Himachal: सुक्खू बोले- न जाएगी कोई नाैकरी, न होंगे पद खत्म; आरडीजी हमारा अधिकार, कानूनी लड़ाई लड़ेंगे
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में मीडिया से कहा कि जितना राजस्व हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से आता था, उससे ज्यादा कमाएंगे।
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हिमाचल प्रदेश सरकार किसी की नौकरी खत्म नहीं करेगी और न पदों को खत्म करेगी। युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। नई दिल्ली से लाैटने के बाद बुधवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में मीडिया से कहा कि जितना राजस्व हिमाचल प्रदेश को राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) से आता था, उससे ज्यादा कमाएंगे। सीएम ने कहा कि उन्होंने एक जनवरी 2023 से ही तैयारी कर ली थी। सभी ने उनके इस बयान को सुना होगा कि प्रदेश के हालात श्रीलंका जैसे होने जा रहे हैं। उसी समय से कड़े फैसले लेने शुरू किए। एक प्रश्न के उत्तर में सीएम ने कहा कि आरडीजी हिमाचल का अधिकार है। इसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। पर अभी तो चाहते हैं कि भाजपा के सभी सांसद प्रधानमंत्री से मिलें। सरकार भी प्रधानमंत्री से मिलने का समय मांगेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें निशाना बनाने के बजाय विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष राजीव बिंदल आरडीजी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री से मिलें। सुक्खू ने कहा कि भाजपा नेताओं को आपसी राजनीति छोड़कर राज्य के हित में आगे आना चाहिए।
नई दिल्ली में मुलाकात के दाैरान पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी आरडीजी के मुद्दे को उचित मंच पर रखने का आश्वासन दिया। सीएम सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था को 90 हजार करोड़ रुपये की पारिस्थितिक सेवाएं दे रहा है। यह खुलासा भारतीय वन प्रबंधन संस्थान की रिपोर्ट में हुआ है। प्रदेश के संसाधनों पर उनका अधिकार है और वे इसके लिए पूरी मजबूती से लड़ेंगे। पी. चिदंबरम ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत राज्यों की आय और व्यय की स्थिति को ध्यान में रखने का प्रावधान है। सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को पांच वर्षों में 70,000 करोड़ रुपये मिले। यदि उनमें से 40,000 करोड़ कर्ज चुकाने में लगाते, तो आज प्रदेश कर्ज के जाल में नहीं फंसा होता। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को बताना चाहिए कि 70,000 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए और किसे इसका लाभ मिला। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने आवश्यकता के अनुसार ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए हैं, जो पिछली भाजपा सरकार की तुलना में आधे हैं।
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