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नए उद्योगों को रियायतें, पुरानों का भी रखा ख्याल, एंटी हेलगन पर मिलेगी इतनी सब्सिडी

Sat, 10 Mar 2018 11:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Updated Sat, 10 Mar 2018 11:42 AM IST
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himachal pradesh budget 2018-19 provisions for industry and horticulture

अपने पहले बजट में जयराम ठाकुर उद्योगों को लुभाते दिखे। नए उद्योगों के लिए जहां कई तरह की रियायतों का बजट में एलान किया। इनमें बिजली की दर कम करने से लेकर भूमि पट्टे की अवधि बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों को विकसित करना शामिल हैं। 

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साथ ही सरकार का फोकस स्थानीय संसाधनों पर आधारित उद्योगों पर ज्यादा है। इसके अलावा वर्तमान में मौजूद छोटे-बड़े उद्योगों के लिए भी कई तरह के प्रावधान किए हैं। 
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प्रदेश के उद्योग लंबे समय से एचपी एडिशनल गुड्स टैक्स को हटाने या कम करने की मांग करते रहे हैं। दलील यह है कि ऐसे टैक्स दूसरे प्रदेशों में नहीं है और अतिरिक्त टैक्स से उत्पाद प्रतिस्पर्धा में बने नही रह सकते। 
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उद्योगों की इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने लोहा, स्टील, धागा और प्लास्टिक के सामान पर इस टैक्स को 25 फीसदी कम करने का एलान किया। इसके अलावा वैट के प्रोत्साहन के लिए बचे समय के लिए स्टेट जीएसटी की आंशिक अदायगी के लिए नीति बनाएगी। 

छोटे-मझोले उद्योगों के विद्युत शुल्क में कटौती

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वहीं, रोजगार प्रदान करने के लिए चंबा के बडोहसिद्ध में बंद पड़े सीमेंट संयंत्र और सिरमौर के नौहराधार में सफेद सीमेंट संयंत्र के लिए बोली लगाकर उद्यमी चयनित करने का भी एलान किया।

वहीं, औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के उद्देश्य से बद्दी-बरोटीवाला विकास प्राधिकरण के लिए 35 करोड़, बरोटीवाला गुनाई परवाणू सड़क चौड़ीकरण के लिए 4 करोड़ और कंदरोड़ी व पंडोगा औद्योगिक क्षेत्रों का काम प्राथमिकता पर पूरा करने का एलान किया।

इसके अलावा सभी खनन स्थानों को आनलाइन पारदर्शी प्रतिस्पर्द्धा के तहत आवंटित करने की बात कही।सरकार ने प्रदेश के मझोले व छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विद्युत शुल्क में कटौती का एलान किया है।

मुख्यमंत्री जयराम ने कहा कि चूंकि इन दोनों श्रेणी के उद्योग ज्यादा रोजगार प्रदान करते हैं। ऐसे में छोटे उद्योगों पर विद्युत शुल्क को चार से घटाकर दो प्रतिशत और मझोले उद्योगों का दस से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया जाएगा।

वहीं, नए छोटे व मझोले उद्योगों को पांच साल तक विद्युत शुल्क से छूट देने का भी एलान किया। इसके अलावा लघु उद्योगों को पांच साल तक साढ़े चार रुपये की दर से बिजली मुहैया कराई जाएगी।

एचपीईआरसी में दायर करेगी याचिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली बोर्ड उद्योगों के विस्तार करने पर खपत होनेवाली अतिरिक्त बिजली पर रियायत के लिए नियामक आयोग में याचिका दायर करेगा। साथ ही नए उद्योगों को भी रियायती दरों पर बिजली देने के लिए याचिका दायर की जाएगी।

प्रदेश में खुलेंगे वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र

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मुख्यमंत्री ने प्रदेश में वरिष्ठ नागरिक सुविधा केंद्र खोलने की घोषणा की है। इन केंद्रों में वृद्धों की देखभाल के लिए उपचर्या सुविधाएं उपलब्ध होंगी। यह केंद्र गैर सरकारी संस्थानों द्वारा चलाए जाएंगे। प्रदेश सरकार उन्हें अनुदान प्रदान करेगी।

