कांगड़ा: ऐसे हालात रहे तो गांवों में कोरोना की तीसरी लहर से कैसे लड़ेंगे
50 के दशक में सिविल अस्पताल परागपुर का उद्घाटन पंजाब के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने किया था। तब रात्रि ओपीडी की सुविधा भी हुआ करती थी। साथ ही वे सभी पद इस अस्पताल में सृजित थे, जो सिविल अस्पताल में होते हैं। मौजूदा समय में एक चिकित्सक और एक दंत चिकित्सक और अन्य वही पद रह गए हैं, जो एक पीएचसी में होते हैं।
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कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी तीसरी लहर में कहीं भारी न पड़ जाए। केंद्र सरकार अस्पतालों को अपग्रेड कर उनमें सुविधाएं मुहैया करवाने के निर्देश दे रही लेकिन हिमाचल प्रदेश का परागपुर में इसके उलट हो रहा है। यहां 50 के दशक में बने सिविल अस्पताल में सुविधाएं बढ़ने के बजाय कम कर दी गई हैं। यहां सालों पहले रात्रि ओपीडी होती थी, लोग 24 घंटे इलाज के लिए आते थे। अब हालात यह है कि रात्रि ओपीडी बंद है। दो डॉक्टरों में से एक डॉक्टर का पद खत्म कर दिया गया।
अस्पताल का दर्जा बढ़ाने की मांग पर कोई मंत्री, नेता गौर नहीं कर रहा है। सिविल अस्पताल में एसएमओ का पद होता है जो यहां सृजित नहीं किया गया है। यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में कोरोना से लड़ना मुश्किल हो जाएगा। हजारों की आबादी को देहरा या फिर टांडा का रुख करना पड़ेगा। लोगों का आरोप है कि सिविल अस्पताल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाकर रख दिया है। 50 के दशक में सिविल अस्पताल परागपुर का उद्घाटन पंजाब के तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने किया था। तब रात्रि ओपीडी की सुविधा भी हुआ करती थी।
साथ ही वे सभी पद इस अस्पताल में सृजित थे, जो सिविल अस्पताल में होते हैं। मौजूदा समय में एक चिकित्सक और एक दंत चिकित्सक और अन्य वही पद रह गए हैं, जो एक पीएचसी में होते हैं। व्यापार मंडल परागपुर के प्रधान दिनेश कौल, उपप्रधान रणधीर सिंह, युवा विकास मंडल परागपुर के संयोजक शिव शाह, ग्राम सुधार सभा गढ़ (परागपुर) के अध्यक्ष कमांडर आरएस पटियाल ने प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से मांग की है कि वह परागपुर अस्पताल को स्तरोन्नत कर सभी सुविधाएं मुहैया करवाएं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परागपुर को स्तरोन्नत कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और इस केंद्र में खंड चिकित्सा अधिकारी बैठाने पर विचार किया जाएगा। -डॉ. राजीव सैजल, स्वास्थ्य मंत्री।
वार्ड ब्वॉय को ऑक्सीजन सिलिंडर बदलने तक का पता नहीं
कोविड अस्पतालों में ठेकेदारों की ओर से रखे वार्ड ब्वॉय बिना ट्रेनिंग ड्यूटी दे रहे हैं। इन वार्ड ब्वाय को ऑक्सीजन सिलिंडर का रेगुलेटर तक बदलने का पता नहीं है। ऐसा ही एक मामला 18 मई को धर्मशाला कोविड अस्पताल में सामने आया है। जहां वार्ड ब्वॉय ने जानकारी न होने के कारण गंभीर स्थिति में ऑक्सीजन के सहारे मरीज का सिलिंडर बदलते समय तीन बार रेगुलेटर तोड़ दिया।
वार्ड ब्वॉय को यह तक नहीं पता था कि सिलिंडर से मरीज को कितनी मात्रा में ऑक्सीजन पहुंचानी है। वहीं ऑक्सीजन का प्रेशर ज्यादा होने से तीन बार सिलिंडर का रेगुलेटर टूट गया। मरीज ऑक्सीजन के लिए तड़पता रहा और कुछ समय बाद उसने ऑक्सीजन न मिलने के कारण दम तोड़ दिया। मरीज के साथ आए उसके बेटे में पूरे मामले की वीडियो बना ली और सोशल मीडिया पर वायरल कर दी।
शाहपुर क्षेत्र के रहने वाले राकेश ने बताया कि उसके पिता संक्रमित होने के कारण धर्मशाला अस्पताल में उपचाराधीन थे। उपचार के दौरान स्वास्थ्य में सुधार हो रहा था। अचानक उनकी ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी। पिता की हालत को देखते हुए उन्होंने डॉक्टर और नर्स को बुलाया। 35 मिनट बाद नर्स आई और एक घंटे बाद डॉक्टर आया। तब तक पिता की मौत हो चुकी थी। उन्होंने बताया कि वार्ड ब्वॉय को ऑक्सीजन सिलिंडर बदलने के लिए कहा। उसने तीन रेगुलेटर तोड़ दिए।
धर्मशाला अस्पताल के एमएस डॉ. राजेश गुलेरी ने बताया कि संक्रमित को जब अस्पताल लाया गया तो इसका ऑक्सीजन लेवल कम था। जब मरीज का ऑक्सीजन सिलिंडर बदला गया तो उस समय वार्ड ब्वॉय से रेगुलेटर टूट गया।