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Shimla News: कैबिनेट मंत्री जगत नेगी बोले- प्रदेश में 1500 स्थानों में रहती है भूस्खलन की समस्या
Fri, 20 Jan 2023 06:22 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Fri, 20 Jan 2023 06:22 PM IST
सार
कैबिनेट मंत्री जगत नेगी ने कहा कि इस समय जरूरत आधुनिक तकनीक अपनाकर सुरंग बनाने की है। जैसे मेट्रो रेल के लिए सुरंग बनाई जाती है, उसी तकनीक से बिजली प्रोजेक्टों की सुरंग बनाई जाएं।
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कैबिनेट मंत्री जगत नेगी- फाइल फोटो
विस्तार
प्रदेश के राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के जोशीमठ में भूमि धंसाव सिर्फ पनबिजली परियोजना की सुरंग बनने के कारण नहीं हुआ है। प्रदेश में 1,500 ऐसे स्थान हैं, जहां भूस्खलन की समस्या रहती है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में पनबिजली परियोजनाओं से ही भू धंसाव नहीं हो रहा है। भूमि धंसाव के पीछे कई कारण सामने आए हैं।
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नेगी ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि वर्ष 1976 में भी जोशीमठ में भूमि धंसाव की चेतावनी दी गई थी। किन्नौर में 1995 में नाथपा झाकड़ी सुरंग बनाने के बाद पहाड़ पर बसे गांवों में लोगों के मकानों पर दरारें आई थीं। उस समय बिजली परियोजना प्रबंधन ने बंगलूरू के विशेषज्ञों से रिपोर्ट तैयार करवाई थी। इसमें पाया कि सुरंग से कोई नुकसान नहीं हो रहा।
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इसके बाद दोबारा उन विशेषज्ञों से अध्ययन कराया तो स्पष्ट हुआ कि सुरंग बनाने में इस्तेमाल विस्फोट से मकानों में दरारें पड़ीं। इसके बाद प्रभावित लोगों को 3.5 करोड़ का मुआवजा मिला। इस समय जरूरत आधुनिक तकनीक अपनाकर सुरंग बनाने की है। जैसे मेट्रो रेल के लिए सुरंग बनाई जाती है, उसी तकनीक से बिजली प्रोजेक्टों की सुरंग बनाई जाएं।
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सीमा क्षेत्र के विकास पर विशेष ध्यान देने की जरूरत
जगत नेगी ने कहा कि प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों तक सड़कों का विस्तर जरूरी है। देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा खासकर चीन सीमा के पास देश के गांवों से आगे भी सड़कों का निर्माण जरूरी है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति में वाइव्रेंट विलेज विकसित करने का लाभ सीमा के गांवों में बसे लोगों को मिलेगा।
किन्नौर के लिए वर्षों पहले बने वैकल्पिक सड़कों को चौड़ा कर वाहनों की आवाजाही के लिए तैयार किया जाए। विकट परिस्थिति में यह वैकल्पिक मार्ग सीमा तक पहुंचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। उनका कहना है कि पहले जनजातीय क्षेत्र के विकास के लिए अलग से फंड आता रहा है। इससे कई प्रोजेक्टों का काम शुरू किया गया और अब धनराशि न आने से ये सभी अधर में पड़े हैं।