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हिमाचल हाईकोर्ट: बार-बार तारीखें मांगना न्याय व्यवस्था को कैंसर की तरह खोखला कर रहा

Fri, 30 Oct 2026 08:11 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 30 Oct 2026 08:11 PM IST
सार

 हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में बार-बार स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि मुकदमों में बेवजह तारीखें मांगना न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर बीमारी बन चुका है। 

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Himachal High Court: Repeated requests for adjournments are hollowing out the justice system like a cancer
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में बार-बार स्थगन मांगने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने टिप्पणी की कि मुकदमों में बेवजह तारीखें मांगना न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर बीमारी बन चुका है। बार-बार मिलने वाली तारीखें न्याय प्रणाली को कैंसर की तरह खोखला कर रही हैं। इससे न केवल पीड़ितों का न्याय व्यवस्था से भरोसा उठता है, बल्कि न्याय मिलने में भी अनावश्यक देरी होती है। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी बार-बार तारीखें लेकर मुकदमे को अनिश्चितकाल तक खींचता रहे। अदालतों को गलत सहानुभूति दिखाकर लगातार स्थगन देने से बचना चाहिए। अदालत ने भारतीय न्याय व्यवस्था में करोड़ों मामलों के लंबित रहने के पीछे धीमी सुनवाई की प्रवृत्ति को भी प्रमुख कारण बताया। अदालत ने यह टिप्पणी आरोपी शेर सिंह की याचिका खारिज करते हुए की गई। हाईकोर्ट ने कुल्लू की निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें आरोपी का बचाव पक्ष का साक्ष्य पेश करने का अधिकार बंद कर दिया गया था।

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चेक बाउंस से जुड़ा है मामला
यह मामला शिकायतकर्ता कंवर शिव पाल सिंह की ओर से आरोपी के खिलाफ 4.90 लाख रुपये के चेक बाउंस से जुड़ा है। आरोपी के खिलाफ मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कुल्लू की अदालत में मामला विचाराधीन था। मुकदमे के दौरान आरोपी को बेगुनाही साबित करने के लिए गवाह और दस्तावेज पेश करने के कई अवसर दिए गए, लेकिन वह ऐसा नहीं कर पाया। 11 सितंबर 2026 को निचली अदालत ने उसका बचाव पक्ष का साक्ष्य बंद कर दिया। इस आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उसने दलील दी कि वह गंभीर रूप से बीमार था और उसे लकवे का दौरा पड़ा था, जिसके कारण वह अदालत के समक्ष सबूत पेश नहीं कर सका। हालांकि, हाईकोर्ट ने मेडिकल दस्तावेज की जांच में पाया कि आरोपी की ओर से पेश फिजियोथेरेपिस्ट की पर्चियां वर्ष 2023 और 2025 की थीं। उसके पास 11 सितंबर को कोर्ट में सबूत पेश न करने के लिए कोई ताजा और वैध मेडिकल दस्तावेज उपलब्ध नहीं था।
 

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स्कूल के खेल मैदान में चिंतपूर्णी महोत्सव कराने पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब
देश हाईकोर्ट ने जिला ऊना के अंब स्थित राजकीय मॉडल वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला के खेल मैदान में माता चिंतपूर्णी जी महोत्सव आयोजित करने की राज्य सरकार की योजना पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को स्थिति स्पष्ट करने और स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि सरकार चाहती तो आसानी से कोई वैकल्पिक जगह तलाश सकती थी, लेकिन उसकी तरफ से केवल प्रयासों की कमी दिखाई दे रही है।

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खंडपीठ ने कहा कि अंब कोई पहाड़ी इलाका नहीं है, जहां जमीन की कमी हो। अगर स्कूल के एकमात्र खुले मैदान को एक महीने के लिए ब्लॉक कर दिया जाएगा, तो बच्चों के साथ-साथ स्थानीय निवासियों को भी भारी असुविधा होगी, क्योंकि यह उस इलाके का इकलौता खुला क्षेत्र है। हाईकोर्ट ने सरकार को एक हलफनामा दायर कर यह बताने को कहा है कि इस मामले में उसकी क्या योजना है। मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी, जिस दिन सरकार को अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी। राज्य सरकार की दलील थी कि यह खेल मैदान मुख्य स्कूल परिसर से लगभग एक किलोमीटर दूर है और इससे बच्चों की पढ़ाई पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2025 में भी इस मैदान पर महोत्सव का सफल आयोजन किया गया था।

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