मंडी हादसा ग्राउंड जीरो: पहाड़ से उतरा सैलाब, नींद में मलबे में दफन हुए 48 लोग
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हिमाचल के मंडी जिले के कोटरोपी में नेशनल हाईवे पर रात करीब एक बजे कोटरोपी नाले में बसें बहने की खबर आग की तरह फैल गई। प्रशासन और राहत दल के पहुंचने से पहले रात के अंधेरे में लोग यात्रियों को बचाने में जुट गए।
पुल के पास फंसी पठानकोट डिपो की मनाली-कटड़ा वोल्वो बस में फंसी पांच सवारियों को बमुश्किल निकाला। साथ ही एक आल्टो चालक को भी बचाया। इसी बीच पहाड़ी गिरने का भयावह मंजर जारी रहा।
डीसी मंडी सवा दो बजे के करीब घटनास्थल पर पहुंचे। करीब छह जेसीबी और एंबुलेंस सड़क के दोनो छोर से बचाव कार्य में लगा दी गईं।
लेकिन चंबा की पूरी की पूरी बस मलबे में दबने का शायद किसी को ही पता हो। जब कटड़ा बस के घायलों को होश आया तो बताया कि एक बस पुल समेत नीचे बह गई है। इसके बाद शुरू हुआ मलबे मे दबी बस तक पहुंचने की कोशिश।
जब एकाएक मलबा गिरा तो मची भगदड़
करीब नौ बजे मलबे से बस का एक हिस्सा दिखा। भारी कीचड़ होने के कारण बेलचे और गैंती से बस को तलाशना शुरू किया गया। लेकिन बड़े-बड़े पेड़ों के नीचे दबे होने के कारण रेस्क्यू में दिक्कत आई। सुबह सवा नो बजे आर्मी की 33 बिग्रेड, 4/9 जीआर ने मोरचा संभाला। एक तरफ एनडीआरएफ भी राहत कार्य में जुट गई।
लोकल लोग भी बचाव में जुट गए। तभी 10.30 एकाएक आवाज आई की भागो मलबा आया। भगदड़ मच गई। सैन्य जवानों से लेकर आम लोग इधर-उधर भागने लगे। तभी प्रशासन ने अनाउंस किया कि भागो नहीं। मलबा आने का खतरा है, स्पाट खाली करदो। करीब एक घंटे बाद रेस्क्यू शुरू हुआ और लाशों को निकालने का सिलसिला भी।
बस के अंदर फंसी मिलीं 20 लाशें
लाशें निकालने का मंजर दिल दहला देने वाला था। किसी की बाजू, किसी का सिर और किसी की कोहली मलबे में दबी दिख रही थी। लेकिन गेंती, रस्सियों और फावड़े से इन लाशों को निकालना मुश्कि ल हो रहा था।
इसके बावजूद सेना के जवान और राहत कार्य में लगे लोग इस लाशों को बेहद ध्यान से नाजुक हाथों से निकाल रहे थे। मंजर भयावह था। इसी बीच पौने तीन बजे कोटरोपी गांव से रास्ता निकालते हुए जेसीबी स्पाट तक पहुंची। इसके बाद युद्धस्तर पर काम शुरू हुआ और शाम छह बजे तक चंबा बस में दबी 20 लाशें निकाली गईं।
पांच सौ मीटर का सफर खतरों से भरा
सुबह पौ फटते ही पुलिस और प्रशासन मलबे के ऊपर चलते हुए करीब पांच सौ मीटर नीचे पहुंचा। नीचे पहुंचना खतरे से खाली नहीं था। बार-बार बोला जा रहा था कि नाले के रास्ते मत जाओ, मलबा आया तो जान जाएगी। एक विकल्प रास्ता गांव से होकर जाता है।
लिहाजा उस रास्ते को अपनाया गया। लेकिन वहां भी दरकी पहाड़ी से जाना मुश्किल हुआ। काफी मशक्कत के बाद स्पाट तक पहुंचे लेकिन भयावह, डरावने और दिल दहलाने वाले मलबे के मंजर में लाशों को तलाशने की जद्दोजहद झकझोर देने वाली थी।
कब क्या हुआ
नौ बजे तक बस का जरा सा हिस्सा आया नजर
10.20 के बाद सेना ने निकालना शुरू किए शव
10.37 पर पहाड़ी गिरने की आशंका मची भगदड़
11.40 पर फिर से शुरू हुआ रेस्कयू आपरेशन
जवानों के लिए घर से बनाकर लाए खाना
कोटरोपी हादसे के बाद स्थानीय लोग भी मदद को दौड़े। सेना के 200जवानों के लिए ग्राम पंचायत उरला के विभिन्न महिला मंडल की सदस्यों ने स्पॉट पर भोजन की व्यवस्था की।
गुरूद्वारा कमेटी मंडी, हिमरी गंगा टैक्सी यूनियन पधर, श्री साईं राम मॉडल पब्लिक स्कूल कुन्नू, व्यापार मंडल पधर, समाज सेवी काहन सिंह ठाकुर, सेवकराम यादव, महेंद्र गुलेरिया, घमंडा राम ठाकुर, एनसीसी, एनएसएस के स्कूली बच्चों, संत निरंकारी मंडल सेवादल कुन्नू ब्रांच के कार्यकर्ताओं ने भोजन और जलपान की व्यवस्था की।
पहाड़ी के नीचे गांव की लाइन टूट गई। ग्रामीणों ने आईपीएच विभाग की मदद से नई लाइन बिछाकर सप्लाई बहाल की। महिलाओं ने भी हाथ में बेलचा और गैंती लेकर मलबे में दबे शवों को ढूंढने में मदद की।