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HP High Court: फोरलेन बहाली के लिए उठाए गए कदमों की हिमाचल हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी
Fri, 25 Aug 2023 06:06 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 25 Aug 2023 06:06 PM IST
सार
प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे के फोरलेन की बहाली के लिए परिवहन मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की है। अदालत ने भारत के सॉलिसिटर जनरल को इस संबंध में शपथपत्र दायर करने के आदेश दिए हैं।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे के फोरलेन की बहाली के लिए परिवहन मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की है। अदालत ने भारत के सॉलिसिटर जनरल को इस संबंध में शपथपत्र दायर करने के आदेश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 4 सितंबर को निर्धारित की है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मैहता वर्चुअल माध्यम से अदालत के समक्ष पेश हुए। उन्होंने परिवहन मंत्रालय की ओर से शपथपत्र दायर करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की।
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अदालत ने हिमाचल में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचआई) के अवैज्ञानिक तरीके से सुरंगें और राजमार्ग बनाने पर अदालत ने संज्ञान लिया है। हाल ही में भारी बारिश के शिकार हुए हिमाचल के राजमार्ग, खासकर चंडीगढ़ से शिमला और मनाली राजमार्गों को हुए नुकसान पर अदालत ने जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने विशेष रूप से चंडीगढ़-शिमला और चंडीगढ़-मनाली राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूमि के कटाव से बाधित मार्गों को बहाल करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी तलब की है।
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बता दें कि इंजीनियरिंग के क्षेत्र में 45 वर्ष के अनुभव वाले इंजीनियर की शिकायत पर अदालत ने संज्ञान लिया है। श्यामकांत धर्माधिकारी की ओर से लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि पहाड़ों के कटान से पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। प्रदेश में त्रुटिपूर्ण इंजीनियरिंग से बनाई जा रही भूमिगत सुरंगें, सड़कें और पुलों से पहाड़ों का अनियोजित उत्खनन किया जा रहा है। सड़कों में ढलान और अवैज्ञानिक तरीके से पुल और सुरंगों का निर्माण किया जाना नुकसान का कारण बनता है। अदालत को बताया गया कि हालांकि इंजीनियरिंग के बिना राष्ट्र निर्माण की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।
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आज के जमाने में इंजीनियरिंग और वास्तु कला की सख्त जरूरत है, लेकिन यदि इंजीनियरिंग और वास्तु कला में जरा सी भी त्रुटि पाई जाती है तो हजारों मासूमों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है। तकनीक की कमी और पुराने उपयोग के कारण सड़क की रिटेनिंग दीवारें कमजोर हैं। जल निकासी के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं है। चिंता का विषय है कि तीन मीटर सड़क के दोनों तरफ की जमीन अतिरिक्त रूप से अधिग्रहीत की गई है। जबकि शहरों और गाँवों में सर्विस लेन नहीं हैं जिससे आए दिन दुर्घटनाओं का खतरा रहता है और कारण भी बनते हैं। व्यापक वनों की कटाई के कारण मिट्टी का कटाव हुआ है जो लगातार भूस्खलन आदि का कारण बन रहा है।