चुकी है।

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दोहरे मापदंडों को उजागर करती इस रिपोर्ट के बाद अब सरकार ने बजट पेश करने से पहले सात सियासी ओहदेदारों का कैबिनेट रैंक वापस लेने के साथ ही उनके वेतन में कटौती करने का फैसला लिया है। प्रदेश सरकार का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के तहत लिया गया है। इन सलाहकारों और निगम-बोर्डों के अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के वेतन-भत्तों का 20 प्रतिशत हिस्सा 30 सितंबर, 2026 तक ही स्थगित रहेगा। मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं और फैसले को सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं।
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इन सात ओहदेदारों का कैबिनेट रैंक वापस
हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील कुमार बिट्टू्, प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार सूचना एवं प्रौद्योगिकी गोकुल बुटेल, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष एवं फतेहपुर से विधायक भवानी सिंह पठानिया, पर्यटन निगम के अध्यक्ष और नगरोटा बगवां से विधायक आरएस बाली, वन निगम के उपाध्यक्ष केहर सिंह खाची, सातवें वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं रामपुर से कांग्रेस विधायक नंद लाल का कैबिनेट रैंक वापस ले लिया गया है।
 

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आने वाले समय में और सख्त निर्णय देखने को मिलेंगे : सुक्खू
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकार ने विभिन्न पदाधिकारियों का कैबिनेट रैंक का दर्जा वापस ले लिया है। जिस प्रकार केंद्र से आरडीजी में कटौती की गई है, उसके बाद यह फैसला लिया गया है। आने वाले समय में और निर्णय देखने को मिलेंगे। 20 फीसदी वेतन की भी कटौती की है। यह शुरुआत है और अभी और भी निर्णय लिए जाने हैं, जिससे प्रदेश आत्मनिर्भर होगा। राज्य में वित्तीय सुधारों के लिए यह फैसले लिए जा रहे हैं। बजट की तैयारी चल रही है। विधानसभा में भी साथ-साथ कई निर्णय होंगे।




 

सीएम ने साहस दिखाकर प्रदेश के हित में लिया फैसला : चौहान
कैबिनेट रैंक चले जाने के बाद मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री का यह फैसला कड़ा है। ऐसे फैसले लेने के लिए नेता में साहस की जरूरत होती है। यह निर्णय हिमाचल प्रदेश के हित में लिया गया है। इसे प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए लिया गया है। चाहे उन्हें और उनके साथियों पर इसका प्रभाव पड़ा है। आने वाले समय में सीएम और भी कड़े निर्णय लेंगे। आरडीजी बंद होने के बाद जो पैसे की कमी रहने की बात है, वह एक भ्रम है।

 

वेतन कटौती की घोषणा आंखों में धूल झोंकने वाला कदम : संदीपनी
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सबसे पहले राजनीतिक नियुक्तियों वाले बोर्ड और निगमाें के चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन के मानदेय में भारी बढ़ोतरी की। पहले इन पदों पर 30,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता था, जिसे बढ़ाकर 80,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया। इसके अलावा आवास, आतिथ्य और अन्य भत्तों को जोड़कर इन पदों पर बैठे लोगों का कुल मासिक पैकेज लगभग 1.11 लाख से 1.30 लाख रुपये तक पहुंच गया। प्रदेश में मार्च 2026 तक करीब 40 चेयरमैन और वाइस-चेयरमैन विभिन्न बोर्डों और निगमों में नियुक्त किए जा चुके हैं। अब जब जनता के बीच इस मुद्दे पर सवाल उठे तो सरकार ने दिखावे के लिए 20 प्रतिशत वेतन कटौती की घोषणा कर दी, जो केवल आंखों में धूल झोंकने वाला कदम है। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस सरकार का पूरा ध्यान जनता की समस्याओं को हल करने के बजाय अपने नेताओं को पद और सुविधाएं देने पर केंद्रित है। प्रदेश में विकास कार्य ठप पड़े हैं, सेवानिवृत्त कर्मचारी सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, युवा बेरोजगार हैं, किसान-बागवान परेशान हैं, लेकिन सरकार का ध्यान केवल राजनीतिक नियुक्तियों पर है। 
 
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