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हिमाचल: बिजली परियोजनाओं की कंपनियां अब मनमाने ढंग से नहीं निकाल सकेंगी नदी से रेत-बजरी, सरकार सख्त
Tue, 22 Sep 2026 11:32 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:32 AM IST
सार
हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी कंपनियों की ओर से नदी से रेत-बजरी निकालने की व्यवस्था पर सरकार सख्ती करने की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत बिजली परियोजना संचालक अपने स्तर पर नदी से खनन सामग्री निकालने के लिए टेंडर जारी नहीं कर सकेंगे। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : AI
विस्तार
हिमाचल प्रदेश में जलविद्युत परियोजनाओं के नाम पर नदियों से रेत-बजरी निकालने को लेकर सरकार अब व्यवस्था में बदलाव की तैयारी कर रही है। सरकार का रुख है कि बिजली परियोजनाओं के लिए कंपनियों को जमीन विभिन्न शर्तों के तहत उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन इससे उन्हें नदी से रेत-बजरी या अन्य खनन सामग्री निकालने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता। मौजूदा व्यवस्था में कुछ बिजली परियोजनाओं के अधिकारी अपने स्तर पर परियोजना क्षेत्र में उपलब्ध रेत-बजरी निकालने के लिए निविदाएं जारी करते रहे हैं। सरकार अब इस प्रक्रिया को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठा रही है।
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परियोजना कंपनियां अपने स्तर पर नहीं कर सकेंगी टेंडर
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार निजी बिजली कंपनियां या परियोजना संचालक सरकार की अनुमति के बिना नदी से रेत-बजरी निकालने के लिए अपने स्तर पर टेंडर जारी नहीं कर सकेंगे। यदि कोई परियोजना प्रबंधन निर्धारित अनुमति के बिना ऐसी निविदा प्रक्रिया शुरू करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। सरकार की ओर से नदी से निकलने वाली खनन सामग्री पर राज्य के अधिकार को प्रमुखता देने की बात कही गई है। नई व्यवस्था में नदी से निकलने वाली सामग्री की निकासी के लिए सरकार की ओर से ही निविदा प्रक्रिया अपनाए जाने की बात सामने आई है।
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प्राकृतिक संसाधनों पर राज्य के अधिकार की बात
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू विधानसभा में नदियों से निकलने वाली खनन सामग्री और ड्रेजिंग के मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट कर चुके हैं। सरकार की ओर से हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों और राज्य के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। यह मुद्दा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब हिमाचल में जलविद्युत क्षेत्र में निजी, केंद्रीय और अन्य संस्थाओं की कई परियोजनाएं संचालित हैं या निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार राज्य में बड़ी संख्या में जलविद्युत परियोजनाएं अभी विभिन्न स्वीकृतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में हैं।
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सतलुज और चिनाब बेसिन में बड़ी जलविद्युत परियोजनाएं
हिमाचल में सतलुज और चिनाब नदी बेसिन जलविद्युत परियोजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सतलुज बेसिन में नाथपा झाकड़ी, रामपुर, कोल डैम, करछम-वांगतू, किन्नौर इंटीग्रेटेड काशांग, शोंगटोंग-करछम, लुहरी स्टेज-I और सुन्नी डैम जैसी परियोजनाएं हैं। सुन्नी डैम परियोजना 382 मेगावाट क्षमता की है और इसके लिए शिमला और मंडी जिलों के विभिन्न गांवों में निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर ऊर्जा विभाग अधिसूचना जारी कर चुका है।
वहीं चिनाब बेसिन में भी कई जलविद्युत परियोजनाएं संचालित या प्रस्तावित हैं। प्रदेश में जलविद्युत विकास का बड़ा हिस्सा सतलुज और चिनाब समेत प्रमुख नदी बेसिनों से जुड़ा हुआ है। ऊर्जा विभाग के अनुसार हिमाचल में जलविद्युत क्षमता के विकास में निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रेत-बजरी निकासी पर अब सरकार की नजर
नई व्यवस्था लागू होने पर परियोजना क्षेत्रों में नदी से निकलने वाली रेत-बजरी की निकासी पर सरकारी निगरानी बढ़ सकती है। इससे यह तय करने की कोशिश होगी कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित नियमों और सरकारी प्रक्रिया के तहत ही हो। फिलहाल सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। आगे नियमों और निविदा प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
हिमाचल में सतलुज और चिनाब नदी बेसिन जलविद्युत परियोजनाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। सतलुज बेसिन में नाथपा झाकड़ी, रामपुर, कोल डैम, करछम-वांगतू, किन्नौर इंटीग्रेटेड काशांग, शोंगटोंग-करछम, लुहरी स्टेज-I और सुन्नी डैम जैसी परियोजनाएं हैं। सुन्नी डैम परियोजना 382 मेगावाट क्षमता की है और इसके लिए शिमला और मंडी जिलों के विभिन्न गांवों में निजी भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर ऊर्जा विभाग अधिसूचना जारी कर चुका है।
वहीं चिनाब बेसिन में भी कई जलविद्युत परियोजनाएं संचालित या प्रस्तावित हैं। प्रदेश में जलविद्युत विकास का बड़ा हिस्सा सतलुज और चिनाब समेत प्रमुख नदी बेसिनों से जुड़ा हुआ है। ऊर्जा विभाग के अनुसार हिमाचल में जलविद्युत क्षमता के विकास में निजी क्षेत्र की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
रेत-बजरी निकासी पर अब सरकार की नजर
नई व्यवस्था लागू होने पर परियोजना क्षेत्रों में नदी से निकलने वाली रेत-बजरी की निकासी पर सरकारी निगरानी बढ़ सकती है। इससे यह तय करने की कोशिश होगी कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग निर्धारित नियमों और सरकारी प्रक्रिया के तहत ही हो। फिलहाल सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। आगे नियमों और निविदा प्रक्रिया को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।