विधानसभा शीत सत्र: स्टोन क्रशर बंद करने पर गरमाया सदन, भाजपा सदस्यों ने किया वाकआउट
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकारें नियम और कानून से चलती हैं। स्टोन क्रशरों से प्राप्त होने वाले राजस्व को 500 करोड़ तक पहुंचाएंगे। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार पर पहले दिन से ही सब कुछ बंद करने का जुनून चढ़ा है।
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विस्तार
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा के शीत के दूसरे दिन सदन में कहा कि प्रदेश में नियमों को पूरा करने वाले क्रशर ही चलेंगे। पूर्व की भाजपा सरकार में प्रदेश में 100 करोड़ रुपये से अधिक का खनन घोटाला हुआ है। इसकी जांच करवाई जाएगी। वर्तमान सरकार ने केवल उन क्रशरों को बंद किया जो नियमों को पूरा नहीं करते। विपक्ष के नेता क्रशर के मामले पर बेवजह हंगामा कर रहे हैं। विपक्ष के हंगामे के पीछे की वजह भी हम जानते हैं, हम इस मामले में नहीं पड़ना चाहते। पूर्व सरकार के समय प्रदेश में 22 माइनिंग लीज सात करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से आवंटित की गईं, जबकि माइनिंग प्लान के हिसाब से यह प्रति वर्ष 24 करोड़ बनता था, यही तो घोटाला था। सरकार पूर्व में हुई इस माइनिंग ऑक्शन की जांच करवाएगी। विपक्ष जिस तरह से क्रशर के मामले उठा रहा है, उसे लगता है कि उन पर किसी व्यक्ति विशेष का दबाव है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि सरकारें नियम और कानून से चलती हैं। स्टोन क्रशरों से प्राप्त होने वाले राजस्व को 500 करोड़ तक पहुंचाएंगे। इस पर नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार पर पहले दिन से ही सब कुछ बंद करने का जुनून चढ़ा है। हिमाचल प्रदेश में स्टोन क्रशर बंद करने को लेकर सदन में खूब हंगामा हुआ। सरकार के जवाब से नाखुश भाजपा सदस्यों ने विरोधस्वरूप सदन में नारेबाजी कर वाकआउट कर दिया। भाजपा विधायक विपिन परमार और बिक्रम सिंह ने क्रशर बंद करने पर सरकार को घेरा। जिला कांगड़ा, मंडी, कुल्लू और हमीरपुर में ब्यास नदी पर बंद हुए क्रशरों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्षी में नोकझोंक हुई।
सदन में भाजपा की नारेबाजी के चलते प्रश्नकाल प्रभावित हुआ। प्रश्नकाल में पहला प्रश्न सुलह के विधायक परमार ने किया। उन्होंने कहा कि क्रशर बंद करने के मामले में क्यों तीन जिलों को ही टारगेट किया। इस पर उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय ब्यास और उसकी उपनदियों के इर्द-गिर्द नुकसान हुआ। सरकार की गठित कमेटी ने 80 क्रशर बंद किए हैं। कई क्रशर गैरकानूनी थे। औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कुछ क्रशर खोल दिए हैं। कैप्टिव क्रशरों में ज्यादा समस्या है, जो किसी परियोजना के साथ लगाए हैं। कमियां रोकने के लिए हाईपावर कमेटी की बैठक हुई है। राजस्व का सरकार को नुकसान नहीं हुआ है। वित्त वर्ष 2022-23 में 242 करोड़ का राजस्व मिला था।
इस साल 15 दिसंबर 2023 को 204 करोड़ की आमदनी हो गई है। आने वाले दिनों में राजस्व बढ़ेगा। अनुपूरक सवाल में भाजपा विधायक बिक्रम सिंह ने कहा कि 112 क्रशर बंद किए। रेत, बजरी के रेट तीन गुना बढ़े। लोग बेरोजगार हो गए। सरकार ने सोलन और सिरमौर में क्रशर बंद क्यों नहीं किए। यह कहना सही नहीं है कि राजस्व नुकसान नहीं हुआ। इस पर उद्योग मंत्री ने दोहराया कि ब्यास के इर्द-गिर्द लोगों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। हमीरपुर में ब्यास बेसिन वाले क्रशर ही बंद किए हैं और सतलुज बेसिन वाले बंद नहीं किए हैं। इस साल रॉयल्टी भी अच्छी होगी।
रात में भी विपक्ष के हंगामे से गरमाया सदन