अनुसूचित जाति उप योजना को 1583 करोड़ का बजट 
अनुसूचित जाति उप योजना के लिए सरकार ने 1583 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। भाजपा की पिछली सरकार ने योजना बजट में अनुसूचित जातियों की जनगणना अनुरूप अनुसूचित जाति उप योजना शुरू करने का फैसला लिया था। इसके अलावा दिव्यांगों को अपनी शिक्षा जारी रखने और प्रोत्साहित करने के लिए वर्तमान छात्रवृत्ति को 25 प्रतिशत की दर से बढ़ाना प्रस्तावित किया है।

जनजातीय विकास को दिया 567 करोड़ 
शिमला। सरकार ने जन जातीय उप योजना के लिए 567 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। यह राज्य योजना का नौ प्रतिशत है। इस राशि को किन्नौर, लाहौल स्पीति, पांगी और भरमौर के पांच जन जातीय क्षेत्रों की विक्रेंद्रीकृत योजनाओं की प्राथमिकताओं के अनुरूप सिंचाई, बागवानी तथा सब्जी उत्पादन, सड़कों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल योजना पर खर्च किया जाएगा। इसके अलावा जन जातीय क्षेत्रों के लिए गैर योजना को सम्मिलत करते हुए 1620 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

किराये पर देने को कृषि उपकरण खरीदे तो इतनी मिलेगी  सब्सिडी

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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि मजदूरों की कमी के कारण कृषि का यंत्रीकरण समय की मांग है। ऊंचे दाम के कारण बहुत से किसान ट्रैक्टर, पावर वीडर, पावर टिल्लर जैसे उपकरण नहीं खरीद पा रहे हैं।

प्रदेश में कृषि उपकरण सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे। जिनमें किसान-बागवान किराये के उपकरण प्राप्त करेंगे। इन केंद्रों की स्थापना के लिए हिमाचल के किसानों, उद्यमियों को 25 लाख रुपये की राशि की मशीनरी पर 40 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा।

जयराम ठाकुर ने कहा कि बागवानी विभाग को कृषकों को पॉवर स्प्रेयर और पॉवर टिल्लर पर उपदान के लिए 12 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया जाता है।

इन्हीं उपरकरणों पर उपदान के लिए कृषि विभाग के लिए 20 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की गई। 29 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान से कृषकों को कृषि यंत्र दिए जाएंगे।  क्षतिग्रस्त पालीशीट को पालीहाउस में बदलने के लिए 70 फ ीसदी उपदान दिया जाएगा। 

एंटी हेलगन लगाओ, 60 फीसदी सब्सिडी मिलेगी 

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बागवानी सुरक्षा योजना के तहत एंटीहेलगन लगाने को 60 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। इसके लिए भी 60 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। एंटी हेलनेट पर उपदान के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की। इसके लिए 10 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की गई है। 

इस पर  मिलेगी 85 फीसदी सब्सिडी 
तीन या इससे अधिक किसान सामूहिक तौर पर सोलर बाड़ लगाएंगे तो सरकार इस पर 85 प्रतिशत उपदान देगी। इस योजना के लिए 35 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान होगा।

शीत भंडारण और प्रोसेसिंग के लिए बुलाए जाएंगे उद्योग 

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पांच करोड़ रुपये तक के खाद्यान्न प्रस्संकरण तथा 10 करोड़ तक के खाद्यान्न प्रस्संकरण तथा 10 करोड़ रुपये तक के शीत भंडारण में प्लांट एवं मशीनरी पर 50 प्रतिशत उपदान दिया जाएगा। सरकार विभिन्न संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित करेगी।

इन उद्योगों के लिए 50 प्रतिशत कम की दर पर भूमि आवंटित करेगी। खाद्यान्न विधायन से जुडे़ उद्योगों को पोटेटो चिप्स का उद्योग कांगड़ा और कुल्लू जिले में लगाने को आमंत्रित किया जाएगा। फसल कटाई के बाद प्रोसेसिंग यूनिटों को भी राज्य सरकार उद्यमियों को सरकारी भूमि पट्टे पर दी जाएगी।

उन्हें केवल तीन प्रतिशत स्टांप ड्यूटी ही देनी होगी। जीका योजना के तहत फसल विविधीकरण को 1000 करोड़ रुपये की योजना का दूसरा चरण शुरू होगा। इसकी संस्तुति वित्त मंत्रालय से आ चुकी है।

