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नई तिब्बत सरकार के लिए दुनिया भर में मतदान, प्रधानमंत्री पद के लिए छह प्रमुख दावेदार
Sun, 03 Jan 2021 09:06 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
अमर उजाला नेटवर्क, धर्मशाला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sun, 03 Jan 2021 09:06 PM IST
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धर्मशाला में निर्वासित तिब्बत सरकार व संसद चुनाव के लिए मतदान करने आए तिब्बती अपना वोटर कार्ड दिखते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
दुनिया भर में रविवार को तिब्बती मतदाताओं ने निर्वासित तिब्बत सरकार का नया प्रधानमंत्री चुनने के लिए पहले चरण के मतदान में भाग लिया। नए निर्वासित प्रधानमंत्री पद के लिए 6 प्रमुख दावेदार हैं। इनमें निर्वासित तिब्बती संसद के उपाध्यक्ष आचार्य येशी फुंचोंक, निर्वासित तिब्बत सरकार की पूर्व गृह मंत्री गेरी डोलमा, निर्वासित तिब्बत संसद के पूर्व अध्यक्ष पेंपा सेरिंग सहित केलसंग दोरजे, लोबसंग न्यांदक, ताशी तोपग्याल शामिल हैं।
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तिब्बत समुदाय के लोगों ने 45 सदस्यीय निर्वासित संसद के उम्मीदवारों के लिए भी मतदान किया। पहले चरण के चुनाव नतीजे 8 फरवरी को घोषित होंगे। दूसरे और आखिरी चरण की वोटिंग 11 अप्रैल को होगी। इसके नतीजे 14 मई को घोषित होंगे।
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22 दिसंबर तक दुनिया भर में कुल 79,697 मतदाताओं ने मतदान करने के लिए पंजीकरण किया था। इनमें 55,683 भारत में रहते हैं। तिब्बत की निर्वासित 16वीं संसद में 45 सदस्य हैं। इसमें तिब्बत के तीन पारंपरिक प्रांतों-यू-त्सांग, धोते और धोमी में से 10-10 प्रतिनिधि है। तिब्बती बौद्ध धर्म और प्री-बौद्ध बॉन धर्म के चार स्कूलों में से दो-दो प्रतिनिधि हैं।
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तिब्बती भाषा में प्रधानमंत्री यानी मुखिया को सिक्योंग कहते हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार में चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त वांगड़ू सेरिंग ने बताया कि भारत समेत दुनिया के 26 देशों में करीब 500 मतदान केंद्रों पर तिब्बती मतदाताओं ने वोट डाला। धर्मशाला में 16 मतदान केंद्र थे। भारत और दुनिया भर में करीब 1.5 लाख निर्वासित तिब्बती हैं। भारत में करीब 1 लाख तिब्बती रहते हैं, जबकि बाकी अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील जैसे देशों में रहते हैं।
सांग्ये के कार्यकाल में तिब्बत पर मजबूत हुई अमेरिकी नीति
वर्तमान में निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री हार्वर्ड से पढ़े डॉ. लोबसंग सांग्ये हैं। वह दो बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के संविधान के मुताबिक कोई भी व्यक्ति लगातार तीसरी बार पीएम पद के लिए चुनाव नहीं लड़ सकता है। लोबसंग सांग्ये के कार्यकाल की ऐतिहासिक उपलब्धि चीन के विरोध के बावजूद अमेरिका की 2020 के तिब्बत नीति और समर्थन अधिनियम का पारित होना है।
एक ऐसा निर्णय है, जिसने तिब्बत पर अमेरिकी नीति को मजबूत किया। नए अमेरिकी कानून के मुताबिक अब दलाईलामा को चुनने का फैसला विशेष रूप से वर्तमान दलाईलामा, तिब्बती बौद्ध नेताओं और तिब्बती लोगों के अधिकार क्षेत्र में है।