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पूर्व मंत्री ने महिला से की धोखाधड़ी, हाईकोर्ट ने दिए जांच के आदेश

Sat, 21 May 2016 04:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 21 May 2016 04:42 PM IST
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himachal high court order to probe former minister fraud case
हिमाचल हाईकोर्ट

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि मोहिंद्र नाथ सोफत के खिलाफ  महिला द्वारा लगाये गए वित्तीय धोखाधड़ी के आरोपों की जांच पूरा कर न्यायालय में चार्जशीट दायर करे। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश संदीप शर्मा ने वीना गुप्ता की याचिका की प्रारंभिक सुनवाई के बाद यह आदेश दिए।

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कसौली तहसील के धर्मपुर में धार की बेढ गांव की वीना गुप्ता ने आरोप लगाया है की शांता कुमार सरकार में रहे पूर्व परिवहन मंत्री व हिलोपा के पूर्व उपाध्यक्ष मोहिंद्र नाथ सोफत ने पेट्रोल पंप को लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की है। उसने इसकी शिकायत कई बार पुलिस को की लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने से इंकार कर दिया। मजबूरन उसे न्यायिक दंडाधिकारी कसौली में प्राथमिकी दर्ज करवाने के लिए याचिका दायर करनी पड़ी।
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26 फरवरी 2014 को कोर्ट के आदेशानुसार एफआईआर दर्ज तो हुई लेकिन आज तक मामला आगे नहीं बढ़ा। पुलिस पर लापरवाही व राजनीतिक दबाव के कारण जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोपी के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेशों के लिए गुहार लगाई थी।

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'फर्म में 34 लाख लगाए लेकिन एक पैसा वापस नहीं मिला'

himachal high court order to probe former minister fraud case
कोर्ट

प्रार्थी के आरोपों के अनुसार जय हिंद फिलिंग स्टेशन लगाने के लिए आरोपी मोहिंद्र नाथ सोफत ने उससे मौखिक समझौता कर लाखों रुपए कार्य पूरा करने के लिए लगवाए और कहा कि वह उसके साथ फिफ्टी फिफ्टी की पार्टनरशिप करेगा। यदि वह कुल लागत में अपनी हिस्सेदारी अधिक लगाती है तो उसकी अतिरिक्त हिस्सेदारी के एवज में उसके नाम 51 फीसदी जमीन कर दी जाएगी।

यह पेट्रोल पंप वर्ष जून 2006 में शुरू हुआ और इंडियन आयल कंपनी के नियमों के मुताबिक शुरूआती 5 वर्षों तक पंप चलाने के लिए कोई पार्टनरशिप नहीं की जा सकती। इसलिए आरोपी ने उसके साथ 25 अप्रैल 2013 को पार्टनरशिप डीड तैयार कर पंजीकृत करवाई। प्रार्थी का आरोप है कि आरोपी अपने ही नाम पर इस कारोबार को कर रहा है। उसके द्वारा लगाई गई राशि न तो उसे लौटाई गई और न ही पार्टनरशिप डीड के मुताबिक उसे उसकी हिस्सेदारी दी जा रही है।

आरोपी इनकम टेक्स व बैंकों से भी पार्टनरशिप छिपाकर उनसे धोखाधड़ी कर रहा है। वह पार्टनरशिप के बावजूद फर्म का अकेला मालिक बना हुआ है। प्रार्थी का आरोप है की उसने इस फर्म में 34 लाख 27 हजार रुपये से अधिक की राशि लगाई। इसकी एवज में उसे आरोपी ने कुछ भी नहीं दिया और समझौते को दरकिनार कर वह गैरकानूनी ढंग से फायदा ले रहा है।

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