शास्त्री परीक्षा रद्द करने की याचिका पर प्रदेश सरकार को नोटिस
शिक्षा विभाग में शास्त्री पदों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा रद्द करने संबंधी याचिका पर प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से दो हफ्ते में जवाब तलब किया है। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग हमीरपुर की ओर से 28 मई को यह परीक्षा आयोजित की गई थी। हाईकोर्ट ने याचिका का संज्ञान लेते हुए कर्मचारी चयन आयोग के सचिव, एसडीएम ठियोग, राजकीय कन्या विद्यालय ठियोग के परीक्षा केंद्र अधीक्षक व प्रधानाचार्य को भी नोटिस जारी किया है।
मामले पर सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए अधिवक्ता राजिंद्र डोगरा को एमिक्स क्यूरी भी नियुक्त किया। बेरोजगार शास्त्री संघ के अध्यक्ष व अन्य परीक्षार्थियों द्वारा लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि 28 मई को आयोजित इस परीक्षा में ठियोग परीक्षा केंद्र में परीक्षार्थियों ने जमकर नकल की।
कुछ परीक्षार्थी पुस्तक, मोबाइल फोन का प्रयोग भी कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस परीक्षा में किसी भी तरह की पारदर्शिता नहीं बरती गई। एक-एक बेंच पर तीन-तीन परीक्षार्थी बैठे थे। प्रार्थियों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि कर्मचारी चयन आयोग पर उचित कार्रवाई करके ठियोग परीक्षा केंद्र को रद्द किया जाए। उन्होंने दोबारा इस परीक्षा को करवाने की मांग की है ताकि मेहनत करने वाले परीक्षार्थियों में गलत संदेश न जाए। प्रार्थियों ने ठियोग परीक्षा केंद्र के संचालकों पर कार्रवाई करने की मांग भी की है।
पानी आवंटन में गड़बड़ी पर मुख्य सचिव, मुख्य अभियंता को नोटिस
हाईकोर्ट ने नगर निगम के कर्मचारियों की ओर से पीने के पानी को होटल मालिकों, ठेकेदारों और अन्य अज्ञात लोगों को बेचने के आरोप को लेकर सुनवाई के दौरान संज्ञान लेते हुए प्रदेश मुख्य सचिव, प्रधान सचिव आईपीएच और मुख्य अभियंता लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किए।
हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के नाम टुटू, चक्कर और ढांडा के लोगों के लिखे पत्र में यह आरोप हैं कि जहां एक ओर शिमला के स्थानीय लोगों को पीने के पानी की सप्लाई पूर्ण रूप से नहीं हो रही है। वहीं निगम के कर्मचारियों की ओर से निजी होटल मालिकों, लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों और शिमला शहर के कई अज्ञात लोगों को पानी बेचा जा रहा है।
इस पत्र में इस प्रकरण के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जरूरी कार्रवाई अमल में लाने का आग्रह किया गया है। साल 2016 में राज्य सरकार ने नियमों के विपरीत निर्मित भवनों को नियमित करने के लिए रिटेंशन पॉलिसी को लागू किया था। लोगों ने पॉलिसी का लाभ लेने के लिए दिन-रात भवनों का निर्माण करवाया। इस निर्माण के दौरान पीने के पानी का इस्तेमाल किया गया। नगर निगम कर्मचारियों की ओर से इन लोगों को पानी मुहैया करवाया गया।
शहर में 700 के लगभग होटल हैं। इन्हें भारी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ती है। पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि कई होटलों के पास पानी के टैंक हैं। इनकी क्षमता 1000 लीटर के लगभग है। इन्हें मुख्य लाइन से पानी के कनेक्शन दिए गए हैं। यह पानी सप्लाई इन्हें 24 घंटे गैरकानूनी तरीके से मुहैया करवाया जा रहा है।
प्रार्थियों ने न्यायालय से यह आग्रह किया है कि नगर निगम शिमला से इस बाबत जानकारी मांगी जाए कि कितने होटल मालिकों को मुख्य लाइन से सीधे पानी का कनेक्शन दिया गया है। प्रार्थियों ने जांच की वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटो भी न्यायालय के समक्ष रखने का आग्रह किया है। प्रार्थियों ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाए जाने का आग्रह किया है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब तीन जून को होगी।