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Himachal News: हिमाचल में सरकारी जमीन की सुरक्षा के लिए नई गाइडलाइन, हर भूखंड का डिजिटल रिकॉर्ड होगा तैयार
Wed, 01 Jul 2026 11:49 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Wed, 01 Jul 2026 11:49 AM IST
सार
हिमाचल सरकार ने सरकारी भूमि के बेहतर प्रबंधन के लिए नई लैंड एसेट मैनेजमेंट गाइडलाइंस लागू की हैं। इसके तहत हर सरकारी भूखंड का अलग रिकॉर्ड, डिजिटल डाटाबेस, समय पर म्यूटेशन, वार्षिक निरीक्षण और अतिक्रमण रोकने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। सभी विभागों को निर्देशों का पालन करने को कहा गया है।
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हिमाचल प्रदेश सरकार।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सरकारी शिक्षण संस्थानों और विभागों में सरकारी भूमि के बेहतर संरक्षण, प्रबंधन और निगरानी के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों में सभी सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों सहित विभागीय कार्यालयों को अपनी भूमि का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार कर नियमित रूप से अपडेट करना होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना और राजस्व अभिलेखों में विसंगतियों को दूर करना है। यह भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए सटीक भूमि संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराएगा।
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प्रत्येक सरकारी भूमि के लिए अलग से लैंड रिकॉर्ड फाइल तैयार की जाएगी। इसमें जमाबंदी, ततीमा, म्यूटेशन, राजस्व अभिलेख, स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज, सीमांकन और नक्शे शामिल किए जाएंगे। सभी रिकॉर्ड का भौतिक और डिजिटल दोनों स्वरूप में रखरखाव सुनिश्चित किया जाएगा। दिशा-निर्देशों में सरकारी भूमि को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करने का प्रावधान है। डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने और जीआईएस आधारित मैपिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे भविष्य में सरकारी भूमि का ऑनलाइन सत्यापन और निगरानी आसान हो सकेगी
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विभागीय स्तर पर भूमि से जुड़े सभी रजिस्टरों का नियमित रखरखाव अनिवार्य किया गया है। इन्हें समय-समय पर अद्यतन करना भी जरूरी होगा। इसके साथ ही सरकारी भूमि को चार श्रेणियों में बांटा जाएगा। जिन भूमि अभिलेखों में त्रुटियां या राजस्व संबंधी विसंगतियां होंगी, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा। यह कार्य संबंधित राजस्व अधिकारियों के माध्यम से होगा। अतिक्रमण या विवादित भूमि की विशेष निगरानी की जाएगी। निदेशालय स्तर पर प्रत्येक वर्ष स्टेट लैंड एसेट मैनेजमेंट रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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इस रिपोर्ट में भूमि की वर्तमान स्थिति, लंबित म्यूटेशन और राजस्व विवादों का उल्लेख होगा। इसमें अतिक्रमण के मामले और आवश्यक सुधारात्मक उपाय भी शामिल होंगे। प्रधान सचिव अभिषेक जैन ने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी भूमि पर अतिक्रमण रोकना और राजस्व अभिलेखों में विसंगतियों को दूर करना है। यह भविष्य की विकास परियोजनाओं के लिए सटीक भूमि संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराएगा। वहीं, आईटी मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन से सरकारी भूमि का संरक्षण मजबूत होगा। रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी बनेंगे और भूमि प्रबंधन अधिक व्यवस्थित एवं जवाबदेह हो सकेगा।