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जांच में खुलासा: पेइंग गेस्ट बने नशे के अड्डे, नियंत्रण में लेने की तैयारी में सरकार

Sat, 02 Apr 2022 11:15 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Sat, 02 Apr 2022 11:15 AM IST
सार

आयोग ने अपने स्तर पर पीजी की जांच करवाई है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कई पीजी में नशीले पदार्थों का खुले तौर पर इस्तेमाल होता हुआ देखा गया है। इसके अलावा कई अन्य आपत्तिजनक गतिविधियां भी धड़ल्ले से पीजी में होती हुई देखी गई हैं।  

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Himachal News: complaint against paying guest in himachal pradesh
निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नशे का अड्डे बन रहे पेइंग गेस्ट (पीजी) को सरकार नियंत्रण में लेने की तैयारी में है। सिर्फ नगर निकायों की मंजूरी के बाद निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के पास कई पीजी खुले हैं। हॉस्टलों में कड़े नियमों के चलते पीजी को विद्यार्थी तवज्जो देते हैं। सरकार की ओर से इनको लेकर अभी तक कोई नीति नहीं बनाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग ने कुछ शिकायतों पर कई पीजी की जांच की है।

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इसमें पीजी के नशे का अड्डे बनने के कई सुबूत मिले हैं। आयोग ने इसको लेकर मुख्य सचिव राम सुभग सिंह को पत्र लिखा है। आयोग के इस पत्र के बाद सरकार के स्तर पर पीजी को नियंत्रित करने को लेकर मंथन शुरू हो गया है। मुख्य सचिव की ओर से शिक्षा, शहरी विकास और पुलिस विभाग से इस बाबत रिपोर्ट मांगी गई है। हॉस्टलों में रहने वाले विद्यार्थियों पर वार्डन की कड़ी नजर रहती हैं। यहां आने-जाने वालों की संख्या सीमित होती है।
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ऐसे में कई विद्यार्थी बंधनों में रहने की जगह पीजी को तवज्जो देते हैं। कई बार हॉस्टलों में प्रवेश नहीं मिलने के कारण भी विद्यार्थियों को पीजी में रहना पड़ता है। बीते दिनों निजी शिक्षण संस्थान विनियामक आयोग को प्रदेश के कई क्षेत्रों में खुले पेइंग गेस्ट्स को लेकर शिकायतें मिलीं। आयोग ने अपने स्तर पर इन पीजी की जांच करवाई है। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। कई पीजी में नशीले पदार्थों का खुले तौर पर इस्तेमाल होता हुआ देखा गया है।
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इसके अलावा कई अन्य आपत्तिजनक गतिविधियां भी धड़ल्ले से पीजी में होती हुई देखी गई हैं। आयोग के अध्यक्ष मेजर जनरल सेवानिवृत्त अतुल कौशिक ने इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव को पत्र भेजा है। उन्होंने पीजी पर समय रहते नकेल कसने की सिफारिश करते हुए पीजी के संचालन के लिए नीति बनाने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को गलत प्रवृत्ति में जाने से रोकने के लिए समय रहते हमें कदम उठाने होंगे।

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