तपोवन में प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन बुधवार को सदन रात में भी विपक्ष के हंगामे से गरमाया। स्पीकर ने सदस्यों की सहमति से सदन की कार्यवाही दो बार बढ़ाते हुए रात 8:00 तक बजे तक निर्धारित की थी। इससे चंद मिनट पहले ही विपक्ष ने मंत्री चंद्र कुमार के जवाब पर असंतोष जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। सदन में कुछ देर नारेबाजी करने के बाद विपक्ष के सदस्य वाकआउट करके बाहर चले गए। इसके बाद स्पीकर कुलदीप पठानिया ने कार्यवाही को गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया। सदन में अंतिम दौर की कार्यवाही के दौरान भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के सवाल पर जवाब आना था। रणधीर शर्मा ने नैनादेवी क्षेत्र में किसानों की फसल की खरीद सुनिश्चित करने का मामला उठाया था। सवाल का जवाब कृषि मंत्री चंद्रकुमार ने दिया। लेकिन, रणधीर शर्मा समेत पूरा विपक्ष उनके जवाब से असंतुष्ट दिखा। विपक्ष ने सदन में सरकार पर गैर जिम्मेदाराना होने का आरोप लगाया। कहा कि सरकार सदन की अवमानना कर रही है।विपिन सिंह परमार और अन्य विपक्षी सदस्यों ने कहा कि इधर सदन की कार्यवाही चल रही है। उधर, कैबिनेट बैठक चल रही है। पूरी कार्यवाही के दौरान विपक्ष के मुद्दों पर सरकार की ओर से आ रहे जवाब संतोषजनक नहीं हैं। यह सरासर सदन की अवमानना है। वाकआउट करने के बाद विपक्षी सदस्यों ने विधानसभा भवन के प्रवेश द्वार पर नारेबाजी कर अपना रोष भी जताया।
रेट तीन गुना बढ़ गए, तो क्या इससे नुकसान नहीं हुआ : जयराम
उद्योग मंत्री के जवाब के बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि उन्हें उत्तर सुनकर हैरानी हो रही है। राजस्व नुकसान नहीं हुआ है तो क्या और आमदनी के प्रयास नहीं करने चाहिएं। 112 क्रशर बंद कर दिए थे और अब 90 चला दिए, तो ये बंद किए क्यों, क्योंकि तुगलकी फरमान हो गया कि बंद कर दो। जब बंद कर दिए तो क्या नुकसान नहीं हुआ। इससे बहुत बड़ा नुकसान हुआ है। जयराम ने कहा कि इससे रोजगार का नुकसान नहीं हुआ, यह सुनकर हंसी आती है। रेट तीन गुना बढ़ गए हैं तो क्या इससे नुकसान नहीं हुआ। इस पर मुख्यमंत्री सूक्ख ने कहा कि सरकार कायदे-कानून से चलती है। 128 क्रशर ब्यास बेसिन पर थे। प्राकृतिक आपदा के समय ब्यास नदी ने तबाही मचाई। क्रशर खोलने के लिए नियम पूरा करने की जरूरत होती है।
बजरी के रेट घटाने के लिए स्टोन क्रशरों पर और सख्ती करेगी सरकार : सीएम
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्टोन क्रशरों पर और सख्ती करने के संकेत देते हुए कहा कि सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि बजरी के रेट उत्पादन की लागत के हिसाब से तय किए जाएं, जिससे जनता पर बोझ न पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में कांगड़ा में माइनिंग प्लान कुछ और था। इससे सरकार को रॉयल्टी नहीं मिल पाई। इससे राजस्व को हुए नुकसान की भी जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बुधवार को सदन में प्रश्नकाल में सुलह के भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार के प्रश्न का उत्तर दिया। वह उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान के जवाब पर हंगामा करते विपक्ष पर आक्रामकता से बोले कि गलत किसी के साथ नहीं होगा, मगर जो गैरकानूनी खनन करेगा, उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि साल के 500 करोड़ रुपये माइनिंग से रॉयल्टी के मिलने ही चाहिएं। सीएम ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय ब्यास नदी ने तबाही मचाई। अधिसूचना के अनुसार 15 सितंबर तक खनन पर रोक रहती है। क्रशर खोलने के लिए नियम पूरा करने की जरूरत होती है। सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है।
बजरी के रेट घटाने के लिए स्टोन क्रशरों पर और सख्ती करेगी सरकार : सीएम
