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हिमाचल: संगठनात्मक चुनाव पर दो गुटों में बंटी कांग्रेस, केंद्रीय नेतृत्व भी खुश नहीं
Mon, 07 Mar 2022 10:48 AM IST
अरविन्द ठाकुर
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Mon, 07 Mar 2022 10:48 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में वर्ष 2017 में सदस्यता अभियान चला था। उस वक्त भी हिमाचल, गुजरात और कई अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक चुनाव स्थगित किए गए थे।
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केहर सिंह खाची, दीपा दासमुंशी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
संगठनात्मक चुनाव पर हिमाचल प्रदेश कांग्रेस दो गुटों में बंट गई है। एक खेमा इसके पक्ष में है तो दूसरा विधानसभा और नगर निगम चुनाव की आड़ में चुनाव टालना चाह रहा है। सदस्यता अभियान में गुटबाजी से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व भी खुश नहीं है। कांग्रेस की प्रदेश चुनाव अधिकारी दीपा दासमुंशी ने भी दो दिन पहले जिला शिमला कांग्रेस की बैठक में इस मामले में मतभेद और ढील पर कुछ नेताओं को फटकार लगाई है।
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हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में वर्ष 2017 में सदस्यता अभियान चला था। उस वक्त भी हिमाचल, गुजरात और कई अन्य राज्यों में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठनात्मक चुनाव स्थगित किए गए थे। तब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू थे। सुक्खू के बाद जनवरी 2019 में कुलदीप सिंह राठौर प्रदेशाध्यक्ष बने। इंदिरा गांधी की जयंती पर 19 नवंबर 2021 को हिमाचल में दोबारा सदस्यता अभियान शुरू हुआ। पूर्व सांसद दीपा दासमुंशी को प्रदेश चुनाव अधिकारी और शमीमा रैना को सहायक चुनाव अधिकारी बनाया गया।
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सदस्यता अभियान पर दीपा सिरमौर, सोलन, हमीरपुर और ऊना में बैठकें ले चुकी हैं, जिसमें वह सख्ती दिखा चुकी हैं। दूसरे दौर में उन्होंने दो दिन पहले शुक्रवार को शिमला में भी बैठक ली। शनिवार को बिलासपुर और रविवार को मंडी में भी जिला कांग्रेस कमेटी की बैठक ली। सदस्यता अभियान के बाद पहले बूथ स्तर के चुनाव होंगे। इसके बाद ब्लॉक, जिला और प्रदेश स्तर की कार्यकारिणी का चुनाव होगा। जिस पद के लिए सर्वसम्मति बनेगी, वहां चुनाव नहीं होंगे।
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बैठक में मैंने साफ तौर पर कहा है कि संगठनात्मक चुनाव होने चाहिए। मैं खुद दस साल तक चुना हुआ जिला अध्यक्ष रहा हूं। मनोनीत के बजाय कांग्रेस की कार्यकारिणी चुनी हुई होनी चाहिए। इससे संगठन मजबूत होता है। मैं यह बात प्रदेश चुनाव अधिकारी दीपा दासमुंशी, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर और अन्य लोगों के समक्ष भी रख चुका हूं। - केहर सिंह खाची, राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
विधानसभा और नगर निगम के चुनाव इसी साल हैं। कांग्रेस के कुछ नेताओं की ओर से सुझाव आए हैं कि सदस्यता अभियान और संगठनात्मक चुनाव आगे टाले जाएं। अगर न हों तो अच्छा होगा। मगर यह संभव नहीं होगा। पार्टी का अलग संविधान है। इन दोनों का संगठनात्मक चुनाव से कोई संबंध नहीं है। - दीपा दासमुंशी, राज्य चुनाव अधिकारी, प्रदेश कांग्रेस कमेटी