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Himachal Politics: अब भाजपा में ही ठौर-ठिकाना तलाशेंगे बागी विधायकों के करीबी

Mon, 25 Mar 2024 05:00 AM IST
Krishan Singh मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला
मदन मोहन लखेड़ा, धर्मशाला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 25 Mar 2024 05:00 AM IST
सार

 माना जा रहा है कि अपने नेता के जरिये ये करीबी भाजपा में ही ठौर-ठिकाना तलाशेंगे। कार्रवाई का चाबुक चलाकर कांग्रेस हाईकमान ने फैसला करने से पहले ही उन्हें यह राह सुझाने का काम कर दिया है। 

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Himachal Politics: Now close to rebel MLAs will seek shelter in BJP only
कांग्रेस के बागी विधायक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विधानसभा की सदस्यता गंवाने वाले बागी विधायकों का भगवाकरण हो जाने के बाद अब बारी उनके करीबियों की है। माना जा रहा है कि अपने नेता के जरिये ये करीबी भाजपा में ही ठौर-ठिकाना तलाशेंगे। कार्रवाई का चाबुक चलाकर कांग्रेस हाईकमान ने फैसला करने से पहले ही उन्हें यह राह सुझाने का काम कर दिया है। साफ है कि बागी विधायक अब अपने कट्टर समर्थकों को भी भाजपा में लाने की जुगत भिड़ाएंगे। भाजपा पहले ही कुनबा बढ़ाने की नीति पर चल रही है। माना जा सकता है कि बागी विधायकों के अपने हलकों में लौटने के बाद उनके करीबियों का भी भगवाकरण होने दौर चल पड़ेगा।

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राज्यसभा चुनाव में हुए अप्रत्याशित घटनाक्रम के साथ ही कांग्रेस के निशाने पर बागी विधायक ही नहीं, उनके करीबी भी आए गए थे। पार्टी ने कार्रवाई का चाबुक चलाना शुरू किया तो सबसे पहले बागी विधायकों को विधायकी से हाथ धोना पड़ा। इसी कड़ी में बागी विधायक सुधीर शर्मा के हलके में ब्लॉक युकां अध्यक्ष अश्वनी राणा, ब्लॉक युवा इंटक अध्यक्ष शुभम सूद और फिर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार कश्यप पर सबसे पहले गाज गिरी। नगर निगम धर्मशाला में सुधीर समर्थक पांच मनोनीत पार्षदों को भी हटाया गया। बागी विधायक रवि ठाकुर का समर्थक बताकर लाहौल-स्पीति जिला कांग्रेस महासचिव संजय कटोच, राजेंद्र राणा समर्थक सुजानपुर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और इंद्रदत्त लखनपाल के हलके की बड़सर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी को भंग कर दिया गया।
 

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बागी विधायकों के करीबियों पर कांग्रेस की कार्रवाई का यह चाबुक अभी थमा नहीं है। धर्मशाला में पार्टी ने नया ब्लॉक कमेटी अध्यक्ष भी नियुक्त कर दिया है। कांग्रेस हाईकमान का यह सख्त रुख बागियों के करीबियों को अब पार्टी में उनके लिए कोई गुंजाइश न होने का दो टूक संदेश माना जा रहा है। ऐसे में उनके सामने अपने नेता के साथ भाजपा में ही ठौर-ठिकाना ढूंढना एकमात्र विकल्प है। दूसरी ओर, बागियों के विस क्षेत्रों से कई भाजपाइयों के लिए भी खुद को एडजस्ट करना आसान नहीं होगा। कांग्रेस छोड़ भाजपा में आने वाले वाले पूर्व विधायक राकेश कालिया ने इस्तीफा देकर इसके संकेत दे दिए हैं।

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कड़े अनुशासन और फैसले के लिए जाने जानी वाली भाजपा में भले ही विरोध का ज्वालामुखी न फूटे लेकिन, कुछ और नेताओं के पाला बदल लेने की संभावनाओं को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता है। कहा जा सकता है कि बागी विधायकों के अपने हलकों में लौटकर सक्रिय होने के साथ ही पाला बदल की सियासत का नया दौर जोर पकड़ेगा। यह दौर उपचुनाव से पहले ही भाजपा और कांग्रेस की भीतरी सियासत को और गर्माता दिखेगा।
 

 भाजपा खुले दिल वाली पार्टी है और खुले दिल से ही आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की नीतियों में विश्वास रखने वालों का स्वागत है। ऐसे लोग आना चाहेंगे तो उन्हें भाजपा में आत्मसात किया जाएगा। -डॉ. राजीव बिंदल, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

-धर्मशाला के विकास के मुद्दे पर हम सुधीर शर्मा के साथ हैं और रहेंगे। फिर, राजनीतिक पार्टी कोई भी हो। पद की कोई चाह नहीं। सुधीर शर्मा चाहेंगे तो भाजपा में कार्यकर्ता के तौर पर धर्मशाला के विकास को गति देने में सहयोग देने को तैयार हैं।
- राजकुमार कश्यप, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष धर्मशाला

राजेंद्र राणा के साथ सुजानपुर के विकास के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है और आगे भी करेंगे। भविष्य में भी उनके ही मार्गदर्शन पर काम करने को तैयार हैं।-कैप्टन ज्योति प्रकाश, पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सुजानपुर

- हम विकास चाहते हैं और यह विजन सुधीर शर्मा के पास ही है। भाजपा के पुराने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का मान-सम्मान पहले है। सामान्य कार्यकर्ता के तौर पर धर्मशाला के विकास के लिए सुधीर शर्मा के नेतृत्व में काम करने में कोई दिक्कत नहीं है। अश्वनी राणा उर्फ दक्ष, पूर्व ब्लॉक युकां अध्यक्ष धर्मशाला

- संगठन में बैठे कुछ लोगों को पहले से दिक्कत थी, इसलिए निष्कासन की कार्रवाई करवाई गई है। यह अंदेशा पहले से था और अपना इस्तीफा जिला अध्यक्ष को निष्कासन से पहले ही सौंप चुका हूं। पार्टी का समर्पित सिपाही रहा हूं। जल्द ही तय किया जाएगा कि अब आगे क्या करना है।संजय कटोच, निष्कासित महासचिव, लाहौल-स्पीति जिला कांग्रेस

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