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने स्टोन क्रशरों पर और सख्ती करने के संकेत देते हुए कहा कि सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि बजरी के रेट उत्पादन की लागत के हिसाब से तय किए जाएं, जिससे जनता पर बोझ न पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में कांगड़ा में माइनिंग प्लान कुछ और था। इससे सरकार को रॉयल्टी नहीं मिल पाई। इससे राजस्व को हुए नुकसान की भी जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री सुक्खू ने बुधवार को सदन में प्रश्नकाल में सुलह के भाजपा विधायक विपिन सिंह परमार के प्रश्न का उत्तर दिया। वह उद्योग मंत्री हर्षवर्द्धन चौहान के जवाब पर हंगामा करते विपक्ष पर आक्रामकता से बोले कि गलत किसी के साथ नहीं होगा, मगर जो गैरकानूनी खनन करेगा, उस पर कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि साल के 500 करोड़ रुपये माइनिंग से रॉयल्टी के मिलने ही चाहिएं। सीएम ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय ब्यास नदी ने तबाही मचाई। अधिसूचना के अनुसार 15 सितंबर तक खनन पर रोक रहती है। क्रशर खोलने के लिए नियम पूरा करने की जरूरत होती है। सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है।
केंद्र ने 633.73 नहीं, 397.98 करोड़ रुपये की राशि जारी दी
इससे पूर्व प्रश्नकाल के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने वक्तव्य दिया कि प्रदेश में मानसून में भारी वर्षा के कारण बादल फटने और बाढ़ की कई घटनाएं हुईं। 9905 करोड़ रुपये का मैमोरेंडम ऑफ लॉसेज भारत सरकार को भेजा गया। भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से अंतरिम राहत के रूप में 200 करोड़ रुपये की राशि 16 सितंबर को जारी की गई। केंद्र की ओर से से 11 जुलाई 2023 को अधिसूचित राहत नियमावली के प्रावधानों के अनुसार 9,905 करोड़ रुपये के मैमोरेंडम ऑफ लॉसेज के आधार पर न्यूनतम दरों के आधार पर यदि राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि से प्रदेश को दी जाती है तो भी 1,658 करोड़ रुपये की राशि प्रदेश को दी जानी है। सरकार की ओर से 633.73 करोड़ रुपये की राशि 19 दिसंबर 2023 को स्वीकृत की गई है।
राशि में से भी 200 करोड़ रुपये पहले ही अंतरिम राहत के रूप में प्राप्त हो चुके हैं जो कि सभी जिलों व संबंधित विभागों को राहत एवं बचाव कार्य के रूप में जारी कर दिए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से 19 दिसंबर 2023 को प्रदेश को केवल 397.98 करोड़ रुपये की राशि जारी की गई है जो कि प्रदेश में आपदा से हुई तबाही की क्षतिपूर्ति के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि यह राशि प्रदेश में हुए नुकसान का केवल 6.40 प्रतिशत है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से राज्य में पोस्ट डिजास्टर नीड्स का आकलन करवाया गया है, जो कि 9020 करोड़ रुपये आया है। इसकी रिपोर्ट 25 नवंबर 2023 को भारत सरकार को भेजी गई है।
बल्ह के विधायक इंद्र सिंह गांधी के सवाल के जवाब में राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि किसी को मुआवजा मिला है तो सूची दें और इस पर जांच करेंगे। इसे दुरुस्त किया जाए। भेदभाव किया जा रहा है, यह सही नहीं है। गांधी ने सदन में आपदा राहत राशि का भेदभावपूर्ण आवंटन करने का आरोप लगाया। विपक्ष सदन से बाहर था, मगर इंद्र सिंह गांधी अकेले विधायक थे जो सवाल करने भीतर आए। जवाब सुनने के बाद वह भी बाहर चले गए।
धर्मपुर के विधायक चंद्रशेखर के सवाल के जवाब में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विधायक राजेंद्र राणा, सुरेश कुमार और चंद्रशेखर के साथ हमीरपुर में बैठक करेंगे। जहां-जहां भी कोताही बरती जा रही है। वहां कड़ा संज्ञान लेंगे। यह मामला नितिन गडकरी से भी उठाया जाएगा। आपदा में नुकसान हुआ है। जिस तरह की रिटेनिंग वाल लगनी चाहिए थीं, वे नहीं लगी हैं। चंद्रशेखर ने हमीरपुर-मंडी-वाया धर्मपुर नेशनल हाइवे नंबर तीन के द्वितीय पैकेज पर एक सवाल किया था। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उन्होंने सवाल खड़ा किया। गगरेट के विधायक चैतन्य शर्मा ने प्री प्राइमरी स्कूलों में रिक्तियों को भरने पर सवाल किया तो शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि 6000 प्राथमिक पाठशालाओं में प्री प्राइमरी स्कूल हैं। आने वाले समय मे 10 से ज्यादा जहां संख्या है, वहां एनटीटी शिक्षकों की नियुक्ति होगी।