हिमाचल माैसम: भारी बारिश ने बरपाया कहर; गोशाला पर चट्टान गिरने से गाय की माैत, प्रदेश में 117 सड़कें बाधित
अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। बिलासपुर में पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से गोशाला में बंधी गाय की माैत हो गई। भारी बारिश से नेशनल हाईवे 305 को भी काफी नुकसान पहुंचा है।
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माैसम विभाग के अलर्ट के बीच हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश ने कहर बरपाया है। भूस्खलन से प्रदेश में बुधवार शाम तक 117 सड़कें बाधित रहीं। इसके अतिरिक्त 141 बिजली ट्रांसफार्मर व 51 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हैं। बिलासपुर में पहाड़ी से गिरी चट्टान की चपेट में आने से गोशाला में बंधी गाय की माैत हो गई। भारी बारिश से नेशनल हाईवे 305 को भी काफी नुकसान पहुंचा है। नाहन-ददाहू सड़क पर नेहली के पास भूस्खलन हो गया। बीते 24 घंटों के दाैरान नयना देवी में 186.6, मलरावं 140.0, कसौली 102.0, घाघस 99.0, नगरोटा सूरियां 98.2, ब्राह्मणी 90.4, स्लापड़ 81.2, काहू 77.6, शिमला 42.8, धर्मशाला 32.2, नाहन 58.8, कांगड़ा 69.0, बिलासपुर 64.0, सराहन 28.7 व नेरी में 39.0 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई।
नलवाड़ में पहाड़ी से गिरा भारी भरकम पत्थर, गाय की मौत
बिलासपुर जिले ग्राम पंचायत जुखाला के नलवाड़ गांव में देर रात पहाड़ी से भारी भरकम पत्थर गिरने से एक गाय की मौत हो गई, जबकि बछड़ी घायल हो गई। पत्थर की चपेट में आने से टोका मशीन और उसकी मोटर भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्राम पंचायत जुखाला की उपप्रधान रूपा शर्मा ने बताया कि मंगलवार रात को हुई भारी बारिश के दौरान रात करीब 11:30 से 12:00 बजे के बीच नलवाड़ गांव में बड़ी पहाड़ी से अचानक भारी पत्थर नीचे आ गिरा। नीचे आते समय पत्थर दो-तीन पेड़ों से टकराया, जिससे उसकी रफ्तार कुछ कम हुई। इसके बावजूद पत्थर ने वहां लगी टोका मशीन को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया और उसकी मोटर भी टूट गई। पत्थर की चपेट में आने से मौके पर बंधी गाय की दबकर मौत हो गई। वहीं दूसरे पशुओं की टांगों में चोट आई है। घटना का पता चलते ही आसपास के परिवार मौके पर पहुंचे और पशुओं को सुरक्षित निकालने में जुट गए। पशु शाला में करीब 8-10 भैंसें भी मौजूद थीं। ग्रामीणों ने उन्हें किसी तरह बाहर निकाला और दूसरे परिवार की जगह पर बांधा। उन्होंने बताया कि फिलहाल पशुओं के लिए वहां तिरपाल समेत अन्य जरूरी व्यवस्था नहीं है। ऐसे में प्रशासन से प्रभावित परिवारों को तत्काल तिरपाल और आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। रूपा शर्मा ने कहा कि पहाड़ी से अभी और पत्थर गिरने की आशंका बनी हुई है। नलवाड़ में पहाड़ी के नीचे रह रहे चार-पांच परिवारों को खतरा है। बारिश बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने डीसी और प्रशासन से मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने और परिवारों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
भूस्खलन से नेशनल हाईवे 305 कईं जगहों पर बंद
मंगलवार रात को हुई भारी बारिश से नेशनल हाईवे 305 को काफी नुकसान पहुंचा है। कईं जगहों पर भूस्खलन और हाईवे के क्षतिग्रस्त होन से यातायात ठप पड़ा है। इस कारण आनी विधानसभा का जिला मुख्यालय कुल्लू से सीधा संपर्क कट गया है। हाईवे को कंडूगाड़ और कमांद के पास काफी क्षति पहुंची है। इसके अलावा खनाग में भी जगह जगह हाईवे अवरुद्ध है। हाईवे पर कईं वाहन फंसे हुए हैं। प्रशासन हाईवे की बहाली के कार्य में जुटा हुआ है। हालांकि, हाईवे का अभी बहाल करने में लंबा समय लग सकता है।
भूस्खलन से नेहली के पास नाहन-ददाहू मार्ग बाधित
