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हिमाचल: गुड़िया दुष्कर्म हत्या मामले में दोषी को आजीवन कारावास की सजा

Fri, 18 Jun 2021 06:39 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Fri, 18 Jun 2021 06:39 PM IST
सार

जिला शिमला के कोटखाई की एक छात्रा 4 जुलाई, 2017 को लापता हो गई थी। 6 जुलाई को कोटखाई के तांदी के जंगल में पीड़िता का शव मिला। जांच में पाया गया कि छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गई थी।

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Himachal News: life imprisonment to convict in shimla gudiya rape and murder case
दोषी नीलू - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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जिला शिमला के 2017 के बहुचर्चित गुड़िया दुष्कर्म और हत्या मामले में शुक्रवार को जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर चक्कर में सत्र एवं जिला न्यायाधीश राजीव भारद्वाज की विशेष अदालत ने दोषी करार अनिल कुमार उर्फ नीलू उर्फ कमलेश को नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या की धाराओं के तहत आजीवन आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गौर हो कि 4 जुलाई, 2017 को दसवीं की छात्रा स्कूल से लौटते समय लापता हो गई थी और दो दिन बाद छात्रा का शव कोटखाई में तांदी के जंगल में नग्न अवस्था में मिला था।

मामले की जांच कर रही सीबीआई की ओर से दायर चार्जशीट के तथ्यों को आधार मानते हुए अदालत ने दोषी को नाबालिग से दुष्कर्म के जुर्म में मरते दम तक आजीवन कारावास और हत्या मामले में आजीवन कारावास सहित दस हजार रुपये जुर्माना लगाया है। जुर्माना न भरने की सूरत में दोषी को एक साल का अतिरिक्त कारावास काटना होगा। दोषी को शुक्रवार को विशेष अदालत में कड़ी सुरक्षा के बीच पेश किया गया।

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अदालत ने दोपहर करीब दो बजे दोषी को सजा सुनाई। इस दौरान नीलू के चेहरे का रंग उड़ गया। अदालत में इस मामले में सरकार द्वारा नीलू को मुहैया करवाए वकील महेंद्र ठाकुर ने नीलू के बचाव पक्ष में केस की पैरवी की। वहीं, सीबीआई की ओर से अधिवक्ता अमित जिंदाल ने मामले की पैरवी की। अदालत में 29 मई, 2018 को इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई शुरू हुई थी।
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मामले की जांच कर रही सीबीआई ने 13 अप्रैल को नीलू को इस मामले में हाटकोटी शिमला से गिरफ्तार किया था। नीलू के खिलाफ 29 मई, 2018 को अदालत में चार्जशीट दर्ज की गई थी। तीन साल तक चली सुनवाई में सीबीआई ने कुल 55 गवाह पेश किए। बचाव पक्ष में दोषी की ओर से सिर्फ एक गवाह पेश हुआ। बयानों के आधार पर अदालत अंतिम फैसले पर पहुंची। पूरे मामले में आरोपी के खिलाफ परिस्थितिजनक साक्ष्य को ही आधार माना गया है, चूंकि आरोपी को डीएनए सैंपलिंग के आधार पर सीबीआई ने गिरफ्तार किया था।

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