फिश फीड इकाई स्थापित करने के इच्छुक उद्योगों को भी सरकारी भूमि एक प्रतिशत पट्टे पर दी जाएगी। केवल तीन प्रतिशत स्टांप शुल्क लेंगे। यंत्र तथा मशीनों पर 50 प्रतिशत की दर से निवेश उपदान दिया जाएगा। 

फूलों के परिवहन पर कम करेंगे मालभाड़ा 

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प्रदेश में हिमाचल पुष्प क्रांति योजना के तहत पुष्प उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए 10 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। फूलों के परिवहन के लिए एचआरटीसी से मालभाडे़ के शुल्क को 25 प्रतिशत कम करवाया जाएगा। 
 
बीमा योजना में आएंगी सभी फसलें 
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत सभी फसलों और मौसम आधारित फसल बीमा योजना के तहत सभी फलों तथा क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। मौसम आधारित फसल बीमा योजनाऔर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 29 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान होगा। 

फसलों की बेहतर मार्केटिंग केे लिए बिल लाएगी सरकार 
राज्य सरकार हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर प्रोड्यूस एंड लाइवस्टॉक मार्केटिंग प्रमोशन एंड फेसिलिटेशन बिल 2018 लाएगी। इसमें कृषि विपणन, पशुधन विपणन और कृषि उत्पादों के विपणन के लिए खास प्रावधान होंगे। 

एक हिमालयन बकरे समेत 11 बकरियों पर 60 प्रतिशत सब्सिडी 

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जनजातीय भेड़पालकों की आर्थिकी में सुधार के लिए 60 प्रतिशत उपदान के साथ 1,000 प्रजनन भेड़ें दी जाएंगी। कृषक बकरी पालन योजना के तहत 60 फीसदी उपदान के साथ 11 बकरियों की एक इकाई दी जाएगी। इनमें हिमालयन प्रजाति का एक बकरा भी शामिल होगा।

इसके अलावा ब्रॉयलर योजना में मुर्गीपालन संवर्द्धन योजना के लिए 60 प्रतिशत उपदान पर 50 नई इकाइयों को भी स्थापित किया जाएगा। ऊल खरीद मूल्य को भी दस प्रतिशत बढ़ाने देने की घोषणा हुई।  

चारा, बीज और भूसा काटने को मशीनों पर देंगे उपदान 
बजट में 50 प्रतिशत उपदान पर कृषकों को उन्नत प्रकार के चारा, बीज और भूसा काटने को मशीनें देने का एलान किया। इसके लिए सात करोड़ रुपये के बजट की घोषणा की। केंद्र की डेयरी उद्यमी विकास योजना में हिमाचल सरकार 10 प्रतिशत अतिरिक्त उपदान देगी। अच्छी नस्ल की देसी गाय खरीदने पर 20 प्रतिशत की अतिरिक्त सब्सिडी दी जाएगी। 

मधुमक्खी पालन की नई योजना के तहत देंगे 50 प्रतिशत उपदान 

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अनुसूचित जाति एवं जनजाति के परिवारों की तर्ज पर दुधारू पशुओं के लिए पशु आहार पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। अब ये सब्सिडी अच्छी नस्ल की देसी गाय पालने वाले सामान्य श्रेणी के बीपीएल परिवारों को भी दी जाएगी। इसके लिए चार करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया है। 

मुख्यमंत्री मधु विकास योजना को भी सीएम जयराम ठाकुर ने शुरू करने का एलान किया। इस योजना में मधुमक्खी पालन को 50 फीसदी सब्सिडी देने के साथ 10 करोड़ रुपये के बजट की व्यवस्था की गई। प्रदेश में 11 नई ट्राउट हेचरियों और 100 ट्राउट इकाइयों की स्थापना की जाएगी। 

हर विधानसभा क्षेत्र में बनेगा खेल मैदान

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मुख्यमंत्री खेल विकास योजना के तहत राज्य सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में एक-एक खेल का मैदान विकसित करने की घोषणा की है। इस कार्य के लिए 6.80 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।

प्रदेश में मौजूद खेलकूद सुविधाओं के पुनरुद्धार के लिए दो करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है। इसके अलावा सरकार ने जिन क्षेत्रों में इंडोर कांप्लेक्स नहीं हैं वहां कांप्लेक्स बनाने के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है।

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