{"_id":"5f8859d207a7166d10517f8e","slug":"himachal-news-mid-day-meal-workers-protest-demands-for-salary-hike","type":"story","status":"publish","title_hn":"मिड-डे मील वर्करों ने वेतन बढ़ोतरी, नियमितीकरण मांगा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मिड-डे मील वर्करों ने वेतन बढ़ोतरी, नियमितीकरण मांगा
Thu, 15 Oct 2020 07:47 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Thu, 15 Oct 2020 07:47 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ऑल इंडिया मिड-डे मील वर्कर फेडरेशन संबंधित सीटू के आह्वान पर हिमाचल के कई जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में मिड-डे मील वर्करों ने धरना प्रदर्शन किया। शिमला में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के बाहर राज्यस्तरीय प्रदर्शन हुआ। यूनियन की प्रदेशाध्यक्ष कांता महंत व महासचिव हिमी देवी ने कहा कि केंद्र व प्रदेश सरकार लगातार शोषण कर रही है। उन्हें केवल 2300 रुपये मासिक वेतन दिया जा रहा है।
विज्ञापन
कोई भी छुट्टी नहीं दी जाती है। ईपीएफ व मेडिकल सुविधा नहीं है। खाना बनाने के अलावा डाक, चपरासी, सफाई, झाड़ू, राशन ढुलाई, बैंक व जलवाहक आदि सभी कार्य करवाए जाते हैं। बावजूद इसके उन्हें मल्टी टास्क वर्कर्स की भर्तियों में प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। वर्ष 2013 के 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश के अनुसार नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जा रहा है। उच्च न्यायालय के निर्णयानुसार उन्हें 12 महीने का वेतन नहीं दिया जा रहा है।
विज्ञापन
केवल दस महीने का वेतन दिया जा रहा है। 25 बच्चों से कम संख्या होने पर नौकरी से निकाला जा रहा है। प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में छह हजार सात सौ 40 वर्करों की छंटनी हो चुकी है। अब इनकी संख्या 21 हजार रह गई है। इस योजना में नब्बे प्रतिशत महिलाएं ही कार्य करती हैं। उन्हें प्रसूति अवकाश की सुविधा नहीं है।
विज्ञापन
मांग की कि 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिश अनुसार मिड-डे मील कर्मियों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए व नियमित किया जाए। न्यूनतम वेतन के आधार पर 8250 रुपये वेतन दिया जाए। ईपीएफ, मेडिकल, छुट्टियों आदि सुविधा दी जाए। रिटायरमेंट पर पेंशन व ग्रेच्युटी दी जाए। छह महीने के वेतन सहित प्रसूति अवकाश दिया जाए।
हिमाचल में मिड-डे मील के लिए 25 बच्चों की शर्त हटाई जाए। बारह महीने का वेतन दिया जाए। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, बालकराम, रामप्रकाश, पुष्पा देवी, दिनेश कुमार, शकुंतला देवी, हेमा, हेमलता, जयवंती, सुनील, ध्यान चंद कालटा, सुरजीत, सुमित्रा, जगत राम, निर्मला, लता, आशा, कमला, विद्या चंपा, बिमला, इंद्रा, शांति, मीना, संतोष, मथरा, द्रोपता, कमला, चंद्रकांता आदि मौजूद रहे।