भारी बारिश के चलते नाहन-ददाहू सड़क नेहली के पास भूस्खलन होने से बंद हो गई। सड़क पर भारी मात्रा में मलबा आने के कारण दोनों ओर से वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। इससे नाहन और ददाहू के बीच आवाजाही करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उपमंडल अधिकारी नाहन राजीव संख्यान ने बताया कि सड़क से मलबा हटाने का काम जारी है और मार्ग के शाम तक बहाल होने की संभावना है। उन्होंने बताया कि बताया कि नाहन से ददाहू की ओर जाने वाले लोग जमटा-बिरला मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा शिलनू-कैलाश मार्ग से होकर भी ददाहू पहुंचा जा सकता है।
इन जिलों में दो दिन भारी बारिश का येलो अलर्ट
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार प्रदेश के कई भागों में 2 व 3 सितंबर को भारी बारिश का येलो अलर्ट है। 4 से 6 सितंबर तक कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। जबकि 7 व 8 सितंबर को एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश के आसार हैं। आज कांगड़ा, सिरमाैर व मंडी जिले के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट है। वही 3 सितंबर को कांगड़ा व सिरमाैर जिले के लिए अलर्ट है।
मानसून सीजन में अब तक 261 लोगों की गई जान
इस मानसून सीजन में 30 जून से 2 सितंबर तक प्रदेश में आपदा की वजह से 261 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है। 471 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 154 की सड़क हादसों में माैत हुई। इसके अतिरिक्त इस अवधि के दाैरान 34 पक्के और 76 कच्चे मकान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं 463 कच्चे-पक्के मकानों को आंशिक क्षति पहुंची है। इसके अलावा 17 दुकानों व 415 गोशालाओं को भी नुकसान पहुंचा है। प्रदेश में इस मानसून में नुकसान का आंकड़ा 1,20,296.04 लाख रुपये पहुंच गया है।
सितंबर में ऐसा रहेगा माैसम
माैसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार सितंबर के दौरान चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों के कुछ हिस्सों में सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना है। वहीं, राज्य के बाकी हिस्सों में बारिश सामान्य से कम होने की उम्मीद है।हालांकि बिलासपुर जिले के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य रहने की संभावना है। वहीं सितंबर के दौरान देश के ऊंचे और उनसे सटे मध्यम पहाड़ी इलाकों में औसत न्यूनतम तापमान के सामान्य से अधिक रहने की बहुत संभावना है। जबकि निचले और मध्यम पहाड़ी इलाकों में इसके सामान्य या सामान्य से कम रहने की संभावना है। सितंबर में कई हिस्सों में औसत अधिकतम तापमान के सामान्य से अधिक रहने की बहुत संभावना है।
बत्ती दी हट्टी में सात मीटर सड़क धंसी, दो घंटे थमी रही वाहनों की रफ्तार
भरमौर-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर खड़ामुख के समीप बत्ती दी हट्टी में बुधवार को करीब सात मीटर सड़क धंसने से वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो गई। सड़क धंसने के कारण करीब दो घंटे तक हाईवे पर यातायात पूरी तरह थमा रहा। इससे मार्ग से गुजर रहे वाहन चालकों और मणिमहेश यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। सड़क धंसने की सूचना मिलते ही एनएचएआई की टीम मौके पर पहुंची और यातायात बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर काम शुरू किया। मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और अन्य यात्रियों की आवाजाही को देखते हुए एनएचएआई ने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की। टीम ने हाईवे के किनारे से पहाड़ी की तरफ सड़क का विस्तार करते हुए पहाड़ी का कुछ हिस्सा काटकर रास्ता तैयार किया। इसके बाद वाहनों की आवाजाही दोबारा शुरू कर दी गई। उधर, एनएचएआई के साइट प्रभारी साहिल ने बताया कि बत्ती दी हट्टी में करीब सात मीटर सड़क धंसी थी, जिससे यातायात पूरी तरह रुक गया था। यात्रियों की सुविधा और मणिमहेश यात्रा को देखते हुए तत्काल सड़क को पहाड़ी की ओर से काटकर वाहनों के लिए चालू किया गया।