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HP High Court: मैसर्ज ल्यूमिनस पावर कंपनी के कर्मचारी नहीं होंगे तमिलनाडु स्थानांतरित

Tue, 20 Dec 2022 05:00 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Tue, 20 Dec 2022 05:00 AM IST
सार

न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने ल्यूमिनस कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। 

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himachal high court relief to employees of luminous power company Gagret Una
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गगरेट स्थित मैसर्ज ल्यूमिनस पावर कंपनी के कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कंपनी के 12 कर्मचारियों को तमिलनाडु स्थानांतरित न किए जाने के श्रम न्यायालय के फैसले पर मुहर लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अपंजीकृत संघ भी कंपनी के खिलाफ श्रम विवाद उठा सकता है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने ल्यूमिनस कंपनी की याचिका को खारिज करते हुए यह निर्णय सुनाया। 

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मामले के अनुसार मैसर्ज ल्यूमिनस पॉवर कंपनी ऊना जिला के गगरेट में व्यवसाय कर रही है। वर्ष 2018 में कंपनी ने तमिलनाडु में एक शाखा खोली। कंपनी की गगरेट शाखा में कार्यरत 25 कर्मचारियों को तमिलनाडु स्थानांतरित किए जाने के आदेश दिए गए थे। इनमें से 13 कर्मचारियों ने कंपनी के आदेशों को मान लिया और 12 कर्मचारियों ने तमिलनाडु जाने से इंकार कर दिया। कंपनी ने इन 12 कर्मचारियों को शाखा में आने पर पाबंदी लगा दी।
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कर्मचारियों ने श्रम अधिकारी के समक्ष शिकायत की और मामला न सुलझने पर श्रम न्यायालय कांगड़ा भेजा गया। कर्मचारियों ने दलील दी कि वे कर्मचारी यूनियन को पंजीकृत करने की प्रक्रिया में थे। यूनियन पंजीकृत न हो, इसके लिए 25 कर्मचारियों को तमिलनाडु स्थानांतरित किया गया है। कंपनी की ओर से दलील दी गई थी कि अपंजीकृत संघ अधिनियम के प्रावधानों में यूनियन की परिभाषा में नहीं आता है और श्रम विवाद उठाने के लिए सक्षम नहीं है।
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श्रम अदालत ने कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेशों को रद्द कर दिया था। श्रम अदालत के इस निर्णय को कंपनी ने हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि श्रम अदालत ने सही फैसला सुनाया है। अपंजीकृत संघ भी श्रम विवाद को अदालत के समक्ष उठाने में सक्षम है। 

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