HP High Court: वीसी के सेवाविस्तार को चुनौती वाली याचिका खारिज, स्वतंत्रता सेनानी की विधवा को पेंशन बरकरार
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के पेंशन दावों पर निर्णय लेते समय एक उदार और गैर तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ ने भारत संघ और प्रदेश सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए स्वतंत्रता सेनानी की विधवा को पेंशन देने के एकल न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखा है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 2 महीने के भीतर साल 2012 से बकाया पेंशन राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। यदि इस अवधि में भुगतान नहीं किया गया तो बकाया राशि पर 8 फीसदी की प्रतिवर्ष की दर से दंडात्मक ब्याज लगाया जाएगा। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के पेंशन दावों पर निर्णय लेते समय एक उदार और गैर तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
यह योजना उन लोगों का सम्मान करने और उनके नुकसान को कम करने के लिए है, जिन्होंने देश के लिए सब कुछ कुर्बान कर दिया। खंडपीठ ने बिलासपुर रियासत के पूर्व गृह मंत्री और पुलिस अधीक्षक रहे संतराम के 19 अगस्त 1975 को जारी किए गए प्रमाण पत्र को पर्याप्त माना, जिसमें प्रमाणित किया था कि तेज सिंह प्रजामंडल आंदोलन में एक सक्रिय सदस्य थे। उन्हें 22 अक्तूबर 1946 को राज्य से निर्वासित कर दिया गया था। वर्तमान अपीलें भारत संघ और हिमाचल राज्य ने वर्ष 2017 में एकल जज के निर्णय के खिलाफ दायर की गई थीं। यह याचिका स्वतंत्रता सेनानी तेज सिंह की विधवा महंती देवी ने स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना 1980 के तहत पेंशन की मांग की थी। एकल न्यायाधीश ने हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों को हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 2012 में वित्तीय सहायता प्रदान करने की योजना के तहत पेंशन देने के निर्देश दिए थे।
नौणी विवि के कुलपति के सेवा विस्तार की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि कुलाधिपति ने उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति देकर कोई अवैध कार्य नहीं किया है। राज्यपाल ने 6 मई को कुलपति राजेश्वर सिंह चंदेल के कार्यकाल विस्तार को मंजूरी दी थी। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने याचिकाकर्ता के तर्कों को खारिज करते हुए कुलपति के कार्यकाल विस्तार के आदेश को वैध माना। अदालत ने कहा कि कुलाधिपति के पास अधिकार है कि वह कुलपति को पद पर बने रहने की अनुमति दे सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने कुलपति की नियुक्ति को रद्द करने की मांग नहीं की थी। संवाद
हाईकोर्ट ने एनएलयू के निलंबित सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति की बहाल
प्रदेश हाईकोर्ट ने नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एनएलयू) घंडल के निलंबित अनुबंध कर्मचारियों की नियुक्तियों को बहाल करने के आदेश दिए हैं। इन कर्मचारियों को पहले अनुबंध के आधार पर विश्वविद्यालय नियुक्त किया था। बाद में इनकी सेवाओं को मौखिक तौर पर समाप्त कर दिया गया था। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत में इनकी प्रारंभिक नियुक्ति की तिथि से नियमित करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही उनकी सेवा की अवधि को सभी परिणामी लाभों और वरिष्ठता के लिए गिनने को कहा है। न्यायालय ने पाया कि राष्ट्रीय विश्वविद्यालय ने जानबूझकर याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवाओं में ब्रेक दी थी, जिससे कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में 240 दिन की सेवा पूरी न कर सकें, जो हिमाचल प्रदेश सरकार की नियमितीकरण नीति के तहत आवश्यक है। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ताओं की सेवा समाप्ति के बाद भी विश्वविद्यालय में काम उपलब्ध था। उनकी ड्यूटी बाद में स्वीपर और चपरासी जैसे अन्य कर्मचारियों को सौंप दी गई थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय ने सेवा समाप्ति के तुरंत बाद 8 जनवरी 2025 को सुरक्षा गार्ड्स की भर्ती के लिए एक नया विज्ञापन भी जारी किया था, जिसे बाद में इस मामले के कारण वापस ले लिया गया।