{"_id":"6ae4983190d44960bb0a561b","slug":"himachal-high-court-cleared-no-minimum-qualification-then-no-right-to-remain-in-the-job-2026-10-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- न्यूनतम योग्यता नहीं तो नौकरी में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: हाईकोर्ट ने कहा- न्यूनतम योग्यता नहीं तो नौकरी में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं
Fri, 30 Oct 2026 06:44 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 30 Oct 2026 06:44 PM IST
सार
अदालत ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को नौकरी पर रखना सार्वजनिक रोजगार में धोखाधड़ी और अवैधता को बढ़ावा देने जैसा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम अनिवार्य योग्यता न रखने वाले किसी भी अयोग्य उम्मीदवार को सेवा में बने रहने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने कहा कि अयोग्य व्यक्ति को नौकरी पर रखना सार्वजनिक रोजगार में धोखाधड़ी और अवैधता को बढ़ावा देने जैसा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायाधीश रंजन शर्मा की अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केवल इस आधार पर कि उम्मीदवार गलती से चयन प्रक्रिया में शामिल हो गया और उसने जॉइन कर लिया, उसे अयोग्य होने के बावजूद पद पर बने रहने का अधिकार नहीं मिल जाता।
विज्ञापन
विभाग ने उम्मीदवार को अपनी योग्यता साबित करने का पूरा मौका दिया था, लेकिन वह प्रमाणपत्र पेश करने में विफल रहा, इसलिए उसकी बर्खास्तगी पूरी तरह कानूनी और वैध है। याचिकाकर्ता बलदेव को 2014 में स्कूल प्रबंधन समिति के तहत राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल सरनी (मंडी) में अंग्रेजी विषय के पोस्ट-ग्रेजुएट टीचर के रूप में नियुक्त किया गया था। लेकिन भर्ती नियमों के तहत अनिवार्य योग्यता ( एमए इंग्लिश) का डिग्री सर्टिफिकेट न होने के कारण नियुक्ति के महज 10 दिन बाद ही उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थी। याचिकाकर्ता ने इस बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
विज्ञापन