हिमाचल: गुड़िया दुष्कर्म हत्या मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा
जिला शिमला के कोटखाई की एक छात्रा 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में पीड़िता का शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।
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विस्तार
जिला शिमला के 2017 के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में सत्र एवं जिला न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की विशेष अदालत ने दोषी करार अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश को नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या की धाराओं के तहत आजीवन आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गौर हो कि 4 जुलाई, 2017 को दसवीं की छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी और दो दिन बाद छात्रा का शव कोटखाई में तांदी के जंगल में नग्न अवस्था में मिला था।
मामले की जांच कर रही सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के तथ्यों को आधार मानते हुए अदालत ने दोषी को नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में मरते दम तक आजीवन कारावास और हत्या मामले में आजीवन कारावास सहित दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। दोषी को शुक्रवार को विशेष अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया।
अदालत ने दोपहर करीब दो बजे दोषी को सजा सुनाई। इस दौरान नीलू के चेहरे का रंग उड़ गया। अदालत में इस मामले में सरकार द्वारा नीलू को मुहैया करवाए वकील महेंद्र ठाकुर ने नीलू के बचाव पक्ष में केस की पैरवी की। वहीं, सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अमित जिंदाल ने मामले की पैरवी की। अदालत में 29 मई, 2018 को इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई शुरू हुई थी।
मामले की जांच कर रही सीबीआई ने 13 अप्रैल को नीलू को इस मामले में हाटकोटी शिमला से गिरफ्तार किया था। नीलू के खिलाफ 29 मई, 2018 को अदालत में चार्जशीट दर्ज की गई थी। तीन साल तक चली सुनवाई में सीबीआई ने कुल 55 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष में दोषी की ओर से सिर्फ एक गवाह पेश हुआ। बयानों के आधार पर अदालत अंतिम फैसले पर पहुंची। पूरे मामले में आरोपी के खिलाफ परिस्थितिजनक साक्ष्य को ही आधार माना गया है, चूंकि आरोपी को डीएनए सैंपलिंग के आधार पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।
Himachal Pradesh | A Shimla court sentences the 28-year-old convict to life imprisonment in the case of rape and murder of a 16-year minor in the Kotkhai area of Shimla district.
— ANI (@ANI) June 18, 2021
बचाव पक्ष हाईकोर्ट में करेगा फैसले के खिलाफ अपील
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत का फैसला आने के बाद कहा कि फैसले के खिलाफ वह उच्च न्यायालय में अपील करेंगे। उनका कहना है कि मामले में अनिल कुमार के खिलाफ जांच एजेंसी ने सिर्फ परिस्थितिजनक साक्ष्यों के आधार सजा सुनाई है, जबकि दोषी के खिलाफ जांच एजेंसी उसके मौका-ए-वारदात पर मौजूदगी को लेकर कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाई है।
गुड़िया मामले में कब क्या हुआ
6 जुलाई 2017 : कोटखाई के जंगल में गुड़िया का मिला शव
7 जुलाई : पोस्टमार्टम रिपोर्ट से दुष्कर्म का खुलासा
10 जुलाई : सरकार ने एसआईटी की गठित
11 जुलाई : पीड़ित परिवार को पांच लाख मुआवजा
12 जुलाई: सीएम के फेसबुक पेज पर कुछ को आरोपी बता फोटो की वायरल
13 जुलाई : एसआईटी ने 6 लोग गिरफ्तार किए
14 जुलाई : ठियोग थाने पर पथराव, सीबीआई जांच की संस्तुति
17 जुलाई : राजभवन पहुंची भाजपा ने सरकार की बर्खास्तगी की मांग उठाई
18 जुलाई : सरकार का हाईकोर्ट में सीबीआई जांच शुरू करने के लिए आवेदन
19 जुलाई : कोटखाई थाने में एक आरोपी की पुलिस हिरासत में हत्या
23 जुलाई : सीबीआई ने दर्ज किए दो मामले
24 जुलाई : सीबीआई पहुंची शिमला, जांच शुरू
02 अगस्त: हाईकोर्ट में पुलिस ने सौंपी स्टेटस रिपोर्ट
03 अगस्त : कस्टडी में मौत पर पुलिस अफसरों से पूछताछ
14 अगस्त : कोटखाई थाने में तैनात संतरी के बयान
17 अगस्त : सीबीआई को हाईकोर्ट की फटकार, मांगा दो सप्ताह का समय
21 अगस्त : कई रईसजादों के घरों पर सीबीआई के छापे
29 अगस्त : सीबीआई ने आईजी समेत आठ पुलिस वाले गिरफ्तार किए
25 नवंबर: गिरफ्तार पुलिस अफसरों के खिलाफ चार्जशीट
29 मार्च 2018: हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश कर 25 अप्रैल तक मामला सुलझाने का दावा
अप्रैल 2018: सीबीआई ने चिरानी अनिल उर्फ नीलू को गिरफ्तार किया
28 अप्रैल 2021: शिमला की विशेष अदालत ने आरोपी नीलू को दोषी करार दिया
15 जून 2021: अनिल उर्फ नीलू की सजा पर दोनों पक्षों के बीच सजा पर बहस की प्रक्रिया पूरी हुई
18 जून 2021 : अदालत ने दोषी करार दिए नीलू को आजीवन कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई