Himachal News: हिमाचल में बारिश बनी आफत! रात नौ बजे सड़क-रेन शेल्टर समेत धंस गया बालूगंज का पहाड़ी क्षेत्र
राजधानी के बालूगंज क्षेत्र में रात को पहाड़ी का एक बड़ा हिस्सा फिर ढह गया। बस अड्डे से बालूगंज को जोड़ने वाली सड़क पर क्रॉसिंग के पास मलबा गिरा है तो दूसरी ओर विधानसभा-बालूगंज सड़क का 60 मीटर हिस्सा रात को ढह गया। इससे चौड़ा मैदान सड़क भी पूरी तरह बंद हो गई। अमर उजाला टीम ने मंगलवार रात को मौके का जायजा लिया।
विस्तार
राजधानी के बालूगंज क्षेत्र में मंगलवार रात 9:00 बजे भूस्खलन की जद में आया पहाड़ी क्षेत्र भरभराकर ढह गया। इससे बालूगंज-क्रॉसिंग सड़क और विधानसभा-बालूगंज सड़क आवाजाही के लिए पूरी तरह से ठप हो गई है। इस क्षेत्र में देररात हुए भूस्खलन से अब पहाड़ी के ऊपर बने केंद्रीय संस्थान एडवांस स्टडी को भी खतरा पैदा हो गया है।
मंगलवार को दिन के समय विधानसभा बालूगंज सड़क पर बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई थीं। भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पुलिस रात को भी यहां तैनात थी। रात 9:00 बजे पहाड़ी से पहले पत्थर गिरने लगे। फिर एकाएक पेड़ों समेत पहाड़ी का भारी मलबा निचली ओर बनी क्रॉसिंग सड़क पर आ पहुंचा। तारों में शार्टसर्किट और पत्थर गिरते देख पुलिस ने शिमला चंडीगढ़ सड़क मार्ग पर आवाजाही रोक दी। इससे किसी तरह का जानी नुकसान नहीं हुआ है। पुलिस के अनुसार विधानसभा बालूगंज सड़क का आधा हिस्सा पहाड़ी समेत 200 मीटर नीचे क्रॉसिंग सड़क पर पहुंच गया है। क्रॉसिंग सड़क पर बना रेन शेल्टर भी मलबे में दब गया है। अब इस सड़क पर इतना मलबा आ गया है कि अगले कुछ दिन यह यातायात के लिए बंद रहेगी। विधानसभा बालूगंज सड़क भी अगले कई दिन बंद रहने वाली है।
पार्षद दिलीप थापा ने बताया कि रात के समय पहाड़ी इलाका सड़क समेत नीचे धंस गया है। वहीं दूसरी तरफ को भूस्खलन के कारण यहां अफरातफरी मची रही। लोगों का कहना है कि पक्के डंगे लगाए जाएं तथा ड्रेन सिस्टम को भी सुधारा जाए। वहीं, रात को भी बालूगंज क्रॉसिंग पर पुलिस कर्मचारी तैनात थे ताकि वाहनों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से करवाई जा सके।
जारी है सड़क बहाली का काम
क्रॉसिंग के पास सड़क पर आए मलबे को हटाने का काम मंगलवार को भी जारी रहा। लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता विपिन शर्मा ने बताया कि मौके पर दो जेसीबी मशीनें मलबा हटा रही हैं। यह मलबा उठाने के लिए दस टिपर लगाए हैं। ऐसे में भूस्खलन को देखते हुए ही इस सड़क पर यातायात शुरू करने पर फैसला लिया जाएगा। रात को बालूगंज-चौड़ा मैदान सड़क धंसने के बाद अब बालूगंज-चक्कर मार्ग को बहाल करने में समय लग सकता है।
लोग बोले, बंद पड़े हैं कलवर्ट जंगल में रिस रहा पानी
लोगों का कहना है कि विधानसभा-बालूगंज सड़क के किनारे पक्की नालियां तो बनी हैं, लेकिन कुछ कलवर्ट बंद हैं। लोगों ने बताया कि हल्की बारिश होने पर भी इस सड़क पर पानी का तालाब बन जाता था। यही पानी लगातार पहाड़ी में रिसता गया जिससे जमीन धंसने लगी है। लोगों ने बताया कि ऊपरी तरफ बने एडवांस्ड स्टडी की सड़क की नालियों से पानी का बहाव पहले दूसरी ओर समरहिल के जंगल में जाता था लेकिन अब सारा पानी इस क्षेत्र में बहता है। पिछले साल भी इस सड़क पर दरारें पड़ी थीं लेकिन निगम ने टारिंग कर उसे बंद कर दिया। पक्के डंगे नहीं लगाए। संस्थान के समीप से बालूगंज को जोड़ने वाली एक छोटी सड़क पर भी दरारें पड़ गई हैं। लोगों का कहना है कि पहाड़ी धंसने से एडवांस्ड स्टडी का परिसर भी खतरे में आ सकता है। लोगों ने जल्द मरम्मत कराने की मांग की है। पुलिस ने इस पूरे हिस्से की बैरिकेडिंग कर दी है। यह सड़क नगर निगम के अधीन है।
कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट का डंगा मंगलवार सुबह गिर गया। अचानक डंगे के गिरने से यहां पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मची रही। इस घटना के बाद यहां सैकडों लोग इकट्ठा हो गए। कोरोनाकाल में मरीजों की सुविधा के लिए यह ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया था। प्लांट के जरिये बच्चों के आईसीयू समेत वार्डों में सेंट्रल सप्लाई दी जाती थी लेकिन बरसात के इस सीजन में डंगे के निचले हिस्से में दस दिनों पहले दरारें आ गई थीं। इसके बाद प्रबंधन हरकत में आया था। प्लांट से ऑक्सीजन की सप्लाई पहले ही बंद कर दी थी। अस्पताल में पहले की तरह ऑक्सीजन सिलिंडर से सप्लाई दी जानें लगी है। मंगलवार सुबह 10:30 बजे के करीब जब यह डंगा ढहा तो इसके बाद परिसर के नीचे की तरफ की सड़क को बंद कर दिया। एसडीएम भानु गुप्ता ने मौके का निरीक्षण किया। अस्पताल प्रबंधन ने प्लांट से एक-एक करके मशीनें और उपकरण निकाल दिए हैं। दोपहर बाद हाइड्रा की मदद से बड़े उपकरण निकाले और दूसरी जगह पर शिफ्ट किए। केएनएच के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुभाष चौहान ने कहा कि डंगा गिरने के बाद ऑक्सीजन प्लांट में लगी मशीनों और अन्य उपकरणों को खोलकर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया है। अब यह प्लांट पूरी तरह सुरक्षित हैं। मरीजों को पहले की तरह ऑक्सीजन गैस सिलिंडर के जरिये सप्लाई दी जा रही है।