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श्रम कानूनों में बदलाव और किसान विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ प्रदेशभर में प्रदर्शन
Sat, 05 Sep 2020 06:00 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 05 Sep 2020 06:00 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
सीटू और हिमाचल किसानसभा के आह्वान पर केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर व किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदेश के ग्यारह जिलों में शनिवार को प्रदर्शन किए गए और श्रम कानूनों में बदलाव के निर्णय को वापस लेने की मांग की गई। राजधानी शिमला में डीसी ऑफिस के बाहर राज्यस्तरीय प्रदर्शन को हिमाचल किसानसभा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, सीटू प्रदेश उपाध्यक्ष जगत राम, जिला महासचिव अजय दुल्टा, हिमाचल किसान सभा जिलाध्यक्ष सत्यवान पुंडीर, जनवादी महिला समिति की प्रदेशाध्यक्ष डॉ. रीना सिंह तंवर, रेहड़ी फड़ी तहबाजारी यूनियन अध्यक्ष सुरेंद्र बिट्टू, एसटीपी यूनियन अध्यक्ष दलीप सिंह ने संबोधित किया।
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प्रदेशभर में हुए प्रदर्शनों में श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी परिवर्तन की प्रक्रिया पर रोक लगाने, मजदूरों का वेतन 21 हजार रुपये घोषित करने, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को बेचने पर रोक लगाने, किसान विरोधी अध्यादेशों को वापस लेने, मजदूरों को कोरोना काल के पांच महीनों का वेतन देने, उनकी छंटनी पर रोक लगाने, किसानों की फसलों का उचित दाम देने, कर्ज मुक्ति, मनरेगा के तहत दो सौ दिन का रोजगार, कॉरपोरेट खेती पर रोक लगाने, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील और आशा वर्करों को नियमित कर्मचारी घोषित करने, फिक्स टर्म रोजगार पर रोक लगाने, हर व्यक्ति को महीने का दस किलो मुफ्त राशन देने की मांग की गई। सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व हिमाचल किसान सभा प्रदेशाध्यक्ष डॉ कुलदीप सिंह तंवर ने केंद्र और प्रदेश सरकारों को चेताया है कि वह मजदूर व किसान विरोधी कदमों से हाथ पीछे खींचें अन्यथा आंदोलन तेज होगा।
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कोरोना महामारी के इस संकटकाल को भी शासक वर्ग व सरकारें मजदूरों व किसानों का खून चूसने तथा उनके शोषण को तेज करने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं। हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान में श्रम कानूनों में बदलाव इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार कोरोना काल में सभी किसानों का रबी फसल का कर्ज माफ करे और खरीफ फसल के लिए केसीसी जारी करे। किसानों को फसल का सी-2 लागत से 50 फीसदी अधिक दाम दिया जाए। किसानों के लिए ‘वन नेशन, वन मार्केट’ नहीं बल्कि वन नेशन-वन एमएसपी की नीति लागू की जाए। किसानों और आदिवासियों की खेती की जमीन कंपनियों को देने और कॉरपोरेट खेती पर रोक लगाई जाए।
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