मंत्री पद के लिए कांगड़ा और मंडी जिलों की दावेदारी और मजबूत
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एक साल के अंदर दूसरे मंत्री का पद छिनने से कांगड़ा जिला को बेशक बड़ा झटका लगा हो, मगर इस जिले की इससे नया मंत्री बनाए जाने की दावेदारी और मजबूत हो गई है। हिमाचल में मौजूदा हालात में मंत्री पद के लिए कांगड़ा की ही नहीं, बल्कि मंडी जिला की भी दावेदारी और ठोस हो गई है। कांगड़ा जिले से दो मंत्रियों की कुर्सियां जा चुकी हैं, जबकि मंडी में भी जयराम कैबिनेट के एक मंत्री ने इस्तीफा दिया था। कांगड़ा जिले ने दो मंत्री खोकर एक विधानसभा अध्यक्ष पाया है। ऐसे में यहां से मंत्री बनाए जाने की संभावना बरकरार है।
मंडी को स्पीकर मिल जाता है तो फिर यहां से मंत्री बनने की संभावना कम थी, मगर अब यह बढ़ गई है। हिमाचल में क्षेत्रीय, जातीय समेत तमाम समीकरणों को साधकर ही नए मंत्री बनाए जाएंगे। मंत्री पद के दावेदारों की सियासी सोच भी देखी जाएगी कि उनकी आस्था किधर है। जयराम को अपनी कैबिनेट में चुस्त, समझदार और विश्वासपात्र मंत्रियों की जरूरत रहेगी, जो शत-प्रतिशत उनके मनोनुकूल चलें।
राष्ट्रीय सियासत में इस वक्त हिमाचल मूल के नेता एवं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ताकतवर स्थिति में हैं। सरकार-संगठन में उनका बराबर हस्तक्षेप है। मंत्री विपिन परमार को विधानसभा अध्यक्ष बनाने के लिए भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन्हीं की राय ली है। इसलिए यह भी तय है कि नए मंत्रिमंडल विस्तार में जगत प्रकाश नड्डा का भी दखल रहेगा।
मजाक में पठानिया और चौधरी को अग्रिम बधाई देते रहे विपक्षी विधायक
मंगलवार को नूरपुर के भाजपा विधायक राकेश पठानिया और पांवटा के भाजपा विधायक सुखराम चौधरी को भी विपक्षी विधायक मजाक में मंत्री बनाए जाने की अग्रिम बधाई देते रहे। सिरमौर जिले के पांवटा के भाजपा विधायक सुखराम चौधरी भी वरिष्ठ विधायक हैं।
उनकी भी मंत्री पद की दावेदारी है। हालांकि, उनके साथ के हलके नाहन से डॉ. राजीव बिंदल के भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने से उनकी दावेदारी की मजबूती पर भी असर पड़ा है। इनके अलावा मंडी से मंत्री पद के दावेदार कर्नल इंद्र सिंह माने जा रहे हैं। पहले कर्नल इंद्र सिंह को विधानसभा अध्यक्ष बनाए जाने की भी चर्चा थी।